रवीना टंडन और राशा ठडानी ने PETA इंडिया के साथ मिलकर कर्नाटक के हज़ार खंभों वाले जैन मंदिर को मैकेनिकल हाथी भेंट किया — यह तकनीक अपनाने वाला दुनिया का पहला जैन मंदिर बना।
पुरस्कार विजेता अभिनेत्री रवीना टंडन और उनकी बेटी व अभिनेत्री राशा ठडानी ने PETA इंडिया के साथ मिलकर कर्नाटक के मूडबिद्री स्थित स्वस्थी श्री भट्टारक भवन में हज़ार खंभों वाले जैन मंदिर को एक विशालकाय आकार का मैकेनिकल हाथी ऐरावत भेंट किया है। यह उपहार मंदिर की उस सराहनीय निर्णय का सम्मान है, जिसमें उन्होंने कभी भी जीवित हाथी रखने या उनका उपयोग करने से इंकार किया है। आज, मूडबिद्री स्वामीजी पट्टाभिषेक की रजत जयंती के अवसर पर, एक उद्घाटन समारोह के माध्यम से ऐरावत का मंदिर में स्वागत किया गया, जिसके बाद मंगल वाद्य का प्रदर्शन भी हुआ। हज़ार खंभों वाला जैन मंदिर दुनिया का पहला जैन मंदिर बन गया है जिसने इस तकनीक को अपनाया है। अब ऐरावत के माध्यम से मंदिर की रस्में पूरी तरह सुरक्षित और अहिंसात्मक रूप से आयोजित की जा सकेंगी और असली हाथी अपने परिवारों के साथ जंगलों में आज़ादी से रह सकेंगे।
“मैं खुद को इस परिवर्तन का हिस्सा बनकर वास्तव में धन्य महसूस करती हूँ। हाथियों का मेरे दिल में हमेशा एक विशेष स्थान रहा है, और जैन मंदिर को ‘ऐरावत’ मैकेनिकल हाथी अर्पित करना मेरे लिए इन शाश्वत परंपराओं का सम्मान करने का एक विनम्र प्रयास है, साथ ही असली हाथियों को उनके परिवारों के साथ रखने का भी।” – रवीना टंडन
“यह जानकर मन को बहुत शांति मिलती है कि माँ हाथियों को उनके बच्चों से अलग किए बिना हम अपनी संस्कृति को बनाए रख सकते हैं। मैं प्रार्थना करती हूँ कि ऐरावत सभी को करुणा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे। आखिरकार, करुणा ही सच्चे धार्मिक पालन का सबसे शुद्ध रूप है। – राशा ठडानी
कर्नाटक के मंदिरों में मैकेनिकल हाथियों को स्थापित करने की PETA इंडिया की दूरदर्शी पहल का स्वागत करते हुए, हज़ार खंभों वाले जैन मंदिर के प्रमुख स्वामीजी, परम पूज्य स्वस्थी श्री डॉ. चारुकीर्ति भट्टारक पत्ताचार्य पंडिताचार्यवर्य महा स्वामीजी, श्री दिगंबर जैन मठ, मूडबिद्री ने कहा: “इस पवित्र स्थान में ऐरावत का स्वागत कर मेरा हृदय अपार आनंद से भर गया है। यह हमें जैन धर्म के सुंदर सिद्धांत ‘परस्परोपग्रहो जीवानाम्’ की याद दिलाता है कि सभी जीवन आपस में जुड़े हुए हैं और एक-दूसरे की सेवा से पोषित होते हैं। यह भेंट हमारी परंपरा की आत्मा और करुणा की भावना को एक साथ लाती है। मेरी आशा है कि ऐरावत हर भक्त के हृदय को छुए, उन्हें दया, विनम्रता और आत्मिक जागृति की ओर प्रेरित करे, और हमें अहिंसा व सौहार्द्र के उज्ज्वल मार्ग पर सौम्य रूप से आगे बढ़ाए।”
हाथी बुद्धिमान, सक्रिय और सामाजिक वन्यजीव होते हैं। लेकिन बंदी अवस्था में उन्हें जुलूसों में इस्तेमाल करने के लिए पीटा जाता है, हथियारों के जोर पर ज़बरदस्ती इस्तेमाल किया जाता है। मनोरंजन के लिए रखे गए हाथियों को अक्सर उनके परिवारों और प्राकृतिक वातावरण से अलग कर दिया जाता है। उन्हें कठोर प्रशिक्षण से गुज़ारा जाता है और उन्हें नियंत्रित करने के लिए अंकुश (धारदार लोहे की नोक वाला भारी डंडा) का उपयोग किया जाता है, जिससे उन्हें दर्द और डर का सामना करना पड़ता है। मंदिरों और अन्य जगहों पर बंदी बनाए गए ज़्यादातर हाथी लंबे समय तक सीमेंट की ज़मीन पर ज़ंजीरों से बाँधे जाने के कारण गंभीर पैर और टांगों की समस्याओं से पीड़ित होते हैं। इन्हें ठीक से भोजन, पानी, चिकित्सा सेवा और प्राकृतिक जीवन का कोई अनुभव नहीं मिल पाता। ऐसी अमानवीय परिस्थितियों में, कई हाथी बेहद मानसिक तनाव में आ जाते हैं और गुस्से में हमला कर देते हैं कई बार अपने महावतों या अन्य इंसानों या जानवरों की जान तक ले लेते हैं।
