पशु संरक्षण कानूनों पर कार्यशाला के लिए आंध्र प्रदेश राज्य वन अकादमी ने PETA इंडिया से मिलाया हाथ

Posted on by Surjeet Singh

इस सप्ताह PETA इंडिया ने वन्यजीवों के प्रति क्रूरता रोकने और पशु संरक्षण कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने के उद्देश्य से दो दिवसीय प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यशाला आयोजित की। इसमें लगभग 100 वन अधिकारी शामिल हुए। इनमें उप वन संरक्षक (Deputy Conservator of Forests), प्रभागीय वन अधिकारी (Divisional Forest Officer), सहायक वन संरक्षक (Assistant Conservator of Forests) और वन क्षेत्र अधिकारी (Forest Range Officers) जैसे वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे। यह कार्यशाला आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के राजमहेंद्रवरम स्थित आंध्र प्रदेश वन अकादमी में आयोजित की गई।

यह कार्यशाला आंध्र प्रदेश राज्य वन अकादमी (APSFA) के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (CCF) एवं निदेशक श्री बी. विजय कुमार, IFS के दूरदर्शी नेतृत्व में शुरू की गई पहल के तहत आयोजित की गई। इस पहल में PETA इंडिया ने सहयोग किया। अकादमी ने PETA इंडिया को अपने प्रशिक्षु अधिकारियों, कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए जागरूकता कार्यशाला आयोजित करने के लिए आमंत्रित किया था।

PETA इंडिया के कानूनी सलाहकार और पशु क्रूरता प्रतिक्रिया विभाग के निदेशक मीत आशर, आंध्र प्रदेश वन अकादमी के अधिकारियों के साथ।

कार्यशाला में वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972, वन्यजीव अपराधों के मामलों में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960, दोनों कानूनों के समन्वित इस्तेमाल और मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रबंधन जैसे प्रमुख विषयों पर चर्चा की गई। इसका उद्देश्य प्रतिभागियों को वन्यजीवों और अन्य पशुओं की सुरक्षा से जुड़े कानूनी, नैतिक और व्यावहारिक पहलुओं की बेहतर समझ देना था।

इस कार्यक्रम के आयोजन में APSFA के उप वन संरक्षक एवं कोर्स निदेशक श्री वी. श्रीहरि गोपाल और कई सहायक वन संरक्षकों ने सहयोग दिया। दो दिवसीय प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम में PETA इंडिया के कानूनी सलाहकार एवं पशु क्रूरता प्रतिक्रिया विभाग के निदेशक मीत आशर, संगमित्रा एनिमल फाउंडेशन के वन्यजीव विभाग के प्रमुख मोहम्मद इदरीस खान और काकीनाडा स्थित एनिमल रेस्क्यू ऑर्गनाइज़ेशन के संस्थापक एवं सचिव गोपाल सुरबथुला वक्ता के रूप में शामिल हुए। उनके योगदान और सहयोग से कार्यशाला सफल रही।

हाल ही में, पहली बार राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने देश में पशुओं के प्रति क्रूरता के मामलों का रिकॉर्ड तैयार किया। इसके अनुसार, वर्ष 2024 में ऐसे 9,039 मामले दर्ज किए गए और 10,312 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

वर्ष 2021 में, फेडरेशन ऑफ इंडियन एनिमल प्रोटेक्शन ऑर्गनाइज़ेशन्स की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि उससे पहले के दस वर्षों में लगभग 5 लाख पशु अपराधों के शिकार हुए थे।
कई हिंसक अपराधियों का पशुओं के प्रति क्रूरता का पुराना रिकॉर्ड रहा है। फॉरेंसिक रिसर्च एंड क्रिमिनोलॉजी इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, “पशुओं के प्रति क्रूरता करने वाले लोगों में हत्या, बलात्कार, लूटपाट, मारपीट, उत्पीड़न, धमकी देने और नशीले पदार्थों के सेवन सहित अन्य अपराध करने की आशंका तीन गुना अधिक होती है।”

यह पहल पूरे भारत में कानून लागू करने वाले अधिकारियों को जागरूक करने और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं को सक्षम बनाने के PETA इंडिया के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है, ताकि पशुओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को गंभीरता से लिया जाए और उन पर उचित कार्रवाई हो सके। इससे पहले भी PETA इंडिया ने ग्वालियर में सीमा सुरक्षा बल (BSF), छत्तीसगढ़ पुलिस, गोवा पुलिस एवं गोवा पशुपालन और पशु चिकित्सा सेवा विभाग, सिक्किम पुलिस, पुणे और नागपुर पुलिस, मीरा-भायंदर एवं वसई-विरार पुलिस, बेलगावी और हुबली-धारवाड़ पुलिस, बेंगलुरु पुलिस, जम्मू, कठुआ और सांबा जिला पुलिस, बेंगलुरु एवं चिक्कमगलुरु पुलिस प्रशिक्षण स्कूलों, दिल्ली पुलिस के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट, केरल पुलिस अकादमी (KEPA), त्रिशूर, बेंगलुरु जिला पुलिस और तुमकुरु जिला पुलिस के साथ इसी तरह की जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित की हैं।

PETA इंडिया लंबे समय से पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम, 1960 (PCA Act) को मजबूत बनाने के लिए अभियान चला रहा है। इस कानून में अब भी पुराने और अपर्याप्त दंड का प्रावधान है। उदाहरण के लिए, पहली बार दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति पर अधिकतम 50 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है, जबकि भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 में अधिक कठोर दंड का प्रावधान है। PCA Act में संशोधन के संबंध में केंद्र सरकार को भेजे गए प्रस्ताव में PETA इंडिया ने पशुओं के प्रति क्रूरता करने वालों के लिए दंड में उल्लेखनीय वृद्धि करने की सिफारिश की है।

पशु क्रूरता के मामलों में सख्त सज़ा की मांग

जब भी पशु क्रूरता देखें तो उसकी शिकायत ज़रूर करें।