सुप्रीम कोर्ट की हाई पावर्ड कमेटी ने हथिनी माधुरी को स्थानांतरित करने की कोई अनुमति नहीं दी, उसे कोल्हापुर वापस लाने के सार्वजनिक दावे निराधार हैं

Posted on by Surjeet Singh

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त हाई पावर्ड कमेटी (HPC) की बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति दीपक वर्मा (सेवानिवृत्त) कर रहे हैं। इस बैठक में PETA इंडिया के कानूनी और नीतिगत प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में यह स्पष्ट हुआ कि मीडिया में हथिनी माधुरी को जामनगर स्थित राधे कृष्णा टेम्पल एलीफेंट वेलफेयर ट्रस्ट (RKTEWT), जिसे वनतारा कहा जाता है, से कोल्हापुर के नांदिनी मठ (स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी संस्थान मठ) वापस लाने को लेकर जो बातें कही जा रही हैं, वे निराधार हैं और कम से कम अभी के लिए समय से पहले की गई बातें हैं। मठ द्वारा HPC को सौंपे गए फोटो और वीडियो से पता चलता है कि मठ माधुरी को उसी शेड में फिर से बंद रखने की योजना बना रहा है, जहाँ उसने 33 वर्ष अकेले बिताए थे। अंतर केवल इतना होगा कि इस बार दीवारों पर पौधों और पानी की धारा की पेंटिंग है। पिछले वर्ष HPC, बॉम्बे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद माधुरी को स्थायी पुनर्वास के लिए वनतारा भेजा गया था। यह निर्णय तब लिया गया जब उसने दर्द और निराशा के कारण मठ के मुख्य पुजारी की जान ले ली थी, एक जुलूस के दौरान एक व्यक्ति पर हमला किया था, और विशेषज्ञों ने उसकी शारीरिक तथा मानसिक स्थिति को अत्यंत खराब पाया था।

कोल्हापुर के नांदिनी मठ ने HPC के समक्ष एक आवेदन प्रस्तुत किया है, जिसमें माधुरी को वापस उसके पुराने, लेकिन हाल ही में रंगे गए शेड में भेजने की मांग की गई है। यह आवेदन माधुरी को वनतारा के विशाल वन क्षेत्र वाले घर और उन अन्य हाथियों की संगति से अलग करने का प्रयास है, जिन पर उसका मानसिक स्वास्थ्य निर्भर करता है। यह तब जबकि माधुरी की अपरिवर्तनीय शारीरिक समस्याएँ जैसे पुरानी पैर की बीमारी और गठिया, उसी शेड में जीवनभर जंजीरों में बंधे रहने के कारण हुई हैं। विशेषज्ञों ने यह भी बताया है कि मठ में लंबे समय तक अकेले रखे जाने के कारण माधुरी में मानसिक आघात के व्यवहारिक संकेत दिखाई देते हैं।

 

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हालाँकि HPC ने अभी तक माधुरी को कोल्हापुर स्थानांतरित करने की मंजूरी नहीं दी है और वनतारा में उसके पुनर्वास संबंधी बॉम्बे हाई कोर्ट का आदेश अभी भी प्रभावी है, फिर भी मठ और वनतारा (संभवतः दबाव में) द्वारा सार्वजनिक घोषणाएँ की गई हैं, जिनमें माधुरी को कोल्हापुर वापस लाने का वादा किया गया है। इससे न्यायालय के आदेशों के पालन और माधुरी के कल्याण को प्राथमिकता देने को लेकर गंभीर चिंताएँ पैदा हुई हैं। PETA इंडिया ने इस प्रस्ताव के विरुद्ध HPC के समक्ष आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं और अनुरोध किया है कि पूर्व न्यायिक आदेशों के अनुसार माधुरी को स्थायी रूप से वनतारा में ही रहने दिया जाए। कल हुई बैठक के दौरान HPC के अध्यक्ष न्यायमूर्ति दीपक वर्मा (सेवानिवृत्त) की मौखिक टिप्पणियों के अनुसार, पुराने शेड में किए गए तथाकथित सुधारों का निरीक्षण एक समिति द्वारा किया जाएगा, जिसमें महाराष्ट्र के मुख्य वन्यजीव संरक्षक व  केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के प्रतिनिधि, HPC के पशु-चिकित्सा विशेषज्ञ होंगे PETA इंडिया के एक प्रतिनिधि भी निरीक्षण कमेटी के साथ होंगे।

