PETA इंडिया और केरल पुलिस अकादमी ने पशुओं के साथ क्रूरता से निपटने के लिए कार्यशाला आयोजित की

Posted on by Surjeet Singh

केरल पुलिस अकादमी (KEPA), त्रिशूर में प्रशिक्षण ले रहे कैडेट सब-इंस्पेक्टरों समेत करीब 100 पुलिस अधिकारियों ने पशुओं के साथ होने वाली क्रूरता से निपटने पर PETA इंडिया द्वारा आयोजित एक कार्यशाला में हिस्सा लिया। यह कार्यशाला 9 सितंबर को त्रिशूर स्थित केरल पुलिस अकादमी (KEPA) के प्रशासनिक ब्लॉक के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित की गई।

यह महत्वपूर्ण पहल केरल के क्राइम ब्रांच के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) और पूर्व में कानून एवं व्यवस्था के ADGP रहे श्री एच. वेंकटेश, IPS, तथा KEPA के पुलिस महानिरीक्षक (IGP) और निदेशक श्री के. सेतु रमन, IPS, के मार्गदर्शन में संभव हुई। केरल के विभिन्न हिस्सों से आए 70 से अधिक कैडेट सब-इंस्पेक्टरों ने इस चार घंटे की कार्यशाला में हिस्सा लिया। ये अधिकारी KEPA में एक वर्ष का प्रशिक्षण ले रहे हैं। कार्यशाला में पशु क्रूरता निवारण (PCA) अधिनियम, 1960; वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (2022 में संशोधित); भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023; और अन्य संबंधित कानूनों के प्रावधानों पर जानकारी दी गई। KEPA में तैनात सहायक सब-इंस्पेक्टरों, सब-इंस्पेक्टरों, इंस्पेक्टरों और एक डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस ने भी कार्यशाला में हिस्सा लिया।

हाल ही में, पहली बार राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने देश में पशुओं के साथ क्रूरता के मामलों का रिकॉर्ड रखना शुरू किया और आंकड़े जारी किए। इसके अनुसार, 2024 में पशु क्रूरता के 9,039 मामले दर्ज किए गए और 10,312 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

2021 में, फेडरेशन ऑफ इंडियन एनिमल प्रोटेक्शन ऑर्गनाइजेशन्स ने एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें बताया गया था कि उससे पहले के एक दशक में करीब 5 लाख पशु अपराधों के शिकार हुए थे।

कई हिंसक अपराधियों का पशुओं के साथ क्रूरता करने का पुराना रिकॉर्ड रहा है। Forensic Research and Criminology International Journal में प्रकाशित एक अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि, “पशुओं के साथ क्रूरता करने वाले लोगों के अन्य अपराध करने की संभावना तीन गुना अधिक होती है। इनमें हत्या, बलात्कार, डकैती, हमला, उत्पीड़न, धमकी और नशीली दवाओं का सेवन जैसे अपराध शामिल हैं।”

यह पहल पूरे भारत में कानून लागू करने वाले अधिकारियों को पशु क्रूरता के मामलों के प्रति संवेदनशील बनाने और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं को सशक्त करने के PETA इंडिया के लगातार जारी प्रयासों का हिस्सा है, ताकि पशुओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को उनकी गंभीरता के अनुरूप महत्व दिया जा सके।

इससे पहले भी PETA इंडिया ने ग्वालियर में सीमा सुरक्षा बल (BSF), छत्तीसगढ़ पुलिस, गोवा पुलिस और गोवा पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवाओं, सिक्किम पुलिस, पुणे सिटी पुलिस, नागपुर सिटी पुलिस और People for Animals, मीरा-भायंदर और वसई-विरार पुलिस, बेलगावी जिला पुलिस, हुबली-धारवाड़ जिला पुलिस, बेंगलुरु सिटी पुलिस, जम्मू, कठुआ और सांबा जिला पुलिस तथा बेंगलुरु और चिक्कमगलुरु पुलिस प्रशिक्षण स्कूलों के साथ इसी तरह की जागरूकता कार्यशालाएँ आयोजित की हैं।

PETA इंडिया लंबे समय से पशु क्रूरता निवारण (PCA) अधिनियम, 1960 को मजबूत करने की मांग करता रहा है। इस कानून में सजा के प्रावधान काफी पुराने और अपर्याप्त हैं। उदाहरण के लिए, पहली बार दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति पर अधिकतम केवल 50 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। हालांकि, BNS, 2023 और WPA, 1972 में अधिक कड़ी सजा का प्रावधान है। PCA अधिनियम में संशोधन को लेकर केंद्र सरकार को भेजे गए प्रस्ताव में PETA इंडिया ने पशुओं के साथ क्रूरता के लिए सजा और जुर्माने को काफी बढ़ाने की सिफारिश की है।

पशुओं के साथ क्रूरता के लिए कड़ी सजा की मांग करें

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