PETA इंडिया ने हावड़ा से छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (मुंबई) जा रही ट्रेन से 300 से अधिक पक्षियों को बचाया
पक्षियों के कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण सफलता के रूप में, CSMT स्थित न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) की 35वीं अदालत ने 282 पक्षियों की अंतरिम कस्टडी Kalote Animal Trust को देने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) रेलवे पुलिस स्टेशन में PETA India की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज होने के बाद किए गए प्रयासों का परिणाम है।
यह आदेश उस बचाव अभियान के बाद आया, जिसमें सैकड़ों बजरीगर, फिंच और कॉकटेल पक्षियों को गीतांजलि एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 12860) में बेहद ठसाठस भरे पिंजरों में हावड़ा से मुंबई लाया जा रहा था। PETA इंडिया से मिली सूचना और उसकी शिकायत के आधार पर मुंबई की Government Railway Police (GRP) और Railway Protection Force (RPF) के अधिकारियों ने ट्रेन के आधी रात के कुछ समय बाद 8 सितंबर को CSMT पहुँचने पर इस खेप को रोका।
जाँच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि ट्रेन के पार्सल डिब्बे में सात पिंजरों में लगभग 2,100 पक्षियों को ठूंसकर रखा गया था। पक्षियों के हिलने-डुलने के लिए भी बहुत कम जगह थी। उन्होंने 32 घंटे से अधिक की यात्रा बिना पर्याप्त वेंटिलेशन, देखभाल या निगरानी के की थी। पक्षियों के साथ हुई इस कथित क्रूरता और PETA इंडिया के कड़े विरोध के बावजूद, पक्षियों को शुरुआत में उन लोगों को सौंप दिया गया, जिन्होंने उन्हें प्राप्त करने का दावा किया था और जो कथित तौर पर कुर्ला में एक पालतू जानवरों की दुकान चलाते हैं।
मामले को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के समक्ष उठाए जाने के बाद CSMT रेलवे पुलिस स्टेशन ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 62 और 325 तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धाराओं 11(1)(a), 11(1)(e), 11(1)(f) और 11(1)(k) के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की। इसके बाद पुलिस ने पालतू जानवरों की दुकान पर छापा मारा और 337 पक्षियों को जब्त करने में सफल रही। सरकारी पशु चिकित्सक ने इन पक्षियों की जाँच की। हालांकि, बाद में 55 पक्षियों की लंबी दूरी तक परिवहन के दौरान हुए आघात के कारण हॉस्पिस देखभाल के दौरान मौत हो गई। मृत पक्षियों का पोस्टमार्टम भी किया गया।
इसके बाद PETA इंडिया ने CSMT की 35वीं JMFC अदालत में आवेदन दायर कर पक्षियों की अंतरिम कस्टडी महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में स्थित पशु अभयारण्य Kalote Animal Trust को सौंपने का अनुरोध किया। पशु क्रूरता निवारण (केस प्रॉपर्टी पशुओं की देखभाल और रखरखाव) नियम, 2017 के प्रावधानों को लागू करते हुए, माननीय मजिस्ट्रेट ने आरोपी मालिकों द्वारा पक्षियों को वापस लेने के लिए दायर किए गए आवेदन खारिज कर दिए। साथ ही, PETA इंडिया की सिफारिश पर जीवित बचे सभी पक्षियों की अंतरिम कस्टडी Kalote Animal Trust को सौंपने का आदेश दिया।
PETA इंडिया अब भी पुलिस के साथ मिलकर उन लापता पक्षियों का पता लगाने और उन्हें सुरक्षित करने के प्रयास कर रहा है, जिन्हें छापे के दौरान बरामद नहीं किया जा सका। इस संबंध में GRP मुंबई के सेंट्रल ज़ोन के Deputy Commissioner of Police को एक पत्र भी सौंपा गया है, जिसमें बाकी पक्षियों का जल्द से जल्द पता लगाने और उन्हें जब्त करने का अनुरोध किया गया है।
PETA इंडिया ने माननीय मजिस्ट्रेट श्री मनोज कुमार बुधवंत, JMFC 35वीं अदालत का आभार व्यक्त किया है कि उन्होंने पक्षियों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए उन्हें एक अभयारण्य में अंतरिम पुनर्वास देने का निर्देश दिया। PETA इंडिया ने गवर्नमेंट रेलवे पुलिस मुंबई विशेष रूप से Deputy Commissioner of Police श्रीमती Pradnya Jedge, CSMT रेलवे स्टेशन पुलिस स्टेशन के अधिकारियों और रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स के अधिकारियों के प्रति भी आभार व्यक्त किया है। उनके त्वरित हस्तक्षेप और सहयोग से सैकड़ों पक्षियों को आगे होने वाली पीड़ा से बचाने में मदद मिली।
पक्षियों के व्यापार में अनगिनत पक्षियों को उनके परिवारों से अलग कर दिया जाता है और उन्हें उन सभी चीज़ों से वंचित कर दिया जाता है जो उनके लिए स्वाभाविक और महत्वपूर्ण हैं, ताकि उन्हें “पालतू” के रूप में बेचा जा सके। अक्सर छोटे पक्षियों को उनके घोंसलों से छीन लिया जाता है, जबकि अन्य पक्षी जाल या फंदों में फँसकर घबरा जाते हैं और उनसे बाहर निकलने की कोशिश में गंभीर रूप से घायल हो सकते हैं या उनकी मौत भी हो सकती है। पकड़े गए पक्षियों को छोटे-छोटे डिब्बों में ठूंस दिया जाता है और अनुमान है कि परिवहन के दौरान लगभग 60 प्रतिशत पक्षियों की टूटे हुए पंखों और पैरों, प्यास या अत्यधिक घबराहट के कारण मौत हो जाती है। जो पक्षी बच जाते हैं, उन्हें कैद में एक बेहद कठिन जीवन का सामना करना पड़ता है और वे कुपोषण, अकेलेपन, अवसाद और तनाव से पीड़ित होते हैं। पक्षी बेहद बुद्धिमान और सामाजिक जीव हैं, जिन्हें खुले आसमान में रहना चाहिए, न कि छोटे पिंजरों में कैद करके सामान की तरह एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जाए और सजावट के लिए बेचा जाए।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत स्वदेशी पक्षियों को पकड़ना, पिंजरे में रखना और उनका व्यापार करना प्रतिबंधित है। इसका पालन न करने पर जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। इसके अलावा, पक्षियों को पिंजरे में कैद करना पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 का उल्लंघन है। इस कानून के अनुसार किसी भी पशु को ऐसे पिंजरे या अन्य पात्र में रखना या बंद करना अवैध है, जिसमें उसे पर्याप्त रूप से घूमने-फिरने का अवसर न मिले और उड़ने वाले पक्षी के लिए इसमें उड़ने की पर्याप्त जगह भी शामिल है।
पक्षियों को पिंजरे में कैद करने पर रोक लगाने में मदद करें





