PETA इंडिया और SAFI के हस्तक्षेप के बाद वारंगल पुलिस ने 100 से अधिक सामुदायिक कुत्तों को क्रूरतापूर्वक पकड़ने और अवैध रूप से हटाने के मामले में FIR दर्ज की

Posted on by Surjeet Singh

एक स्थानीय निवासी की शिकायत और वीडियो साक्ष्यों से यह सामने आने के बाद कि धर्मसागर ग्राम पंचायत के सरपंच द्वारा नियुक्त लोगों के एक समूह ने 100 से अधिक सामुदायिक कुत्तों को तार के फंदों से क्रूरतापूर्वक पकड़कर जबरन वैन में ठूंस दिया और उन्हें अवैध रूप से दूसरी जगह ले जाया गया, PETA इंडिया और स्ट्रे एनिमल फाउंडेशन ऑफ इंडिया (SAFI) ने इस मामले में प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

SAFI के क्रुएल्टी प्रिवेंशन मैनेजर श्री अदुलापुरम गौतम द्वारा दायर शिकायत के आधार पर, PETA इंडिया ने धर्मसागर पुलिस थाने, विशेष रूप से स्टेशन हाउस ऑफिसर श्री लिंगाला दिलीप के साथ समन्वय कर इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 62 सहपठित धारा 325 तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11(1)(a) के तहत चार आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज करवाई। पुलिस ने लापता कुत्तों का पता लगाने और यह जांचने के लिए जांच शुरू कर दी है कि उन्हें मार दिया गया, अवैध रूप से दूसरी जगह छोड़ा गया या इस घटना के कारण उनकी मृत्यु हुई।

पशु जन्म नियंत्रण (ABC) नियम, 2023 के नियम 11(19) के अनुसार, सामुदायिक कुत्तों को केवल नसबंदी के उद्देश्य से ही पकड़ा जा सकता है और उन्हें दूसरी जगह ले जाना अवैध है। नियम स्पष्ट रूप से कहता है कि नसबंदी के बाद कुत्तों को उसी स्थान या इलाके में छोड़ा जाएगा, जहां से उन्हें पकड़ा गया था। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने 19 मई 2026 के अपने हालिया फैसले में भी ABC नियमों को बरकरार रखते हुए दोहराया कि 2023 के ABC नियमों में निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद कुत्तों को उनके मूल क्षेत्र में ही छोड़ा जाना चाहिए।

सामुदायिक कुत्ते अक्सर क्रूरता का शिकार होते हैं या वाहनों की चपेट में आ जाते हैं। वे भूख, बीमारी और चोटों से भी पीड़ित रहते हैं। हर साल बड़ी संख्या में ऐसे कुत्ते पशु आश्रयों में पहुंच जाते हैं, जहां पर्याप्त अच्छे घर न मिलने के कारण वे लंबे समय तक पिंजरों या केनेल में रहने को मजबूर होते हैं। इस समस्या का मानवीय और प्रभावी समाधान नसबंदी है। एक मादा कुत्ते की नसबंदी छह वर्षों में लगभग 67,000 पिल्लों के जन्म को रोक सकती है, जबकि एक मादा बिल्ली की नसबंदी सात वर्षों में लगभग 4,20,000 बच्चों के जन्म को रोक सकती है।

सामुदायिक पशुओं को दूसरी जगह ले जाना क्रूर, अवैध और अप्रभावी है। जिन कुत्तों को हटाया जाता है, उनकी जगह उचित पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम न होने पर जल्द ही दूसरे कुत्ते आ जाते हैं। PETA इंडिया सभी स्थानीय निकायों से कानून के अनुसार मानवीय पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम को शीघ्र लागू करने का आग्रह करता है।

अपने घरेलू और सामुदायिक पशुओं की नसबंदी कराने का संकल्प लें

पशुओं के साथ क्रूरता देखें तो हमेशा इसकी शिकायत करें