पशु कल्याण की राह में हिंसा: जैन मठ से हथिनी महादेवी को छुड़ाने के दौरान उपद्रवियों का हमला, PETA इंडिया के कर्मचारी की पसली टूटी

Posted on by Shreya Manocha

सोमवार रात जब PETA इंडिया की टीम, पुलिस और स्वयंसेवक मिलकर सुप्रीम कोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेशों का पालन करवाते हुए वर्षों से पीड़ित हथिनी महादेवी को राधे कृष्ण टेम्पल एलिफ़ेंट वेलफेयर ट्रस्ट (जामनगर) में स्थानांतरित कराने की प्रक्रिया में सहायता कर रहे थे, तब स्वस्तिश्री जिंसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी संस्थान मठ (करवीर), नंदनी गाँव के पास उपद्रवियों ने सैकड़ों बड़े-बड़े पत्थर बरसाए। इस क्रूर हमले में PETA इंडिया के एक स्टाफ सदस्य की पसली टूट गई और हमारी टीम की गाड़ी की सभी खिड़कियाँ चकनाचूर कर दी गईं।

 

महादेवी पिछले 33 वर्षों से उस मठ में ज़ंजीरों में जकड़ी हुई एक कंक्रीट के फर्श पर खड़ी थी, जिसके कारण उसके शरीर में कई गंभीर तकलीफ़ें हो गई हैं। अकेलेपन, दर्द और हताशा में वह वर्षों से तड़प रही थी। 2017 में इसी पीड़ा और मानसिक तनाव के चलते उसने मंदिर के प्रमुख स्वामीजी को मार डाला था। पहले तो मंदिर ने उसे आज़ाद किए जाने की अनुमति दी थी, लेकिन बाद में यह समझकर कि उसे मुहर्रम जैसे आयोजनों में अवैध रूप से किराए पर देकर पैसा कमाया जा सकता है, मंदिर ने उसे रोकने के लिए कानूनी लड़ाई शुरू कर दी। PETA इंडिया और फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन ऐनिमल प्रोटेक्शन ऑर्गनाइज़ेशन्स (FIAPO), दोनों ने ही मंदिर को एक मैकेनिकल हथिनी  उपहार में देने की पेशकश की है, ताकि धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजनों में जीवित पशुओं के स्थान पर उसका इस्तेमाल किया जा सके।

 

हमारे ऑडियो-विजुअल स्पेशलिस्ट  रोहन सर्वप्रिय, जो सिर्फ़ इस स्थानांतरण को डॉक्युमेंट करने गए थे, गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्होंने कहा, “हम राधे कृष्ण टेम्पल एलिफ़ेंट वेलफेयर ट्रस्ट के साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेशों को लागू करने में सहायता कर रहे थे, ताकि पीड़ित हथिनी महादेवी को ज़रूरी देखभाल के लिए उनके पुनर्वास केंद्र में स्थानांतरित किया जा सके। उसी दौरान हमारे ऊपर सैकड़ों पत्थर बरसाए गए और हमारी गाड़ी की खिड़कियाँ तोड़ दी गईं। महादेवी ने 33 सालों से अकेलेपन और ज़ंजीरों में बंधे जीवन को झेला है। उसे गठिया की शिकायत है और उसके पैरों में तेज़ दर्द होता है। हमें डर और चोट तो लगी, लेकिन जो दर्द महादेवी ने दशकों तक सहा है, उसके सामने हमारी तकलीफ़ कुछ भी नहीं। हम आभारी हैं कि अब महादेवी लगभग RKTEWT पहुँच चुकी है, जहाँ उसे विशेषज्ञ पशु-चिकित्सकों की देखभाल मिलेगी और वह अन्य हाथियों के साथ जीवन बिता सकेगी।”

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