इंटर्न से अध्यक्ष तक: पूर्वा जोशीपुरा विश्व में “जीवदया” का संदेश फैलाती हुई बनीं PETA इंटरनेशनल की नई अध्यक्ष
पूर्वा जोशीपुरा, जो पूर्व में PETA UK के इंटरनेशनल अफेयर्स की वाइस प्रेसिडेंट थीं और PETA इंडिया के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की सदस्य भी हैं, ने अपने जीवन का आधा से अधिक हिस्सा पशु शोषण को समाप्त करने में बिताया है चाहे वह एक से बढ़कर झखजोर देने वाले प्रदर्शन हो, गुप्त अभियानों में हिस्सा होना हो, अदालतों और कार्यालयों में काम करना हो, या सरकार एवं कॉर्पोरेट स्तर पर अभियान चलाना हो। अब वह PETA इंटरनेशनल की पहली अध्यक्ष के रूप में नियुक्त हुई हैं यह एक नई शाखा है जो यूरोप, मध्य पूर्व और एशिया में PETA के अभियानों को बढ़ावा देगी। तीन महाद्वीपों में कार्य और जीवन का अनुभव रखने वाली पूर्वा “वसुधैव कुटुम्बकम्” (पूरा संसार एक परिवार है) में विश्वास रखती हैं और इस परिवार में पशु भी शामिल हैं।

भारत के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश डॉ. डी. वाई. चंद्रचूड़ और परिवार PETA इंडिया के 25वें वार्षिक समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में।
मूलरूप से गुजरात से संबंध रखने वाली पूर्वा अमेरिका में जन्मीं और उन्होंने ओल्ड डॉमिनियन यूनिवर्सिटी से मनोविज्ञान में मैग्ना कुम लाउद से स्नातक की उपाधि प्राप्त की है। उन्होंने For a Moment of Taste: How What You Eat Impacts Animals, the Planet, and Your Health और Survival at Stake नामक पुस्तकें लिखीं, जो HarperCollins India द्वारा प्रकाशित हैं। पूर्वा ने 1999 में PETA US में इंटर्न के रूप में अपनी सक्रियता की शुरुआत की और मात्र 23 वर्ष की आयु में रिसर्च एसोसिएट बनीं। उन्होंने गोशाला, प्रयोगशाला और पशु शोषण के अन्य केंद्रों में कई गुप्त अभियानों का नेतृत्व किया।
जैकलीन फर्नांडीस वेगन इंडिया कॉन्फ्रेंस 2024 में, जहां उनके साथ पूर्वा की पुस्तक ‘सर्वाइवल एट स्टेक: हाउ आवर ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इज की टू ह्यूमन एग्जिस्टेंस’ भी थी।
इस नई भूमिका को निभाने के लिए पूर्वा जोशीपुरा के पास 25 वर्षों का गहन अनुभव है। जब उन्होंने 1999 में PETA US में इंटरन के रूप में कार्य शुरू किया और केवल 23 वर्ष की आयु में Research Associate बन गईं। वे boardroom से लेकर सड़क तक प्रभावी अभियानों की रूपरेखा तैयार करने के लिए जानी जाती हैं। पिछले सप्ताह ही, पूर्वा जोशीपुरा ने दिल्ली में सार्वजनिक प्रदर्शन करके “पशुओं पर परीक्षण” की पीड़ा को उजागर किया, जो कि पशु अत्याचार के विरोध में पालामूर बायोसाइंसेज़ के अंदर होने वाली क्रूरता को प्रदर्शित कर रहा था। पालामूर बायोसाइंसेज़ एक प्रयोगशाला है जो विदेशी ग्राहकों को सेवा प्रदान करती है। उन्होंने न्यूयॉर्क में एक माईकल कॉर्स फैशन शो के दौरान उसकी क्रूर फर (fur) उपयोग के विरोध में प्रदर्शन करते हुए जेल भी गई थीं जिसके बाद माईकल कॉर्स ने फर का उपयोग प्रतिबंधित कर दिया। इसके अलावा, उन्होंने गुप्त अभियान चलाकर बूचड़खानों, प्रयोगशालाओं और अन्य ऐसे “houses of horrors” का अध्ययन किया है जहाँ पशु दुर्व्यवहार, शोषण या हत्या के शिकार होते हैं।
हिंसा के खिलाफ कई सफल अभियानों का नेतृत्व करने के लिए वैश्विक स्तर पर उनकी पहचान है जिनमें एक अमेरिकी प्रयोगशाला पशु आपूर्तिकर्ता को यूरोप विस्तार न करने देने, और मर्सिडीज-बेंज को लेदर-मुक्त अंदरूनी डिजाइन अपनाने के लिए प्रेरित करना शामिल है। इसके अलावा, उन्होंने भारत में कॉस्मेटिक परीक्षणों पर प्रतिबंध और घोडागाड़ियों को बंद करवाने जैसे महत्वपूर्ण परिणाम भी सुनिश्चित किए हैं ।
View this post on Instagram
नॉर्वे में फर के खिलाफ प्रदर्शन करती पूर्वा, अब वहाँ फर फार्मिंग पर प्रतिबंध लग चुका है
प्रदर्शन के माध्यम से राहगीरों से अपील करती पूर्वा, कि वे खुद को मांस के लिए इस्तेमाल होने वाले पशुओं की तक़दीर से जोड़कर देखें
‘खून से सनी’ और ‘उधड़ी खाल’ के रूप में प्रदर्शन कर Hermès हैंडबैग के लिए की जाने वाली सरीसृपों (रेंगने वाले जीवों) पर क्रूरता की कड़ी निंदा करती पूर्वा
पशु परीक्षणों में पशुओं पर होने वाली क्रूरता को प्रदर्शित करती पूर्वा। दिल्ली में इस प्रदर्शन के द्वारा पूर्वा ने पालाामुर बायोसाइंसेज़ लैब से बीगल कुत्तों और अन्य पशुओं की रिहाई की माँग कर रही हैं।
“सालों पहले, मैं जिस बूचड़खाने में चमड़े के लिए मारी जाने वाली गायों की पीड़ा को रिकॉर्ड कर रही थी, मेरी नज़र एक डरे सहमे बछड़े पर पड़ी जो ज़मीन पर बंधा पड़ा था और अपनी ओर आने वाली मौत को देख रहा था। उसी पल मैंने संकल्प लिया कि मैं अपना जीवन पशु मुक्ति को समर्पित करूंगी। पिछले 25 वर्षों से PETA इंडिया और अन्य संस्थाओं के साथ एक गुप्त जांचकर्ता से लेकर अंतरराष्ट्रीय अभियानों का नेतृत्व करने तक मैंने अपने उस वादे को सच्चाई में बदला है।” – पूर्वा जोशीपुरा
जोशीपुरा की योजना है कि वे अपने अंतरराष्ट्रीय अनुभव से विकसित सांस्कृतिक समझ और भारतीय विरासत से मिली करुणा की भावना का उपयोग करते हुए वैश्विक अभियानों में नई ऊर्जा भरें। उनकी प्राथमिकताओं में तकनीक और नवाचार का उपयोग कर पशुओं के शोषण को समाप्त करना शामिल है जैसे कि एशियाई मंदिरों में जंजीरों में बंधे हाथियों की जगह यांत्रिक हाथियों का उपयोग करना, और बच्चों को सभी जीवों के प्रति दयालुता के महत्व को सिखाने के लिए बोलने वाले रोबोटिक पशुओं का उपयोग करना। वे पशु अधिकारों को न केवल एक नैतिक आवश्यकता के रूप में बढ़ावा देना चाहती हैं, बल्कि यह भी दिखाना चाहती हैं कि मानवीय अस्तित्व के लिए यह कितना जरूरी है क्योंकि जलवायु संकट, एंटीबायोटिक प्रतिरोध, और महामारियों जैसे बड़े संकट, हमारे द्वारा पशुओं के साथ किए जाने वाले व्यवहार से जुड़े हुए हैं।

