हथिनी माधुरी द्वारा सार्वजनिक रूप से एक व्यक्ति पर हमला करने का नया चौंकाने वाला वीडियो सामने आया, जबकि मठ उसे नई सैंक्चुरी से वापस बुलाने और जुलूसों में घुमाने की मुहिम चला रहा है

Posted on by Surjeet Singh

PETA इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त हाई-पावर्ड कमेटी (HPC) के सदस्यों और महाराष्ट्र के मुख्य वन्यजीव वार्डन को एक नया वीडियो सबूत सौंपा है, जिसमें हाथी माधुरी (जिसे महादेवी भी कहा जाता है) 13 मई 2022 को एक गांव में धार्मिक जुलूस के दौरान अचानक एक व्यक्ति पर हमला करती दिखाई दे रही है। यह घटना उस समय हुई जब लोग उसकी पीठ पर सवार थे, और वीडियो में दिखता है कि इस कारण उसे डंडों से चुभोया और पीटा जा रहा था। वन विभाग के पंचनामा में भी दर्ज है कि माधुरी को 5 से 15 मई 2022 तक बिना आवश्यक परिवहन अनुमति के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 का उल्लंघन करते हुए जुलूस में इस्तेमाल किया गया। यह सबूत HPC को स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी संस्थान मठ (करवीर) की उस अर्जी के जवाब में दिया गया है, जिसमें उन्होंने माधुरी को वनतारा के राधे कृष्णा टेंपल एलीफेंट वेलफेयर ट्रस्ट (RKTEWT) की पुनर्वास सुविधा से वापस बुलाकर एक महीने तक नंदनी गांव में जुलूसों में घुमाने की अनुमति मांगी है,  जबकि माधुरी को गंभीर गठिया और अन्य दर्दनाक स्वास्थ्य समस्याएं हैं।

33 साल तक अकेले और जंजीरों में बिताने के बाद, 36 वर्षीय हथिनी माधुरी 30 जुलाई 2025 को वनतारा के RKTEWT, जामनगर में एक नई जिंदगी की शुरुवात करने पहुंची। यह तब संभव हुआ जब 28 जुलाई 2025 को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने माननीय बॉम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें उसकी बिगड़ती सेहत और मानसिक पीड़ा को देखते हुए उसे राहत देने का आदेश दिया गया था। इसके बावजूद, जैन मठ द्वारा अदालत के आदेश के अनुसार माधुरी को शांति से छोड़ने से इनकार करने के कारण, स्थानीय लोगों को उकसाया गया कि वे पुलिस, PETA इंडिया और RKTEWT के कर्मचारियों पर सैकड़ों पत्थर बरसाएं। इस हिंसा में कारों के शीशे टूट गए, कई लोग घायल हो गए और PETA इंडिया के एक कर्मचारी की पसली में गंभीर चोट आई।

मठ में, माधुरी को लगातार कंक्रीट पर खड़े रहने से पैरों में कई दर्दनाक बीमारियाँ हो गई थीं, फिर भी उसे शोरगुल वाले जुलूसों में घुमाया जाता था और अंकुश (लोहे का नुकीला हुक) जैसे हथियारों से नियंत्रित किया जाता था।

हाथी वर्षों तक अकेलेपन और बंदी जीवन में झेली गई शारीरिक और मानसिक यातना से हिंसक हो सकते हैं। माधुरी ने कई बार मनुष्यों पर हमला करके अपनी निराशा व्यक्त की है, यहां तक कि 2017 में मठ के मुख्य पुजारी को बार-बार दीवार से पटककर मार डाला था।

इन परिस्थितियों में माधुरी की मानसिक पीड़ा को पहचानते हुए, भट्टारक मठ ने शुरुआत में उसका पुनर्वास करने का इरादा किया था। हालांकि, बाद में उनका रुख बदल गया और उन्होंने उसे मुहर्रम और अन्य आयोजनों के लिए किराए पर देना शुरू कर दिया।

विशेषज्ञों ने लगातार माधुरी के चिकित्सा इतिहास को दर्ज किया है, जिसमें HPC द्वारा नियुक्त उप-समिति भी शामिल है। इस रिकॉर्ड में उल्लेख है कि वह दशकों तक कंक्रीट पर खड़े रहने के कारण कई पुरानी और अब असाध्य हो चुकी बीमारियों से पीड़ित है। इनमें शामिल हैं: स्टेज 4 गठिया, फुट रॉट (पैर का सड़न रोग) जो एक दर्दनाक और धीरे-धीरे बिगड़ने वाली स्थिति है और इसके लिए लगातार विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है।  RKTEWT के विशेषज्ञ पशुचिकित्सकों द्वारा किए गए विस्तृत अवलोकन, जो सार्वजनिक डोमेन में साझा किए गए हैं, इन निष्कर्षों की पुष्टि करते हैं और नाखूनों पर घाव व पसयुक्त फोड़े, अगली टांगों पर पुराने संक्रमण के घाव, पैरों की छोटी हड्डियों में कई फ्रैक्चर और मठ में जीवन के कारण गंभीर स्टीरियोटिपिक व्यवहार का विवरण देते हैं। माधुरी झूलने और सिर हिलाने जैसी दोहरावदार हरकतों के माध्यम से मानसिक तनाव के संकेत दिखाती है, जो दशकों तक अकेलेपन और अपनी प्रजाति के अन्य हाथियों के साथ सार्थक सामाजिक मेलजोल से वंचित रहने का परिणाम है।

RKTEWT में, माधुरी ने मठ में वर्षों तक अकेले रहने के बाद एक अन्य बचाए गए हाथी के साथ भावनात्मक जुड़ाव बना लिया है। फिर भी, मठ ने उसे वापस बुलाकर जुलूसों में घुमाने की मांग की है, जिसका अर्थ है कि उसे दोबारा शारीरिक और मानसिक कष्ट सहने के लिए मजबूर करना।

PETA इंडिया और फेडरेशन ऑफ इंडियन एनिमल प्रोटेक्शन ऑर्गेनाइजेशंस (FIAPO) दोनों ने जैन मठ को एक मैकेनिकल (यांत्रिक) हाथी देने की पेशकश की है, ताकि उसका उपयोग मंदिर की रस्मों हेतु किया जा सके। हम सभी मंदिरों को प्रोत्साहित कर रहे हैं कि जीवित हाथियों के बजाय मानवीय मैकेनिकल हाथियों को अपनाएं, ताकि पशु कल्याण और मानव सुरक्षा दोनों बनी रहे। हाल ही में, कर्नाटक के हजार खंभों वाले जैन मंदिर ने PETA इंडिया की मदद से इस यांत्रिक हाथी लेकर इस तकनीक को अपनाने वाला दुनिया का पहला जैन मंदिर बनकर इतिहास रच दिया।

कृपया हमारे साथ जुड़कर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के वन मंत्री से अपील करें कि वे माधुरी की रक्षा करें, यह सुनिश्चित करके कि वह सैंक्चुरी में ही रहे, और मठ को प्रोत्साहित करें कि वे जुलूसों के लिए एक मैकेनिकल (यांत्रिक) हाथी को स्वीकार करें।

अधिकारियों को टैग करके tweet करें और अपील करें कि माधुरी को शांति से रिटायर्ड होने दें।