‘हेरिटेज एनिमल टास्क फोर्स’ द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, केरल में 15 वर्षों में बंदी हाथियों ने 526 लोगों की जान ले ली। थच्चिकोट्टुकावु रामचंद्रन, जो लगभग 40 वर्षों से बंदी हैं और केरल के त्योहारों में बार-बार उपयोग किए जाते हैं, उन पर 13 जानें लेने के आरोप हैं — जिनमें छह महावत, चार महिलाएं और तीन अन्य हाथी शामिल हैं।
साल 2025 में, केवल केरल में ही कम से कम 20 बंदी हाथियों ने परेशान होकर छह लोगों की जान ले ली और कई अन्य को घायल किया या संपत्ति को नुकसान पहुँचाया। 2024 में पूरे भारत में कम से कम 14 ऐसे मामले सामने आए, जहाँ बंदी हाथियों ने अपने महावतों या आसपास के लोगों को नुकसान पहुँचाया या मार डाला। हाल ही में अहमदाबाद की रथ यात्रा के दौरान भी हाथियों के बेकाबू हो जाने की घटनाएँ सामने आई हैं।
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PETA इंडिया ने वर्ष 2023 की शुरुआत में मंदिरों में जीवित हाथियों की जगह मैकेनिकल हाथियों को लाने की एक करुणामय मुहिम की शुरुआत की थी। आज दक्षिण भारत के कई मंदिरों में कम से कम 20 मैकेनिकल हाथियों का उपयोग किया जा रहा है। PETA इंडिया ने अब तक 12 मैकेनिकल हाथी उन मंदिरों को भेंट किए हैं जिन्होंने यह संकल्प लिया कि वे कभी जीवित हाथी नहीं रखेंगे और न ही किराए पर लेंगे। हाल ही में तमिलनाडु के मंदिरों को अभिनेत्री त्रिशा कृष्णन और People for Cattle in India (PFCI) की ओर से एक और मैकेनिकल हाथी भेंट किया गया। अब ये हाथी मंदिरों में पूजा और उत्सवों के लिए सुरक्षित और अहिंसात्मक रूप से उपयोग किए जा रहे हैं, जिससे असली हाथी अपने परिवारों के साथ जंगलों में रह सकें।
मैकेनिकल हाथी लगभग 3 मीटर ऊँचे और 800 किलोग्राम वजनी होते हैं। ये रबर, फाइबर, मेटल, जाली, फोम और स्टील से बने होते हैं और पाँच मोटरों से चलते हैं। ये दिखने और महसूस करने में बिलकुल असली हाथियों जैसे होते हैं। ये सिर हिला सकते हैं, कान और आँखें हिला सकते हैं, पूंछ फड़फड़ा सकते हैं, सूंड उठा सकते हैं और यहाँ तक कि पानी भी छिड़क सकते हैं। इन पर बैठा भी जा सकता है, और पीठ पर सिंहासन भी लगाया जा सकता है। इन्हें बिजली से आसानी से चलाया जा सकता है प्लग-इन करके ‘प्ले’ करें। ये पहियों पर लगे होते हैं, जिससे इन्हें सड़कों पर चलाया जा सकता है और धार्मिक जुलूसों में शामिल किया जा सकता है।
हज़ार खंभों वाला मंदिर कर्नाटक के मूडबिद्री में स्थित 18 प्रमुख जैन मंदिरों में सबसे प्रसिद्ध है, और दक्षिण भारत का “जैन काशी” कहलाता है। यह मंदिर तीर्थंकर चंद्रनाथ को समर्पित है और 15वीं शताब्दी में विजयनगर साम्राज्य के स्थानीय शासक देवराय द्वारा 1430 ईस्वी में बनवाया गया था। वर्ष 1962 में इसका जीर्णोद्धार हुआ। यह स्थापत्य कला का एक अद्भुत उदाहरण है, जिसमें तीन मंज़िलें, सात मंडप और एक भव्य 50 फीट ऊँचा एकाश्म स्तंभ (महास्तंभ) शामिल है। गर्भगृह में पंचधातु से निर्मित 8 फीट ऊँची चंद्रनाथ स्वामी की मूर्ति स्थापित है, जो इस मंदिर को एक अत्यंत पूजनीय और ऐतिहासिक जैन तीर्थ बनाती है।
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