PETA इंडिया ने संस्थापक की दिवंगत माँ की याद में 3,000 ज़रूरतमंद बच्चों और अन्य लोगों में पौष्टिक वीगन भोजन वितरित किया

Posted on by Surjeet Singh

श्रीमती मैरी पेट्रीशिया वार्ड ने 1950 और 1960 के दशक में कई वर्षों तक दिल्ली में जीवन बिताया और बच्चों तथा उनकी माताओं के विकास हेतु काम करने वाली संस्थाओं को अपना समय और सहयोग दिया। वह अनाथ बच्चों के लिए कपड़े सिलने और खिलौनों में रूई भरने जैसे काम भी करती थीं। आज यदि वह जीवित होती तो वह 104 वर्ष की होती। उनके परोपकारी कार्यों की याद में PETA इंडिया ने, लिटिल इंडिया फाउंडेशन संस्था की मदद से दिल्ली के सामुदायिक शिक्षण केंद्रों और वसंत कुंज स्थित जय हिंद कैंप में 3,000 बच्चों और ज़रूरतमंद लोगों में प्रोटीन से भरपूर राजमा-चावल का वितरित किया।

श्रीमती वार्ड को दिल्ली का यह लोकप्रिय व्यंजन बेहद पसंद था, एक साधारण भारतीय भोजन, जो पौष्टिक, स्वादिष्ट और (घी के बिना तैयार किए जाने पर) पूरी तरह वीगन है। दिल्ली में बच्चों और पशुओं के प्रति उनका गहरा प्रेम सर्वविदित था। वह सड़कों पर पीड़ा का शिकार हुए कुत्तों को बचाकर अपने घर लाती थीं और उन दिनों कनॉट प्लेस पर भीख माँगते हुए दिखाई देने वाले कुष्ठ रोग से प्रभावित लोगों के लिए पट्टियाँ तैयार करने और दवाइयाँ पैक करने में मदद करती थीं। वह पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया (PETA इंडिया) और दुनियाभर में PETA संस्थाओं की संस्थापक इंग्रिड न्यूकिर्क की दिवंगत माँ थीं। अपनी माँ की इस सीख से प्रेरित होकर कि, “इससे फर्क नहीं पड़ता कि कौन पीड़ित है, मायने यह रखता है कि आप उनकी मदद के लिए क्या कर सकते हैं,” इंग्रिड ने अपना जीवन पशुओं की मदद के लिए समर्पित किया।

श्रीमती वार्ड आठ वर्षों तक नई दिल्ली के डिप्लोमैटिक एन्क्लेव में रहीं, जहाँ उनके पति भारत सरकार के सलाहकार के रूप में कार्यरत थे। उस दौरान मैरी ने अपने घर के दरवाज़े पर आने वाले हर पशु के लिए, चाहे वह किसी भी प्रजाति का हो, अपने घर को एक सुरक्षित आश्रय बना दिया था। वह अविवाहित माताओं की सहायता के लिए कढ़ाई का सामान बेचती थीं, मदर टेरेसा के अनाथालय में सेवा करती थीं और कुष्ठ रोग के कारण उँगलियाँ और नाक का सिरा खो चुके लोगों की मदद करती थीं। उनके पति भी उनके परोपकारी प्रयासों में सहयोग करते थे और वर्तमान बांग्लादेश में मानवीय संकट के दौरान वहाँ काम करते हुए उन्होंने विभिन्न धर्मार्थ संस्थाओं को दान भी दिया। मैरी का 2013 में अमेरिका के ओरेगन राज्य के स्प्रिंगफील्ड में निधन हुआ। हालांकि, भारत, बच्चों और पशुओं के प्रति उनका प्रेम आज भी उनकी बेटी के जीवन-कार्य के माध्यम से जीवित है। PETA इंडिया और दुनियाभर में PETA की संस्थाओं की संस्थापक के रूप में इंग्रिड ने अपनी माँ की याद में भारत को कुछ वापस देने की उनकी इच्छा को आगे बढ़ाया है।

“मेरी माँ ने मुझे सिखाया कि करुणा हर किसी तक पहुँचनी चाहिए, चाहे वह कोई बच्चा हो, कठिन परिस्थितियों से जूझ रहा व्यक्ति हो या मदद की ज़रूरत और उम्मीद लगाने वाला कोई पशु। दिल्ली के परिवारों को पौष्टिक वीगन भोजन परोसकर PETA इंडिया उनकी विरासत का उसी तरह सम्मान कर रहा है, जैसा वह चाहतीं थी यानि दयालुता, पोषण और सभी जीवित प्राणियों के प्रति सम्मान के साथ।” – PETA इंडिया की संस्थापक इंग्रिड न्यूकिर्क

गायें अपने प्रियजनों के साथ गहरे रिश्ते बनाती हैं और उनकी मृत्यु पर शोक मनाती हैं। सूअर भी कुत्तों की तरह अपने नाम पहचानते हैं, जबकि मछलियाँ एक-दूसरे के साथ संवाद करते हुए विशेष ध्वनियाँ निकालती हैं और उनकी अपनी विशिष्ट संस्कृतियाँ भी होती हैं। इसके बावजूद, मांस, अंडे, डेयरी और मछली उद्योगों के लिए पाले जाने वाले पशुओं को भारी पीड़ा सहनी पड़ती है, जिसमें अपने परिवारों से अलग होना और हिंसक मौत का सामना करना भी शामिल है। भारत इसे बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। स्टेटिस्टा कंज़्यूमर इनसाइट्स के एक सर्वेक्षण के अनुसार, भारत दुनिया में मांस-मुक्त आहार अपनाने के मामले में सबसे आगे है और अब 9% भारतीय स्वयं को वीगन यानी पूरी तरह पौधों पर आधारित आहार अपनाने वाला बताते हैं। जैसे-जैसे अधिक भारतीय वीगन भोजन को अपना रहे हैं, PETA इंडिया ऐसे भविष्य की कल्पना करता है जिसमें पशु स्वतंत्र रूप से अपना जीवन जी सकें और अपने बच्चों का पालन-पोषण कर सकें, जबकि सभी लोग स्वादिष्ट वीगन खाद्य पदार्थों की विविधता का आनंद लें, ऐसे भोजन जो भारत के सदियों पुराने अहिंसा के मूल्यों को दर्शाते हैं।

वीगन भोजन चुनना हमारे स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए भी बेहतर है। पशु-आधारित खाद्य पदार्थों की तुलना में वीगन आहार का कार्बन फुटप्रिंट काफी कम होता है और यह हृदय रोग तथा कुछ प्रकार के कैंसर के जोखिम को भी कम कर सकता है। यानी यह पशुओं, पर्यावरण और हमारे अपने स्वास्थ्य, तीनों के लिए बेहतर विकल्प है।

आज एक वीगन भोजन ज़रूर आज़माएँ