PETA इंडिया की कार्यवाही के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने जैन मठ में पीड़ित हथिनी महादेवी को अभयारण्य में भेजने के बंबई हाई कोर्ट के आदेश को मंज़ूरी दी

Posted on by Surjeet Singh

PETA इंडिया की कार्यवाही के बाद आज भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने परेशान हथिनी महादेवी (जिसे माधुरी भी कहा जाता है) को अभयारण्य में पुनर्वासित करने के बंबई उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा। महादेवी, जो कि 36 वर्षीय मादा हथिनी है, कोल्हापुर के नंदनी गांव स्थित स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी संस्था मठ (करवीर) में वर्ष 1992 से अकेले और जंजीरों में रखा गया था। वर्ष 2017 में उसने मानसिक तनाव के कारण मठ के मुख्य पुजारी को दीवार से पटक-पटककर मार डाला था।

उसकी बिगड़ती मानसिक और शारीरिक स्थिति को लेकर PETA इंडिया ने महाराष्ट्र वन विभाग और सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त उच्च स्तरीय समिति (HPC) के समक्ष शिकायत दर्ज की थी, जिसके आधार पर 16 जुलाई 2025 को माननीय बंबई उच्च न्यायालय ने महादेवी को जामनगर स्थित राधे कृष्ण टेम्पल एलिफेंट वेलफेयर ट्रस्ट में पुनर्वासित करने का आदेश दिया। आज माननीय न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और माननीय न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने इस आदेश को बरकरार रखते हुए महादेवी को राहत प्रदान की।

यह आदेश जैन मठ द्वारा दायर उस अपील पर सुनवाई करते हुए पारित किया गया जिसमें मठ ने बंबई उच्च न्यायालय के फैसले का विरोध करते हुए हथिनी की हिरासत बनाए रखने की मांग की थी, बावजूद इसके कि महादेवी को गठिया सहित कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं थीं जो उसने जीवन का अधिकांश समय ठोस फर्श पर बिताने के कारण झेली थीं। सर्वोच्च न्यायालय ने मठ की अपील को खारिज करते हुए हथिनी के भले को अहम माना और अधिकारियों को निर्देश दिया कि हथिनी को अभयारण्य इस तरह से पहुँचाया जाए जिससे उसे कोई तकलीफ़ न हो और उसकी पूरी देखभाल हो।

इससे पहले, 16 जुलाई 2025 को पारित अपने आदेश में बंबई उच्च न्यायालय ने कहा था,हमें इस बात में कोई संदेह नहीं कि याचिकाकर्ता-मठ की मंशा हथिनी को हानि पहुँचाने की नहीं रही होगी, लेकिन जब एक ओर हथिनी के अधिकार और दूसरी ओर मठ के धार्मिक गतिविधियों में उसके उपयोग का अधिकार टकराते हैं, तो हथिनी के भले को पहले रखा जाना चाहिए।”

हाथी बेहद बुद्धिमान और भावनात्मक प्राणी होते हैं जिन्हें मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए ज़ंजीरों से मुक्त जीवन और अन्य हाथियों का साथ चाहिए। PETA इंडिया सुप्रीम कोर्ट का आभार व्यक्त करता है कि कोर्ट ने महादेवी के इस अधिकार को मान्यता दी कि वह अपने बचे हुए जीवन के वर्षों को दर्द, हथियारों, डर और अकेलेपन से मुक्त रहकर जी सके।

महादेवी मात्र तीन वर्ष की उम्र से जैन भट्टारक मठ की एक शेड के ठोस फर्श पर रह रही है। स्वतंत्र पशु चिकित्सकों ने उसकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति का दस्तावेजीकरण किया है, जिसमें पैर की दर्दनाक सड़न (फुट रॉट), अत्यधिक बढ़े हुए नाखून और गठिया शामिल हैं। इन हालातों में उसकी मानसिक पीड़ा को समझते हुए भट्टारक मठ ने शुरुआत में उसका पुनर्वास कराने का इरादा जताया था, लेकिन बाद में उनका रुख बदल गया और उन्होंने महादेवी को मोहर्रम व अन्य आयोजनों के लिए किराए पर देना शुरू कर दिया।

राधे कृष्ण टेम्पल एलिफेंट वेलफेयर ट्रस्ट में महादेवी को ज़ंजीरों और हथियारों से मुक्त जीवन मिलेगा, साथ ही अन्य हाथियों की संगति में रहने का अवसर भी मिलेगा। उसे गठिया जैसी बीमारियों के इलाज के लिए विश्व स्तरीय पशु चिकित्सकों द्वारा विशेष देखभाल दी जाएगी, जिसमें हाइड्रोथेरेपी (जल चिकित्सा) भी शामिल है।

PETA इंडिया और फेडरेशन ऑफ इंडियन एनिमल प्रोटेक्शन ऑर्गनाइजेशंस (FIAPO) ने जैन मठ को मंदिर के अनुष्ठानों में उपयोग के लिए एक मैकेनिकल हाथी देने का प्रस्ताव दिया है और सभी मंदिरों से अपील की है कि वे जीवित हाथियों के स्थान पर पशुओं के कल्याण और मानव भलाई के लिए मानवीय मैकेनिकल हाथियों का उपयोग करें।

मनोरंजन और अन्य आयोजनों में हाथियों के इस्तेमाल पर रोक लगवाने की मांग करें