वनतारा में स्थानांतरित किए जाने के बाद माधुरी को विशेष पशु-चिकित्सकीय देखभाल मिलने लगी और दशकों में पहली बार उसे अन्य हाथियों के साथ रहने का अवसर मिला। यह मादा हाथियों के लिए अत्यंत आवश्यक है क्योंकि प्राकृतिक परिस्थितियों में वे कई पीढ़ियों वाले पारिवारिक झुंडों में रहती हैं। वनतारा की रिपोर्टों के अनुसार, माधुरी अब जामनगर में एक अन्य हथिनी के साथ गहरा भावनात्मक संबंध बना चुकी है। वह उसकी संगति में  विभिन्न गतिविधियों में भाग लेती है, संयुक्त हाइड्रोथेरेपी सत्रों में शामिल होती है और धीमी गूँज तथा चिंघाड़ जैसी ध्वनियों के माध्यम से संवाद करती है।

वर्ष 2025 में महाराष्ट्र सरकार और वनतारा द्वारा मीडिया में यह आश्वासन दिया गया था कि महाराष्ट्र में अत्याधुनिक सैटेलाइट वनतारा सुविधा स्थापित की जाएगी (माधुरी की देखभाल करने के कारण वनतारा की मूल कंपनी रिलायंस पर संगठित हमले भी किए गए थे।) लेकिन न तो माधुरी और न ही किसी अन्य हाथी के लिए ऐसी कोई सुविधा बनाई जा रही है। माधुरी के सर्वोत्तम कल्याण की इच्छा रखने वाले लोगों को संतुष्ट करने के लिए उस समय सार्वजनिक रूप से वादा किया गया था कि कोल्हापुर में एक ऐसा केंद्र बनाया जाएगा जिसमें 24 घंटे चिकित्सा सुविधाएँ, जोड़ों और मांसपेशियों को राहत देने के लिए विशेष हाइड्रोथेरेपी तालाब, तैराकी और प्राकृतिक गतिविधियों के लिए बड़ा जलाशय तथा शारीरिक पुनर्वास के लिए लेज़र थेरेपी और उपचार कक्ष होगा।

PETA इंडिया मानता है कि एक दुखी और अकेली हथिनी कोई शुभ आशीर्वाद नहीं, केवल अभिशाप दे सकती है। और माधुरी के मामले में वह अभिशाप पहले ही दिखाई दे चुका है। वर्षों की निराशा, दर्द और अकेलेपन ने उसे 2017 में नांदिनी मठ के मुख्य पुजारी की जान लेने के लिए मजबूर कर दिया। जो भी वास्तव में माधुरी की परवाह करता है, वह कभी भी उसके न्यायालय-निर्देशित पुनर्वास को समाप्त करने का समर्थन नहीं करेगा। उसे उस दूसरी हथिनी से अलग करना, जिससे उसका गहरा भावनात्मक संबंध बन चुका है, उसे आवश्यक चिकित्सा सुविधा और जामनगर स्थित वनतारा के विशाल वन क्षेत्र वाले घर से दूर करना, और फिर उसे उसी उदास शेड में वापस भेजना जहाँ उसने 33 वर्ष अकेले कष्ट झेला, यह भक्ति नहीं है। यह माधुरी के साथ विश्वासघात है।

PETA इंडिया का कहना है कि मठ का नया रंगा हुआ शेड एक मशीनी हाथी के लिए उपयुक्त है, जिसका उपयोग जुलूसों में भी किया जा सकता है।

माधुरी को उसके अभयारण्य-घर में आज़ादी से जीने में मदद करें।