आप जब भी किसी पशु को संकट या परेशानी में देखे तो…यह कदम उठाएं

Posted on by PETA

यदि आपको किसी ऐसे मामले की सूचना देनी है जिसमें कोई पशु तत्काल खतरे में हो, तो कृपया हमारे आपातकालीन नंबर 9820122602 पर कॉल करें। यदि कोई पशु घायल है, तो सहायता मिलने तक कृपया उसके साथ रहें।

यदि आपने किसी पशु के साथ क्रूरता की कोई अवैध घटना देखी है, तो उससे जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारी दर्ज करें और तुरंत पुलिस में प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करवाएं। यदि आपने वन्यजीवों के साथ क्रूरता की कोई अवैध घटना देखी है, तो कृपया अपने राज्य के वन विभाग के माध्यम से किसी वन अधिकारी से भी संपर्क करें। उनके संपर्क विवरण आमतौर पर इंटरनेट पर आसानी से मिल जाते हैं। पशु संरक्षण कानूनों की जानकारी एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया की वेबसाइट (awbi.gov.in) पर उपलब्ध है। कृपया यह मार्गदर्शिका भी देखें [https://www.petaindia.com/blog/9-things-to-do-if-you-witness-cruelty-to-animals/]।

आपको तत्काल सहायता के लिए अपने क्षेत्र के किसी पशु चिकित्सक या पशु संरक्षण समूह से संपर्क करने की भी आवश्यकता पड़ सकती है। यदि आप भारत में रहते हैं, तो आप Justdial.com के सर्च इंजन के माध्यम से पशु चिकित्सकों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, और सरकारी पशु चिकित्सकों के लिए अपने राज्य के पशुपालन विभाग से संपर्क कर सकते हैं। वन्यजीवों का इलाज करने में अनुभवी पशु चिकित्सकों की जानकारी आपके राज्य के वन विभाग से मिल सकती है। भारतभर के पशु संरक्षण समूहों की निर्देशिकाएं नीचे दिए गए लिंक पर उपलब्ध हैं। कृपया ध्यान दें कि PETA इंडिया को सूचीबद्ध प्रत्येक समूह के साथ काम करने का अवसर नहीं मिला है और इसलिए उनके काम और सेवा की गुणवत्ता की गारंटी नहीं दी जा सकती। इसलिए कृपया घायल या बीमार पशु के साथ रहें और सुनिश्चित करें कि उसे उचित उपचार और देखभाल मिले या यदि उसकी स्थिति अत्यंत गंभीर हो तो उसे पीड़ा से मुक्ति दिलाई जाए, न कि उसे तड़पने के लिए छोड़ दिया जाए।

किसी भी पशु को खतरे में न रहने दें। यदि आपको अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता हो, तो किसी भी समय PETA इंडिया से संपर्क करें।

आप निम्नलिखित वेबसाइटों के माध्यम से स्थानीय पशु संरक्षण समूहों या पशु चिकित्सकों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं:

वर्ल्ड एनिमल नेट‘ दुनिया भर के पशु संरक्षण समूहों की निर्देशिका प्रदान करता है।
वी फॉर एनिमल्स‘ भारत में पशु चिकित्सकों, पशु चिकित्सालयों, पशु एम्बुलेंस और पशु कल्याण संगठनों की सूची उपलब्ध कराता है।
पीपल फॉर एनिमल‘ भारतभर में अपनी सभी इकाइयों के संपर्क विवरण उपलब्ध कराता है।

People for Animals की इकाइयाँ

एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया द्वारा मान्यता प्राप्त राज्यवार मानद पशु कल्याण अधिकारियों की सूची यहां उपलब्ध है।

PETA इंडिया की आपातकालीन सेवाओं से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q: PETA इंडिया अपनी आपातकालीन सेवाओं के माध्यम से किन पशुओं की सहायता करता है?
A: PETA इंडिया की निःशुल्क आपातकालीन पशु-चिकित्सा और बचाव सेवाएँ मुंबई और दिल्ली में घायल एवं बीमार सामुदायिक और वन्य पशुओं (ऐसे पशु जो किसी घर में नहीं रहते और जिनका कोई संरक्षक नहीं होता) के लिए उपलब्ध हैं। इन क्षेत्रों के बाहर, PETA इंडिया स्थानीय NGOs, पशु संरकाशन समूह या अन्य सहायता प्रदान करने वाले स्रोतों की जानकारी प्रदान करेगा। सीमित एम्बुलेंस सेवाओं के कारण, मुंबई और दिल्ली में भी कभी-कभी PETA इंडिया को बाहरी सहायता की सिफारिश करनी पड़ सकती है। वन्य पशुओं के मामलों में PETA इंडिया सामान्यतः वन विभाग के अधिकारियों के सहयोग से कार्य करता है।

