तुमकुरु पुलिस ने PETA इंडिया के सहयोग से पशु क्रूरता रोकने पर कार्यशाला आयोजित की

Posted on by Surjeet Singh

तुमकुरु जिला पुलिस के करीब 200 पुलिसकर्मियों ने पशु क्रूरता रोकने और पशु संरक्षण कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने के विषय पर PETA इंडिया द्वारा आयोजित जागरूकता कार्यशाला में हिस्सा लिया। इसमें स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO), पुलिस इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर (PI/PSI), असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) और हेड कांस्टेबल (HC) सहित अन्य पुलिसकर्मी शामिल हुए। यह कार्यशाला 30 सितंबर को तुमकुरु के पुलिस अधीक्षक कार्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित की गई।

यह कार्यशाला पुलिसकर्मियों को पशु संरक्षण कानूनों के प्रति जागरूक करने की एक पहल का हिस्सा थी। इस पहल का नेतृत्व केंद्रीय रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG) श्री गिरिश सन्नेर, IPS कर रहे हैं। उन्होंने केंद्रीय रेंज के सभी छह जिलों—बेंगलुरु ग्रामीण, KGF, कोलार, तुमकुरु, चिक्कबल्लापुर और बेंगलुरु दक्षिण—की पुलिस के लिए पशु संरक्षण कानूनों पर जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित करने का निर्देश दिया है।

यह कार्यशाला पुलिसकर्मियों को पशु संरक्षण कानूनों के प्रति जागरूक करने की एक पहल का हिस्सा थी। इस पहल का नेतृत्व केंद्रीय रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG) श्री गिरिश सन्नेर, IPS कर रहे हैं। उन्होंने केंद्रीय रेंज के सभी छह जिलों बेंगलुरु ग्रामीण, KGF, कोलार, तुमकुरु, चिक्कबल्लापुर और बेंगलुरु दक्षिण की पुलिस के लिए पशु संरक्षण कानूनों पर जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित करने का निर्देश दिया है। उनके नेतृत्व और तुमकुरु के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (कानून-व्यवस्था) श्री सी. गोपाल के सहयोग से तुमकुरु जिला पुलिस की यह कार्यशाला आयोजित की गई। यह इस श्रृंखला की दूसरी कार्यशाला थी। इससे पहले बेंगलुरु ग्रामीण जिला पुलिस के लिए कार्यशाला आयोजित की गई थी। बाकी जिलों में भी ऐसी कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।

कार्यशाला में पशु क्रूरता को रोकने और ऐसे मामलों में कार्रवाई करने के व्यावहारिक तरीकों पर ध्यान दिया गया। इसमें पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960; वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (जिसमें 2022 में संशोधन किया गया); भारतीय न्याय संहिता, 2023 और अन्य संबंधित कानूनों के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी दी गई। इस सत्र में यह भी बताया गया कि पशु क्रूरता और वन्यजीव अपराधों के मामलों में पुलिस की क्या भूमिका होती है। इसमें FIR दर्ज करना, जांच करना, पशु चिकित्सकों और अन्य सरकारी अधिकारियों के साथ समन्वय करना तथा उचित कानूनी कार्रवाई करना शामिल है।

पशु क्रूरता और समाज में हिंसा को रोकने तथा ऐसे मामलों में कार्रवाई सुनिश्चित करने में पुलिस की अहम भूमिका होती है। PETA इंडिया को खुशी है कि वह पशु संरक्षण कानूनों और प्रक्रियाओं को लागू करने में तुमकुरु पुलिस का सहयोग कर रहा है, ताकि पशुओं की जान बचाई जा सके और उन्हें तथा समाज को नुकसान से बचाया जा सके। पशुओं और मानव समुदायों की ओर से PETA इंडिया केंद्रीय रेंज के DIG श्री गिरिश सन्नेर, IPS का आभार व्यक्त करता है। उन्होंने केंद्रीय रेंज के पुलिसकर्मियों को पशु संरक्षण कानूनों के प्रति जागरूक करने के लिए कार्यशालाएं आयोजित करने का निर्देश दिया है।

हाल ही में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने पहली बार देश में पशुओं के प्रति क्रूरता के मामलों का रिकॉर्ड तैयार किया। इसके अनुसार, वर्ष 2024 में ऐसे 9,039 मामले दर्ज किए गए और 10,312 लोगों को गिरफ्तार किया गया। 2021 में फेडरेशन ऑफ इंडियन एनिमल प्रोटेक्शन ऑर्गनाइजेशन्स ने एक रिपोर्ट जारी की थी। इसमें बताया गया कि उससे पहले के दस वर्षों में करीब 5 लाख पशु अपराधों के शिकार हुए थे।

PETA इंडिया का कहना है कि कई हिंसक अपराधियों का पशुओं के प्रति क्रूरता करने का पुराना रिकॉर्ड रहा है। Forensic Research and Criminology International Journal में प्रकाशित एक अध्ययन में चेतावनी दी गई है, “पशुओं के प्रति क्रूरता करने वाले लोगों में हत्या, बलात्कार, लूटपाट, हमला, उत्पीड़न, धमकी देने और नशीले पदार्थों के दुरुपयोग सहित अन्य अपराध करने की संभावना तीन गुना अधिक होती है।”

यह पहल पूरे भारत में कानून लागू करने वाले अधिकारियों को पशु संरक्षण के प्रति जागरूक करने और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं को सक्षम बनाने के PETA इंडिया के लगातार जारी प्रयासों का हिस्सा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पशुओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को गंभीरता से लिया जाए और उन पर उचित कार्रवाई हो। इससे पहले भी PETA इंडिया ने कई पुलिस और प्रशिक्षण संस्थानों के साथ ऐसी जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित की हैं। इनमें ग्वालियर में सीमा सुरक्षा बल (BSF), छत्तीसगढ़ पुलिस, गोवा पुलिस और गोवा पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग, सिक्किम पुलिस, पुणे सिटी पुलिस, नागपुर सिटी पुलिस, मीरा-भायंदर और वसई-विरार पुलिस, बेलगावी जिला पुलिस, हुबली-धारवाड़ जिला पुलिस, बेंगलुरु सिटी पुलिस, जम्मू, कठुआ और सांबा जिला पुलिस, बेंगलुरु और चिक्कमगलुरु पुलिस प्रशिक्षण स्कूल, दिल्ली पुलिस का केंद्रीय जिला, केरल पुलिस अकादमी (KEPA), त्रिशूर और बेंगलुरु जिला पुलिस शामिल हैं।

PETA इंडिया लंबे समय से पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 को मजबूत बनाने की मांग करता रहा है। इस कानून में सज़ा के प्रावधान पुराने और अपर्याप्त हैं। उदाहरण के लिए, पहली बार दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति पर अधिकतम केवल 50 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। हालांकि, भारतीय न्याय संहिता, 2023 और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 में अधिक कड़ी सज़ा के प्रावधान हैं। इस अधिनियम में संशोधन के संबंध में केंद्र सरकार को भेजे गए प्रस्ताव में PETA इंडिया ने पशु क्रूरता के मामलों में सज़ा को काफी बढ़ाने की सिफारिश की है।

पशु क्रूरता के मामलों में सख्त सज़ा की मांग करें