मीरा-भायंदर, वसई-विरार पुलिस कमिश्नरेट ने पशुओं पर क्रूरता रोकने के लिए PETA इंडिया को लगभग 100 पुलिस अधिकारियों के लिए कार्यशाला आयोजित करने के लिए बुलाया
आज, मीरा-भायंदर, वसई-विरार पुलिस कमिश्नरेट के लगभग 100 पुलिस अधिकारी कमिश्नर ऑफिस में एकत्र हुए, जहां PETA इंडिया द्वारा पशुओं पर हो रही क्रूरता को रोकने के विषय पर एक विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। यह महत्वपूर्ण पहल श्री मधुकर पांडे, आईपीएस, (पूर्व पुलिस कमिश्नर – मीरा-भायंदर, वसई-विरार), जिनका हाल ही में तबादला हुआ है और अब वे महाराष्ट्र पुलिस मुख्यालय में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (प्रशासन) के रूप में कार्यरत हैं, और वर्तमान पुलिस कमिश्नर श्री निकेत कौशिक, आईपीएस के मार्गदर्शन में संभव हो पाई। इस कार्यशाला को ठाणे के पशु अधिकार कार्यकर्ता और जेसलपार्क चौपाटी कल्याण समिति के महासचिव डॉ. नरेंद्र गुप्ता का भी सहयोग प्राप्त हुआ।
तीन घंटे की इस कार्यशाला में 20 पुलिस थानों से पुलिस कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल, असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर, सब-इंस्पेक्टर, असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर और पुलिस इंस्पेक्टर शामिल हुए। कार्यशाला में पशुओं के प्रति क्रूरता की रोकथाम अधिनियम, 1960, वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (2022 में संशोधित), भारतीय न्याय संहिता, 2023, और अन्य पशु सुरक्षा कानूनों के अहम प्रावधानों पर चर्चा की गई।
पशुओं को सुरक्षित रखने में पुलिस की भूमिका बेहद अहम है। हम मीरा-भायंदर, वसई-विरार पुलिस के इस प्रयास की सराहना करते हैं कि वे पशुओं पर होने वाली क्रूरता पर सख्ती से कार्रवाई करना चाहते हैं। PETA इंडिया इस नेक काम में उनका साथ देने के लिए गर्व महसूस कर रहा है। पशुओं पर क्रूरता के प्रति MBVV पुलिस की जीरो टॉलरेंस नीति, न केवल पशुओं की रक्षा करेगी, बल्कि समाज को भी सुरक्षित बनाएगी।
यह पहल PETA इंडिया के उस अभियान का हिस्सा है जिसके अंतर्गत देश भर में कानून प्रवर्तन एजेंसियों को पशु अधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाया जा रहा है और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं को सशक्त किया जा रहा है, ताकि पशुओं के खिलाफ अपराधों को गंभीरता से लिया जाए। इससे पहले ऐसे जागरूकता कार्यक्रम ग्वालियर में बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (अक्टूबर 2024), छत्तीसगढ़ पुलिस (नवंबर 2024), गोवा पुलिस और पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवाएं विभाग (अप्रैल 2025), पुणे पुलिस (अप्रैल 2025), नागपुर पुलिस (मई 2025), बेलगावी और हुबली-धारवाड़ पुलिस व स्थानीय पशु बचावकर्ताओं के साथ (जून 2025) और सिक्किम पुलिस, पशुपालन विभाग और स्थानीय पशु बचावकर्ताओं (जुलाई 2025) के साथ भी आयोजित किए जा चुके हैं।
साल 2021 में फेडरेशन ऑफ इंडियन एनिमल प्रोटेक्शन ऑर्गनाइजेशन्स द्वारा जारी एक रिपोर्ट में बताया गया था कि बीते एक दशक में लगभग 5 लाख पशु अपराधों के शिकार हुए।
PETA इंडिया यह भी बताता है कि कई हिंसक अपराधियों का पशुओं पर क्रूरता का पुराना इतिहास रहा है। Forensic Research and Criminology International Journal में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, “पशुओं पर क्रूरता करने वाले लोग, हत्या, बलात्कार, लूट, हमला, उत्पीड़न, धमकी, और नशीले पदार्थों के सेवन जैसे अन्य अपराधों में लिप्त होने की तीन गुना अधिक संभावना रखते हैं।”
पशुओं के प्रति क्रूरता करने वालों के लिए सख़्त सज़ा की मांग करें