Q: यदि मेरे पालतू पशु को उपचार की आवश्यकता हो तो क्या करूँ?
A: यदि आपके पालतू पशु (जिसका कोई संरक्षक हो) को उपचार की आवश्यकता है, तो कृपया किसी निजी पशु चिकित्सक या क्लिनिक में जाएँ।

Q: क्या मैं PETA इंडिया को यह निर्देश दे सकता/सकती हूँ कि कौन-सा उपचार किया जाए?
A: नहीं। चाहे आपकी भावना कितनी भी अच्छी क्यों न हो, PETA इंडिया आम लोगों से उपचार संबंधी निर्देश स्वीकार नहीं करता, जैसे कोई मानव चिकित्सक भी ऐसा नहीं करेगा। यदि आप किसी विशेष उपचार की इच्छा रखते हैं, तो कृपया सामुदायिक पशु को सुरक्षित और हवादार क्रेट में किसी निजी पशु चिकित्सक के पास ले जाएँ।

Q: क्या PETA इंडिया मेरे द्वारा चुनी गई पशु-चिकित्सा सेवा का खर्च उठाएगा?
A: नहीं। यदि आपने किसी सामुदायिक पशु के लिए PETA इंडिया के बाहर पशु-चिकित्सा सेवाओं की व्यवस्था की है, तो उस पशु की देखभाल और चिकित्सा खर्च की जिम्मेदारी आपकी होगी।

Q: क्या PETA इंडिया पशु को मेरी पसंद के किसी केंद्र तक पहुंचाएगा?
A: नहीं। एक बार PETA इंडिया किसी पशु को अपने संरक्षण में ले लेता है, तो उसकी देखभाल PETA इंडिया की निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार की जाएगी।

Q: PETA इंडिया को कितनी कॉल्स प्राप्त होती हैं?
A: PETA इंडिया की आपातकालीन हेल्पलाइन पर पूरे भारत से प्रतिदिन औसतन लगभग 1,400 कॉल्स प्राप्त होती हैं।

Q: क्या PETA इंडिया मामलों की रिपोर्ट या अपडेट प्रदान कर सकता है?
A: हमारे सीमित संसाधनों को आपातकालीन मामलों पर केंद्रित रखने के लिए, PETA इंडिया विस्तृत रिपोर्ट, मेडिकल रिपोर्ट या लगातार अपडेट प्रदान नही कर सकता। हालांकि, अनुरोध किए जाने पर हम मूल शिकायतकर्ता को बुनियादी जानकारी देने का प्रयास करते हैं।

Q: क्या PETA इंडिया स्वयं पशुओं का उपचार करता है?
A: हाँ। PETA इंडिया के पशु चिकित्सक और उनके सहायक अक्सर स्वयं पशुओं का उपचार करते हैं, विशेष रूप से तब जब मौके पर ही उपचार संभव हो।

Q: जिन बचाए गए पशुओं को अस्पताल में भर्ती या विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है, उन्हें PETA इंडिया कहाँ ले जाता है?
A: PETA इंडिया उपलब्धता और आवश्यकता के अनुसार साझेदार क्लिनिकों और NGOs के नेटवर्क का उपयोग करता है।

Q: PETA इंडिया अपने साझेदार क्लिनिकों या NGOs की जानकारी साझा क्यों नहीं करता?
A: कॉल्स की अधिक संख्या के कारण, PETA इंडिया के साझेदार सार्वजनिक फॉलो-अप (कॉल्स/मुलाकातों) को संभालने में सक्षम नहीं होते और उन्होंने अनुरोध किया है कि उनके विवरण साझा न किए जाएँ, ताकि वे जरूरतमंद पशुओं की सहायता पर ध्यान केंद्रित कर सकें। कृपया PETA इंडिया के साथ संपर्क बनाए रखें, और हम आपकी सहायता करने का पूरा प्रयास करेंगे।

Q: यदि किसी पशु की मृत्यु हो जाए, तो क्या PETA इंडिया उसका शव सार्वजनिक रूप से सौंप सकता है?
A: चूँकि PETA इंडिया बीमार, गंभीर रूप से घायल या मरने की स्थिति में पहुँचे पशुओं के साथ कार्य करता है, इसलिए यदि कोई पशु जीवित नहीं बचता, तो सार्वजनिक सुरक्षा और संक्रामक रोगों के प्रसार को रोकने के लिए स्थिति को निर्धारित तरीके से संभालना आवश्यक होता है। हम अंतिम संस्कार के लिए शव आम लोगों को नहीं सौंप सकते।

