PETA इंडिया के हस्तक्षेप और सुप्रीम कोर्ट की समिति के फैसले के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने हाथिनी महादेवी को जामनगर के अभयारण्य में पुनर्वासित करने का दिया आदेश

Posted on by Shreya Manocha

36 वर्षीय हथिनी महादेवी (जिसे माधुरी भी कहा जाता है), जो नंदनी गांव स्थित स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी संस्थान मठ (करवीर) की हिरासत में थी और जिसने वर्ष 2017 में मठ के मुख्य पुजारी को अपनी सूंढ़ में दबोचकर दीवार पर पटक-पटक कर दुखद रूप से मृत्यु कर दी थी, उसे माननीय बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा राधे कृष्णा टेम्पल एलिफेंट वेलफेयर ट्रस्ट, जामनगर में पुनर्वासित किए जाने का आदेश दिया गया है। यह आदेश PETA इंडिया द्वारा उसकी पीड़ा को लेकर महाराष्ट्र वन विभाग और भारत के सुप्रीम कोर्ट की उच्चस्तरीय समिति (HPC) के समक्ष उठाई गई चिंताओं के आधार पर दिया गया।

 

महादेवी ने अपना अधिकांश जीवन जैन भट्टारक मठ की एक शेड में कंक्रीट के फर्श पर जंजीरों में बंधे हुए बिताया है। स्वतंत्र पशु चिकित्सकों, जिनमें डॉ. एन.एस. मनोहरन के नेतृत्व में उच्चस्तरीय समिति (HPC) द्वारा नियुक्त उप-समिति और महाराष्ट्र के पूर्व अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ. वी. क्लेमेंट बेन शामिल हैं, ने महादेवी की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को दर्ज किया है, जिसमें पैर सड़ने की तकलीफ, बढ़े हुए नाखून और गठिया (आर्थराइटिस) जैसी समस्याएं शामिल हैं। महादेवी की मानसिक पीड़ा भी उसकी स्टीरियोटाइपिक हरकतों जैसे सिर को बहुत देर तक बार-बार ऊपर-नीचे हिलाने जैसे व्यवहारों से साफ दिखाई देती है। यह व्यापक रूप से स्वीकार किया गया है कि इस तरह का असामान्य व्यवहार, जो जंगली हाथियों में नहीं पाया जाता, यह दर्शाता है कि महादेवी बेहद अकेलेपन, उबाऊ और कैद की कठोर परिस्थितियों के कारण तनावग्रस्त, परेशान और मानसिक रूप से अस्थिर हो चुकी है।

अदालत के आदेश में कहा गया है,

हमें इस बात पर कोई शक नहीं है कि याचिकाकर्ता-मठ का महादेवी हाथी को नुकसान पहुंचाने का कोई जानबूझकर इरादा नहीं था, लेकिन हाथी के अधिकार और धार्मिक गतिविधियों में हाथी के उपयोग को लेकर याचिकाकर्ता-मठ के अधिकारों के बीच टकराव की स्थिति में हाथी की भलाई को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।”

राधे कृष्णा टेम्पल एलिफेंट वेलफेयर ट्रस्ट में, महादेवी अब जंजीरों और हथियारों से मुक्त रह पाएगी, और उसे दूसरे हाथियों का साथ मिलेगा। उसे गठिया (आर्थराइटिस) के इलाज के लिए विशेष पशु चिकित्सा सेवा भी मिलेगी, जिसमें हाइड्रोथेरेपी जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।

कोई भी जीव अकेलेपन, जंजीरों और हथियारों से नियंत्रित किए जाने का हकदार नहीं है। PETA इंडिया बॉम्बे हाईकोर्ट की आभारी है, जिसने महादेवी को अपने जीवन के बाकी दिन सुरक्षित और दूसरे हाथियों के साथ बिताने का मौका दिया। साथ ही, धार्मिक आयोजकों से अनुरोध करती है कि वे असली हाथियों की जगह असली हाथी जैसी दिखने वाले रोबोटिक हाथियों का इस्तेमाल करें।

 

हाथी महादेवी को बच्चों को अपनी सूंड में लपेटने का प्रशिक्षण दिया गया था, जिससे महावत को पैसे मिलते थे, जबकि यह लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा था। कैद में रहने से हाथी को मानसिक पीड़ा हो रही थी, जिसे पहचानकर शुरुआत में भट्टारक मठ ने उसे पुनर्वासित करने की मंशा जताई थी। लेकिन बाद में उनका रुख बदल गया, जब उन्होंने मुहर्रम और अन्य कार्यक्रमों के लिए हाथी को किराए पर देकर मुनाफा कमाना शुरू कर दिया। जब उसे अलग-अलग गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया गया, तो उसे भीड़भाड़ वाली जगहों में ले जाया जाता, जहां उस पर रस्सियों और अंकुश जैसे हथियारों से नियंत्रण रखा जाता। उसके पैर सड़ने की समस्या और गठिया होने के बावजूद उसकी पीठ पर भारी हौदा रखा जाता जिसमें बैठकर लोग सवारी करते थे, उसे वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत अनिवार्य अनुमति के बिना दो बार बोनालू और मुहर्रम जुलूसों के लिए तेलंगाना ले जाया गया था।

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