रवीना टंडन ने मुंबई के पोदार इंटरनेशनल स्कूल में ‘अनलॉक द एनिमल वर्ल्ड’ पुस्तक का वाचन कर बच्चों को पशुओं के प्रति दयालु बनने के लिए प्रेरित किया
आज विश्व महासागर दिवस (8 जून) के अवसर पर पद्मश्री एवं राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेत्री तथा पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया (PETA इंडिया) की मानद निदेशक रवीना टंडन ने पोदार इंटरनेशनल स्कूल में बच्चों के लिए एक रोचक पुस्तक वाचन सत्र आयोजित किया, ताकि उन्हें पशुओं के प्रति दयालु बनने के लिए प्रेरित किया जा सके। रवीना ने हाल ही में प्रकाशित पुस्तक ‘अनलॉक द एनिमल वर्ल्ड: इनक्रेडिबल फैक्ट्स फॉर यंग सुपरहीरोज’ से अंश पढ़कर सुनाए। इस पुस्तक की लेखिका इंग्रिड न्यूकिर्क हैं, जो PETA इंडिया तथा विश्वभर में PETA संगठनों की संस्थापक हैं।
‘अनलॉक द एनिमल वर्ल्ड: इनक्रेडिबल फैक्ट्स फॉर यंग सुपरहीरोज’ में पशुओं के बारे में अनेक रोचक तथ्य शामिल हैं जैसे समुद्री कछुए, जो विशाल महासागरों में मार्ग खोजने के लिए पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग करते हैं; पक्षी, जिनकी श्वसन प्रणाली इतनी पतली हवा में भी काम करती है कि वे हिमालय के ऊपर तक उड़ सकते हैं; सूअर, जिन्हें वीडियो गेम खेलना पसंद होता है; और घोड़े, जो मौसम के अनुसार अपने ऊपर कोट पहनाने या उतारने के लिए बटन दबाना सीख सकते हैं। इसके साथ ही पुस्तक में ऐसे महत्वपूर्ण और व्यावहारिक कदम भी बताए गए हैं, जो युवाओं को पशुओं की रक्षा के लिए सशक्त बनाते हैं।
“अनलॉक द एनिमल वर्ल्ड’ इस बात की सशक्त याद दिलाती है कि पशु कितने बुद्धिमान और अद्भुत होते हैं तथा उनका साथ देने और उनकी रक्षा करना हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है। मैं बच्चों और युवाओं को प्रोत्साहित करती हूँ कि वे इस पुस्तक के माध्यम से पशुओं के हीरो बनने के सभी रोमांचक तरीकों को जानें।” – रवीना टंडन
“मैं सुश्री रवीना टंडन का धन्यवाद करती हूँ कि उन्होंने हमारे विद्यार्थियों पर एक गहरा प्रभाव छोड़ा और उन्हें सभी जीवित प्राणियों के प्रति दया, सहानुभूति और सम्मान अपनाने के लिए प्रेरित किया। हम मूल्यवान शिक्षा के प्रति समर्पण के लिए PETA इंडिया के भी हृदय से आभारी हैं।”
– डॉ. वंदना लुल्ला, प्राचार्या – पोदार इंटरनेशनल स्कूल (IB & Cambridge)
भारत की लगभग आधी (47%) आबादी 25 वर्ष से कम आयु की है, इसलिए PETA इंडिया अपनी मानवीय शिक्षा संबंधी पहलों पर विशेष ध्यान देता है, ताकि अगली पीढ़ी में सहानुभूति की भावना को प्रोत्साहित किया जा सके। इनमें कम्पैशनेट सिटिजन शामिल है जिसे पुरस्कार भी मिल चुका है। इस कार्यक्रम में 8 से 12 वर्ष आयु के विद्यार्थियों को पशुओं को बेहतर ढंग से समझने और उनकी सराहना करने में मदद करने के लिए तैयार किया गया है। इसके अलावा ‘एली’ नामक एक असली हाथी के आकार की मशीनी हथिनी जो बोल सकती है वह स्कूलों का दौरा करती है और रोशक कहानी के माध्यम से बच्चों को दयालुता अपनाने के लिए प्रेरित और जागरूक करती है।
रवीना टंडन, जिन्हें PETA इंडिया ने वर्ष 2025 का पर्सन ऑफ द ईयर घोषित किया था, गर्व के साथ मांस-मुक्त जीवनशैली जीती हैं। उन्होंने अपनी बेटी राशा थडानी के साथ मिलकर PETA इंडिया के सहयोग से कर्नाटक के एक हजार खंबों वाले जैन मंदिर को असली हाथी के आकार का एक मशीनी हाथी भेंट किया है; एक गाँव में मनुष्यों द्वारा एक तेंदुए का गला घोंटकर मार दिए जाने के बाद अधिकारियों से त्वरित कार्रवाई की मांग की है; अपनी खाल के लिए बेरहमी से मारे जाने वाले साँपों, मगरमच्छों और अन्य पशुओं की पीड़ा की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए PETA इंडिया के साथ मिलकर आवाज़ उठाई है; PETA इंडिया के एक अभियान में भाग लेकर लोगों से प्रजनकों (ब्रीडर्स) या पालतू पशुओं की दुकानों से पशु न खरीदने की अपील की है; तथा कम्पैशनेट सिटिजन कार्यक्रम को भी बढ़ावा दिया है। टंडन ने व्यक्तिगत रूप से भी मुंबई की व्यस्त सड़कों से अनेक पशुओं को बचाया है।