Q: किसी पशु के जीवित बचने की संभावना बढ़ाने के लिए मुझे क्या करना चाहिए?
A: जैसे ही आप कोई आपात स्थिति देखें, तुरंत उसकी सूचना दें और प्रतीक्षा न करें। PETA इंडिया जीवन बचाने का हर संभव प्रयास करता है, लेकिन हमें अक्सर गंभीर दुर्घटनाओं और बीमारी की अत्यधिक उन्नत अवस्था वाले मामले मिलते हैं, जिनमें हम केवल अपनी पूरी कोशिश कर सकते हैं।

Q: यदि कोई पशु जीवित नहीं बचता तो क्या?
A: हम आपकी चिंता और दुःख को समझते हैं। हम पूरी कोशिश करते हैं, लेकिन कृपया यह भी समझें कि कुछ गंभीर स्थितियाँ पहली नजर में दिखाई नहीं देतीं, जैसे आंतरिक रक्तस्राव हो तो वो भी जानलेवा हो सकता है।

Q: एम्बुलेंस कितनी जल्दी पहुंचेगी?
A: PETA इंडिया को आपात स्थिति की गंभीरता के अनुसार प्राथमिकता तय करनी होती है। यदि पशु मुंबई या दिल्ली में है, तो हम यथाशीघ्र आपके पास पहुँचने का प्रयास करेंगे और अनुमानित समय की जानकारी देंगे, या आपके निकट किसी अन्य NGO की सिफारिश करेंगे।

Q: यदि मैं मुंबई या दिल्ली के बाहर हूँ तो क्या होगा?
A: इन क्षेत्रों के बाहर, हम आपको स्थानीय सहायता की जानकारी देंगे। यदि दिए गए संपर्कों से सहायता न मिले, तो कृपया हमें दोबारा कॉल करें और ध्यान रखें कि वे PETA इंडिया से अलग संस्थाएँ हैं।

Q: क्या PETA इंडिया हर उस समूह की सेवा गुणवत्ता की गारंटी दे सकता है जिसकी वह सिफारिश करता है?
A: PETA इंडिया को सभी समूहों के साथ काम करने का अवसर नहीं मिला है, इसलिए हम हमेशा सेवा की गुणवत्ता की गारंटी नहीं दे सकते। यदि दिए गए संपर्क सहायता न करें, तो कृपया हमें पुनः कॉल करें।

Q: यदि PETA इंडिया द्वारा वापस छोड़ा गया सामुदायिक पशु बाद में नहीं मिलता तो क्या?
A: दुर्भाग्यवश, सामुदायिक पशु अक्सर सड़क दुर्घटनाओं और अन्य हादसों का शिकार हो जाते हैं। वापस छोड़े जाने के बाद PETA इंडिया उनकी निगरानी करने में सक्षम नहीं होता।

Q: आप जिस पशु को लेकर गए हैं, उसे वापस क्यों नहीं छोड़ रहे?
A: PETA इंडिया उन पशुओं को दोबारा सड़क पर नहीं छोड़ता जो अपने बल पर जीवित रहने में संघर्ष करेंगे। यदि चोट या बीमारी गंभीर है लेकिन पशु के जीवित रहने की संभावना है, तो PETA इंडिया उसके गोद लिए जाने की व्यवस्था कर सकता है, या पशु अस्पताल में भर्ती रह सकता है, अथवा उसे किसी आश्रय स्थल में रखा जा सकता है। इसी प्रकार, PETA इंडिया छोटे पिल्लों और बिल्ली के बच्चों को भी वापस सड़क पर नहीं छोड़ता।

Q: मैं सामुदायिक पशुओं की सहायता के लिए और क्या कर सकता/सकती हूँ?
A: आप सामुदायिक पशुओं की कई तरीकों से सहायता कर सकते हैं, जैसे उनके खिलाफ होने वाले अपराधों की रिपोर्ट करना, स्वच्छ पानी के बर्तन रखना, पशु खरीदने के बजाय आश्रय स्थल या सड़क से गोद लेना, नसबंदी अभियानों का समर्थन करना, भोजन उपलब्ध कराने के प्रयासों में शामिल होना, तथा पशु संरक्षण NGOs के लिए स्वयंसेवा और दान करना।