PETA इंडिया की शिकायत के बाद संगारेड्डी में तस्करी करके ले जाए जा रहे दो मॉनिटर छिपकलियों को बचाया गया। इस मामले में पुलिस ने POR (प्राथमिक अपराध रिपोर्ट) दर्ज की है।

Posted on by Surjeet Singh

संगारेड्डी जिले के सदाशिवपेट में हाईवे के किनारे कथित तौर पर मांस के लिए बेची जा रही एक घायल मॉनिटर छिपकली के बारे में एक यात्री से सूचना मिलने के बाद, PETA इंडिया ने तेलंगाना वन विभाग के संगारेड्डी वन प्रभाग के साथ मिलकर दो मॉनिटर छिपकलियों को बचाने के लिए कार्रवाई की। इस अभियान में विशेष रूप से भारतीय वन सेवा (IFS) के अधिकारी श्री एम. नवीन रेड्डी, उप वन संरक्षक (Deputy Conservator of Forests) ने सहयोग किया। कई दिनों तक लगातार निगरानी रखने और आरोपियों का पता लगाने के प्रयासों के बाद, वन अधिकारियों ने दो लोगों को दो मॉनिटर छिपकलियों के साथ पकड़ा। अधिकारियों ने मांस के लिए अवैध रूप से तस्करी की जा रही दोनों छिपकलियों को अपने कब्जे में लेकर बचा लिया।

दोनों मॉनिटर छिपकलियों को जब्त किए जाने के बाद, संगारेड्डी वन प्रभाग ने वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम (Wild Life (Protection) Act), 1972 की धारा 9, 11, 12, 38J, 39, 40, 40A, 41, 42, 42A, 43, 48, 48A, 50, 51A और 57 के तहत प्रारंभिक अपराध रिपोर्ट (Preliminary Offence Report – POR संख्या 1694/68) दर्ज की।

वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम की अनुसूची-I के अंतर्गत संरक्षित प्रजातियों से जुड़े अपराधों के लिए कम से कम तीन वर्ष और अधिकतम सात वर्ष तक की जेल की सजा तथा कम से कम ₹25,000 का जुर्माना हो सकता है। यह अपराध संज्ञेय (Cognisable) और गैर-जमानती (Non-Bailable) है।

कानूनी संरक्षण प्राप्त होने के बावजूद, मॉनिटर छिपकलियों को गंभीर क्रूरता का सामना करना पड़ता है। उनके मांस और शरीर के अंगों के लिए उनका शिकार किया जाता है। इसके पीछे उनके औषधीय गुणों को लेकर फैली गलत धारणाएँ भी एक कारण हैं।

यदि किसी को मॉनिटर छिपकली दिखाई दे, तो उसे न तो नुकसान पहुँचाएँ और न ही पकड़ने या छूने की कोशिश करें। आवश्यकता पड़ने पर सहायता के लिए वन विभाग से संपर्क करें।