PETA इंडिया - <span class="one" style='text-align:center;font-size: 1.28rem;'>ANIMALS ARE NOT OURS</span> <span class="two" style='font-size:1.0rem;text-align:center'>TO EXPERIMENT ON, EAT, WEAR, USE </span><span class="three" style="text-align:center;font-size:1.0rem">FOR ENTERTAINMENT, OR ABUSE IN ANY OTHER WAY.</span>
ANIMALS ARE NOT OURSTO EXPERIMENT ON, EAT, WEAR, USE FOR ENTERTAINMENT, OR ABUSE IN ANY OTHER WAY.
PFCI, PETA इंडिया और अन्य संगठनों ने चेन्नई पुलिस के साथ मिलकर एक संयुक्त अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप चेन्नई में पी.सी. सरकार और धाया के इंटरनेशनल मैजिक शो से …
PETA इंडिया और स्ट्रे एनिमल फाउंडेशन इंडिया (SAFI) के प्रयासों के बाद तेलंगाना के सिद्धिपेट में पेड्डम्मा बोनालु उत्सव के दौरान एक बकरे की बर्बर बलि के मामले में …
PETA इंडिया ने माननीय प्रधानमंत्री और माननीय केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री को पत्र लिखकर पालामूर बायोसाइंसेज़ के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। यह वही प्रयोगशाला है, …
पशुओं के लिए एक महत्वपूर्ण जीत में, अल-अज़हर कॉलेज ऑफ फार्मेसी इंडिया ने विवादास्पद फोर्स्ड स्विम टेस्ट (FST) पर पूर्ण प्रतिबंध का आधिकारिक समर्थन किया है। इस प्रयोग में चूहों, हैम्स्टरों और अन्य छोटे पशुओं को परीक्षण पदार्थ दिए जाते हैं, फिर उन्हें पानी से भरे ऐसे बर्तनों में डाल दिया जाता है, जहां से वे बाहर नहीं निकल सकते, और डूबने से बचने के लिए उन्हें लगातार तैरने पर मजबूर किया जाता है। यह दावा किया जाता है कि इस प्रयोग से मानव अवसाद को समझने में मदद मिलती है। यह निर्णय PETA इंडिया द्वारा चलाए गए एक प्रभावी अभियान के बाद लिया गया, जिसमें इस परीक्षण की अंतर्निहित क्रूरता और वैज्ञानिक विफलताओं को उजागर किया गया था।
इस प्रयोग की वैज्ञानिकों द्वारा व्यापक आलोचना की गई है। उनका कहना है कि जब पशु संघर्ष करना छोड़कर पानी में तैरते हुए स्थिर हो जाते हैं, तो यह अवसाद या निराशा का संकेत नहीं होता, बल्कि ऊर्जा बचाने और नए वातावरण के अनुकूल होने का संकेत होता है। शोध यह भी दर्शाते हैं कि अवसादरोधी दवाओं की प्रभावशीलता निर्धारित करने में यह परीक्षण सिक्का उछालकर निर्णय लेने से भी कम विश्वसनीय हो सकता है।
PETA इंडिया को भेजे गए एक ईमेल में अल-अज़हर कॉलेज ऑफ फार्मेसी के प्राचार्य प्रो. डॉ. श्यामकुमार बी ने पुष्टि की कि उनका संस्थान “फोर्स्ड स्विम टेस्ट पर पूर्ण प्रतिबंध का समर्थन करता है, क्योंकि इसके वैकल्पिक तरीके उपलब्ध हैं।”
Credit:Fst Exhibition (bit.ly/2VMJoSk) | charcoalnih (bit.ly/2HlHijf) | CC BY 3.0 (bit.ly/1E6HPMf)
फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली सभी संस्थाओं को दो बार—अप्रैल 2025 और जनवरी 2026 में—PETA इंडिया के उस अनुरोध की समीक्षा करने और आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है, जिसमें लंबे समय से अविश्वसनीय साबित हो चुके इस प्रयोग को समाप्त करने की मांग की गई थी। 100 से अधिक वैज्ञानिकों और वैज्ञानिक विशेषज्ञों ने भी नियामक संस्थाओं और शैक्षणिक संस्थानों से फोर्स्ड स्विम टेस्ट बंद करने की मांग करते हुए PETA इंडिया के अभियान का समर्थन किया है।
दुनिया भर में कई सरकारी एजेंसियों, विश्वविद्यालयों और दवा कंपनियों ने भी PETA संगठनों से जानकारी मिलने के बाद इस प्रयोग को अनुमति न देने, न करने और न ही इसके लिए वित्तीय सहायता देने का संकल्प लिया है। PETA इंडिया अब पशुओं पर प्रयोगों के नियंत्रण और पर्यवेक्षण समिति (CCSEA) से राष्ट्रीय स्तर पर इस क्रूर प्रयोग पर प्रतिबंध लगाने की मांग को और तेज कर रहा है।