पारंपरिक क्षेत्रीय परिधानों में दर्जनों ‘पशुओं’ ने दिल्ली में सख्त पशु संरक्षण कानूनों की मांग की।
PETA इंडिया के दर्जनों समर्थक गाय, मुर्गी, मगरमच्छ, कुत्ते, बिल्ली, बंदर और घोड़े समेत अन्य पशुओं के ज्यामितीय आकार वाले मुखौटे पहनकर तथा उत्तर प्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, असम, मेघालय और गुजरात समेत भारत के विभिन्न राज्यों की पारंपरिक पोशाकों में दिल्ली के रामलीला ग्राउन्ड में एकत्र हुए।उन्होंने एक विशाल बैनर के सामने खड़े होकर, जिस पर लिखा था, “पशु भी भारतीय हैं, हमें भारतीय कानून के तहत बेहतर संरक्षण चाहिए”, सांसदों से छह दशक पुराने ‘पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960’ और इसमें दिए गए नाममात्र के जुर्मानों के प्रावधान को बदलकर पशुओं को वास्तविक सुरक्षा देने की मांग की, PETA इंडिया पशुओं पर अत्याचार करने वालों के लिए कठोर दंड जैसे जेल की सजा, उचित जुर्माना, अनिवार्य परामर्श और भविष्य में पशुओं के साथ संपर्क पर प्रतिबंध लगाने की मांग करता है।
हाल ही में, पहली बार, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने देश में पशु पर क्रूरता के मामलों का रिकॉर्ड और आंकड़े जुटाए। इसके अनुसार, 2024 में ऐसे 9,039 मामले दर्ज किए गए और 10,312 लोगों को गिरफ्तार किया गया। महाराष्ट्र में ऐसे मामलों की संख्या सबसे अधिक 2,927 रही, जिसके बाद तेलंगाना में 1,890, केरल में 1,510, उत्तर प्रदेश में 1,121, कर्नाटक में 320, तमिलनाडु में 259 और गुजरात में 181 मामले दर्ज किए गए।
पशु क्रूरता निवारण अधिनियम वर्ष 1960 में पारित किया गया था। अब 65 वर्ष से अधिक पुराना यह कानून पूरी तरह पुराना पड़ चुका है। इसमें पहली बार पशुओं पर अपराध करने का दोषी पाए जाने पर महज 10 रुपये और अधिकतम केवल 50 रुपये जुर्माने का प्रावधान है। (हालांकि, भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972, में पशुओं पर क्रूरता के लिए अधिक सख्त सजा का प्रावधान है)
शोध से पता चलता है कि पशुओं पर क्रूरता करने वाले लोग अक्सर बार-बार अपराध करते हैं और बाद में अन्य पशुओं, यहां तक कि इंसानों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। Forensic Research & Criminology International Journal में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है, “जो लोग पशुओं के प्रति क्रूरता करते हैं, उनके अन्य अपराध करने की संभावना तीन गुना अधिक होती है। इनमें हत्या, बलात्कार, लूटपाट, हमला, उत्पीड़न, धमकी और नशीली दवाओं या मादक पदार्थों का दुरुपयोग जैसे अपराध शामिल हैं।”
पशुओं पर अत्याचार और क्रूरता करने वालों के लिए कड़ी सज़ा की मांग करें


