PETA इंडिया की शिकायत के बाद चेन्नई वन विभाग ने मनोरंजन के लिए इस्तेमाल किए जा रहे बंदर को बचाया

Posted on by Sudhakarrao Karnal

मूलकडई, कोडुंगैयूर, चेन्नई: PETA इंडिया चेन्नई वन प्रभाग, विशेष रूप से रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर श्री आर. कलैवेंथन और फॉरेस्ट गार्ड सुश्री एम. विनिथरा का अवैध रूप से कैद किए गए बंदर को तुरंत बचाने के लिए आभार व्यक्त करता है। फिलहाल बंदर को वन विभाग के पुनर्वास केंद्र में रखा गया है। पशु चिकित्सक द्वारा उसके स्वास्थ्य की जांच के बाद वन विभाग उसे प्राकृतिक आवास में छोड़ने की योजना बनाएगा।

भारत में मनोरंजन के लिए बंदरों का इस्तेमाल करना गैरकानूनी है। वर्ष 1998 में केंद्र सरकार ने पशु क्रूरता निवारण (PCA) अधिनियम, 1960 की धारा 22 के तहत एक अधिसूचना जारी की थी, जिसमें बंदरों को प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल करने पर रोक लगाई गई थी। भारतीय प्रजाति के बंदर ‘वन्यजीव संरक्षण (WPA), 1972’ की अनुसूची IV के परिशिष्ट II के तहत संरक्षित हैं अधिनियम की धारा 49M और जीवित पशु प्रजाति (रिपोर्टिंग और पंजीकरण) नियम, 2024 के अनुसार, PARIVESH 2.0 पोर्टल के माध्यम से बिना रिपोर्ट और पंजीकरण किए रीसस मकाक (भारतीय प्रजाति के बंदर) को रखना दंडनीय अपराध है। इसके लिए तीन वर्ष तक की जेल, ₹1 लाख तक का जुर्माना, या दोनों की सजा हो सकती है।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार (MOEFCC) ने अपने पत्र क्रमांक F. No. WL-8/91/2024-WL, दिनांक 9 सितंबर 2024 में कहा है कि सभी प्राइमेट (वानर प्रजाति के पशु) CITES के परिशिष्ट II में सूचीबद्ध हैं और रीसस मकाक (Rhesus macaque) का निर्यात वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (WPA), 1972 की धारा 49-I के तहत नियंत्रित होता है। इसलिए, रीसस मकाक इस अधिनियम के अंतर्गत अनुसूची IV/CITES नियामक व्यवस्था के दायरे में आते हैं।

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (WPA), 1972 की धारा 49M के अनुसार, अनुसूची IV में सूचीबद्ध किसी पशु प्रजाति के जीवित नमूने को रखने वाला प्रत्येक व्यक्ति उस नमूने का विवरण प्रबंधन प्राधिकरण या अधिकृत अधिकारी को देना आवश्यक है। इसके अलावा, कोई भी व्यक्ति इस धारा और इसके तहत बनाए गए नियमों का पालन किए बिना ऐसे नमूने को अपने पास नहीं रख सकता, स्थानांतरित नहीं कर सकता या उसका प्रजनन नहीं कर सकता।

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (WPA), 1972 की धारा 49M को लागू करने के लिए, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MOEFCC) ने 28 फरवरी 2024 की राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से जीवित पशु प्रजाति (रिपोर्टिंग और पंजीकरण) नियम, 2024 अधिसूचित किए। इन नियमों के तहत, अधिनियम की अनुसूची IV में सूचीबद्ध किसी भी प्रजाति के जीवित नमूने को रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए उस पशु का विवरण देना और PARIVESH 2.0 पोर्टल के माध्यम से संबंधित राज्य के मुख्य वन्यजीव संरक्षक के पास इलेक्ट्रॉनिक रूप से पंजीकरण के लिए आवेदन जमा करना आवश्यक है। यह आवेदन नियम लागू होने के छह महीने के भीतर और उसके बाद ऐसी पशु प्रजाति को रखने के 30 दिनों के भीतर करना होगा।

हिंदू धर्म में सम्मानित स्थान रखने के अलावा, रीसस मकाक स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे मुख्य रूप से फलों पर आधारित अपने आहार के कारण बीजों के प्रसार में मदद करते हैं, और इनकी अनुपस्थिति जंगलों के लिए नुकसानदायक हो सकती है।

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