फिल्म ‘लव ब्रेकअप्स ज़िंदगी’ में एक बेघर कुत्ते के बचाव को दर्शाने वाली दिया मिर्जा को ‘हीरो टू एनिमल्स’ अवॉर्ड प्रदान करती पूर्वा
“मैं पशु अधिकारों के वैश्विक भविष्य को आकार देने में मदद करने और भारत की अहिंसा की भावना से उत्पन्न करुणा को हर दिशा में केंद्र में रखने के अवसर से गहराई से सम्मानित महसूस कर रही हूं। मैं पशु संरक्षण के लिए तकनीकी समाधान अपनाने, मुक्ति को आगे बढ़ाने के लिए सांस्कृतिक समझ का उपयोग करने, और इस अडिग सच्चाई को प्रचारित करने का प्रयास करूंगी कि हम पशुओं के साथ जैसा व्यवहार करते हैं, वही हमें परिभाषित करता है।” – पूर्वा जोशीपुरा
पूर्वा जोशीपुरा की कई उल्लेखनीय उपलब्धियों में शामिल हैं: अमेरिका स्थित एक लैब पशु आपूर्तिकर्ता को यूरोप में एक सुविधा स्थापित करने से रोकना; मर्सिडीज-बेंज को यह सहमत करना कि वह विशेष ऑर्डर पर चमड़ा-मुक्त इंटीरियर की पेशकश करने वाला पहला कार रिटेलर बने (अब रेनॉल्ट पशु चमड़े का उपयोग समाप्त कर रहा है और कई इलेक्ट्रिक कारों में वीगन लेदर मानक के रूप में आता है); भारत में कॉस्मेटिक्स और उनकी सामग्रियों के पशुओं पर परीक्षण पर प्रतिबंध लगाने के सफल प्रयासों का नेतृत्व करना; पेट्रा और मुंबई में घोड़ा-गाड़ी के उपयोग को समाप्त करना; और मनोरंजन के लिए बैलों के उपयोग पर भारतीय सुप्रीम कोर्ट से प्रतिबंध लगवाना – जिसके बाद उन्हें जल्लीकट्टू जैसे क्रूर “खेल” के समर्थकों द्वारा उनका पुतला फूक गया – यह प्रतिबंध आज भी देश के अधिकांश हिस्सों में लागू है।
पूर्वा पेट्रा, जॉर्डन में एक गधे की जांच कर रही हैं, जो सवारी के लिए इस्तेमाल हो रहा है और उसे मदद की सख्त जरूरत है।

पूर्वा ‘जिस्म 2’ की टीम के साथ बातचीत करती हुईं, जिन्होंने मुंबई में घोड़े वाली गाड़ियों पर प्रतिबंध लगाने में मदद की।
PETA संस्थाओं की संस्थापक इंग्रिड न्यूकिर्क, जो दिल्ली में पली-बढ़ीं हैं वह कहती हैं – “मैनचेस्टर से मुंबई तक, पूर्वा पशु मुक्ति आंदोलन में एक अहम योगदानकर्ता रही हैं, उनकी असाधारण प्रतिबद्धता और दृढ़ संकल्प, दुनिया भर में पशुओं की मदद के हमारे महत्वपूर्ण प्रयासों को विस्तार देने में अमूल्य है।”
क्या आप भी पूर्वा की इस यात्रा से प्रेरित हुए है ?
आज ही PETA के सदस्य बनें



