रथ यात्रा के दौरान पशुओं के बेकाबू होने की घटना के बाद, पशुओं की भलाई और जनसुरक्षा हेतु PETA इंडिया ने गुजरात को भेंटस्वरूप एक मकैनिकल हाथी देने की पेशकश की
अहमदाबाद में 148वीं रथ यात्रा के दौरान तीन हाथियों के बेकाबू होकर कम से कम दो लोगों को घायल करने और अफरातफरी मचाने की चिंताजनक घटना के बाद, PETA इंडिया ने गुजरात के माननीय मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्रभाई पटेल को पत्र लिखकर भविष्य में राज्य में सार्वजनिक जुलूसों में जीवित पशुओं के इस्तेमाल पर नीति के तहत पूर्ण प्रतिबंध लगाने की सम्मानपूर्वक अपील की है। इसके साथ ही, संगठन ने एक जीवन-आकार का यथार्थ रूपी यांत्रिक हाथी निःशुल्क भेंट देने की पेशकश की है, जिसे या तो जगन्नाथ मंदिर या सरकार द्वारा चुने गए किसी अन्य मंदिर को दिया जा सकता है, बशर्ते वह मंदिर यह वचन दे कि वह न तो भविष्य में जीवित पशु रखेगा या किराए पर लेगा और यदि उसके पास पहले से कोई पशु है तो उसे वंतारा या किसी उपयुक्त अभयारण्य में भेज देगा।
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PETA इंडिया ने यह भी रेखांकित किया है कि भले ही रथ यात्रा से पहले पशु चिकित्सकों द्वारा जांच किए जाने की सूचना है, लेकिन समाचार फुटेज में यह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि पशु मानसिक रूप से व्याकुल थे—वे सिर हिला रहे थे और झूल रहे थे—और उन पर अंकुश जैसे हथियारों का इस्तेमाल हो रहा था, जिन पर राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा रोक लगाई जा चुकी है। PETA इंडिया ने चेताया है कि भीड़भाड़ और शोर-शराबे वाले माहौल में पशुओं को मजबूर करना अपने आप में एक गंभीर जोखिम है और इस घटना में भीषण जनहानि हो सकती थी।
यह एक बहुत बड़ी त्रासदी होते-होते टल गई। पशु स्वभाव से जंगली होते हैं और भीड़-भाड़ व तेज़ शोर जैसे अप्राकृतिक माहौल में उन्हें गहरा मानसिक तनाव होता है, जिससे घबराकर उनका बेकाबू हो जाना न सिर्फ उनके लिए बल्कि आसपास मौजूद हर व्यक्ति के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। PETA इंडिया माननीय मुख्यमंत्री से सविनय आग्रह करता है कि सार्वजनिक आयोजनों और जुलूसों में जीवित पशुओं के इस्तेमाल पर स्थायी रोक लगाने की स्पष्ट नीति बनाई जाए। गुजरात इस निर्णय के माध्यम से करुणा, विवेक और नेतृत्व का परिचय देते हुए पूरे देश के लिए एक आदर्श बन सकता है—यह एक ऐसा कदम होगा जो पशुओं और लोगों, दोनों को पूरी तरह से टाली जा सकने वाली पीड़ा और संकट से बचा सकता है। बिना किसी परंपरा या धार्मिक भावना से समझौता किए, मकैनिकल पशुओं का उपयोग इस दिशा में एक व्यावहारिक और संवेदनशील समाधान है।
PETA इंडिया के अनुसार, साल 2024 में पूरे देश में कम से कम 14 घटनाएं दर्ज की गईं जिनमें बंदी हाथी हिंसक हो गए। केवल 2025 के पहले कुछ महीनों में ही, केरल में धार्मिक आयोजनों के दौरान 20 से अधिक बंदी पशुओं ने उग्र व्यवहार किया, जिसके कारण 6 लोगों की मृत्यु और अनेक अन्य घायल हुए।
PETA इंडिया ने क्रूरता-मुक्त और सुरक्षित विकल्प के रूप में मंदिरों और जुलूसों में मकैनिकल पशुओं के उपयोग की शुरुआत की है। दक्षिण भारत के कम से कम 19 मंदिर अब इनका उपयोग कर रहे हैं, जिनमें से 10 यांत्रिक पशु PETA इंडिया द्वारा दान किए गए हैं। रबर, स्टील और फाइबर से बने ये यांत्रिक पशु तीन मीटर ऊंचे और लगभग 800 किलोग्राम वज़न के होते हैं। ये अपनी सूंड उठा सकते हैं, कान हिला सकते हैं, पूंछ हिला सकते हैं, और मूर्ति या व्यक्ति को ले जाने के लिए सक्षम होते हैं। ये इलेक्ट्रिक व्हीलबेस पर चलते हैं और जुलूस में आसानी से आगे बढ़ सकते हैं—बिना किसी पशु को पीड़ा दिए या किसी के जीवन को खतरे में डाले।
जीवित पशुओं के स्थान पर यांत्रिक पशुओं या अन्य गैर-पशु विकल्पों का उपयोग, गुजरात सरकार की पशु-कल्याण संबंधी अन्य पहलों जैसे ‘करुणा अभियान’ के साथ भी पूरी तरह मेल खाता है।
धार्मिक आयोजनों में पशुओं के इस्तेमाल को हमेशा के लिए समाप्त करें