PETA इंडिया की शिकायत के बाद बेलगावी में खून से लथपथ बैल, नीचे गिरे और बेरहमी से घसीटे गए टट्टू तथा अवैध पशु दौड़ के मामले में तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

Posted on by Surjeet Singh

सोशल मीडिया पर बेहद बेरहम वीडियो और पोस्टर सामने आए, जिनमें बुरी तरह परेशान और खून से लथपथ बैल को नाक की रस्सियों से कंक्रीट के खंभे से कसकर बांधा गया था; बैलों को हांफते और खून से लथपथ होने के बावजूद दौड़ने के लिए मजबूर किया गया; एक टट्टू गाड़ी और दूसरे पशु से बंधे होने के दौरान गिर पड़ा; बैलों और टट्टुओं को एक साथ बांधा गया; और पशुओं की दौड़ से जुड़ी अन्य क्रूरताएँ देखी गईं। इन घटनाओं के बाद, PETA इंडिया ने बेलगावी ज़िला प्रशासन और बेलगावी पुलिस, खासकर डिप्टी कमिश्नर और ज़िला मजिस्ट्रेट (DC और DM) श्री मोहम्मद रोशन (IAS) के साथ मिलकर, उन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करवाई जो पशुओं को दौड़ने के लिए मजबूर करके क्रूरता करने, उसमें शामिल होने और उसे आयोजित करने के लिए ज़िम्मेदार थे।

भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 325 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (पीसीए), 1960 की धारा 11 के तहत सुरेबन पुलिस स्टेशन द्वारा इत्तप्पा कदप्पा, भीमप्पा अवप्पा, भरमप्पा भीमप्पा और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। PETA इंडिया अब बेलगावी ग्रामीण पुलिस से चार बैलों, दो टट्टुओं और इसमें शामिल किसी भी अन्य पशु को जब्त करने का आग्रह करता है।

बीएनएस, 2023 की धारा 325 के तहत किसी भी पशु को विकलांग बनाना या उसकी हत्या करना एक संज्ञेय अपराध है और इसमें पांच वर्ष तक के कारावास, जुर्माने या दोनों का प्रावधान है। पीसीए अधिनियम, 1960 की धारा 11 “क्रूरता” को परिभाषित करती है और किसी भी पशु को अनावश्यक पीड़ा या कष्ट पहुँचाने को दंडनीय अपराध बनाती है।

बैलगाड़ी और टट्टू-गाड़ी की दौड़ पशुओं को गंभीर शारीरिक और मानसिक पीड़ा पहुँचाती है। उन्हें नियमित रूप से पीटा जाता है, कोड़े मारे जाते हैं, उनकी पूंछ की हड्डियाँ तोड़ी जाती हैं और उन्हें दौड़ने के लिए मजबूर करने के लिए बिजली के झटके देने वाले उपकरणों और नुकीली छड़ियों जैसे हथियारों का इस्तेमाल किया जाता है—यह सब उन्हें थकावट की सीमा से आगे दौड़ाने के लिए किया जाता है। ऐसे आयोजनों में इस्तेमाल किए जाने वाले पशु अक्सर गंभीर चोटों, फेफड़ों में रक्तस्राव और यहां तक कि मृत्यु का शिकार होते हैं। एक ही गाड़ी खींचने के लिए अलग-अलग प्रजातियों के पशुओं का उपयोग पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत अधिसूचित भारवाही और बोझा ढोने वाले पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण नियम, 1965 का उल्लंघन है, क्योंकि वे अलग-अलग गति से चलते हैं और उनकी ऊंचाई तथा क्षमता भी अलग-अलग होती है।

जब आप पशुओं पर क्रूरता देखें तो उसकी रिपोर्ट कैसे करें