PETA US से बातचीत के बाद Renault का बड़ा फैसला – अब गाड़ियों में नहीं होगा पशु चमड़ा इस्तेमाल
दुनिया की जानी-मानी कार कंपनी Renault ने घोषणा की है कि वह 2025 के अंत तक अपने सभी वाहनों में पशु चमड़े का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर देगी। यह फैसला PETA US (एक अमेरिकी संस्था) के साथ हुई बातचीत के बाद लिया गया, जिसमें PETA की ओर से एक वीगन कार इंटीरियर सर्वे साझा किया गया। इस सर्वे से पता चलता है कि अब उपभोक्ता गाड़ियों में पशु-मुक्त इंटीरियर को प्राथमिकता दे रहे हैं। PETA इंडिया पहले भी Tata Motors को उसकी AVINYA कॉन्सेप्ट कार में आधुनिक वीगन इंटीरियर के उपयोग के लिए ‘Cow Friendly Future Award’ से सम्मानित कर चुका है।
सच्ची लक्ज़री वह है जिसमें करुणा हो – और Renault यह बात समझता है। Renault ने पशु चमड़े का इस्तेमाल न करने का फैसला लेकर यह दिखाया है कि वह पशुओं की ज़िंदगी बचाने, पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाने, और करुणा व तकनीक को साथ लाने की दिशा में काम कर रहा है।
Renault की नई गाड़ियाँ – Renault 5 E-Tech Electric, Symbioz, और Rafale – अब ऐसी सीटों के साथ आ रही हैं जो रीसायकल प्लास्टिक और पुराने वस्त्रों से बने पर्यावरण-अनुकूल कपड़े से बनी हैं।
हर साल चमड़े के लिए मारे जाते हैं 1 अरब से ज़्यादा पशु
दुनियाभर में चमड़ा बनाने के लिए हर साल करीब 1 अरब पशुओं की जान ली जाती है। एक सामान्य कार का इंटीरियर तैयार करने के लिए तीन गायों या सांडों की खाल की ज़रूरत होती है।
भारत में चमड़ा उद्योग के लिए पशुओं को इतनी अधिक संख्या में ट्रकों में ठूंसा जाता है कि उनकी हड्डियाँ टूट जाती हैं। जो इस यातना भरी यात्रा में ज़िंदा बचते हैं, उन्हें दूसरे पशुओं के सामने बेरहमी से मारा जाता है, और कई बार तो उनके होश में रहते हुए ही उनके अंग काट दिए जाते हैं।
PETA UK की एक जांच में सामने आया कि दुनिया की सबसे बड़ी चमड़ा बनाने वाली कंपनी को खाल देने वाले सप्लायर्स बछड़ों के चेहरों पर गरम लोहे से दाग लगाते हैं, और गायों व सांडों को बिजली के झटके देकर और मारपीट करके मारा जाता है।
चमड़ा: एक पर्यावरणीय खतरा भी
चमड़ा बनाना जितना क्रूर है, उतना ही पर्यावरण के लिए नुकसानदायक भी है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, कपड़ों के लिए पशुओं को पालना और मारना दुनिया में कुल मानवीय ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का लगभग 20% कारण है। चूंकि गाड़ियों के लिए मोटी खालें इस्तेमाल होती हैं, इसलिए पशु-चमड़े से बने कार इंटीरियर का पर्यावरण पर असर, फैशन के लिए इस्तेमाल होने वाले चमड़े से भी ज़्यादा होता है। चमड़ा बनाने के लिए 170 से भी ज़्यादा तरह के खतरनाक रसायन (जैसे साइनाइड, क्रोमियम, कोल-टार आदि) इस्तेमाल होते हैं। ये मानव चर्मशाला श्रमिकों के लिए ज़हरीले होते हैं और नदियों और तालाबों को भी प्रदूषित करते हैं।
चर्मशालाओं में काम करने वालों को कैंसर, सांस की बीमारियाँ और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। हाल ही में पश्चिम बंगाल के कोलकाता लेदर कॉम्प्लेक्स में तीन सफाईकर्मियों की मौत हो गई, जब वे चमड़ा उद्योग से निकले ज़हरीले अपशिष्ट के संपर्क में आ गए। एक रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि पशु-चमड़े के कारण जंगलों की अवैध कटाई और जैव विविधता की भारी हानि हो रही है।
भारत में बन रहा है करुणामय और टिकाऊ वीगन चमड़ा
आज भारत में कई तरह के पर्यावरण-अनुकूल वीगन चमड़े के विकल्प मौजूद हैं, जैसे गन्ने के बगास और आम की गूदी से बना चमड़ा। PETA का “PETA-Approved Vegan” प्रमाणन उन हैंडबैग, जूतों, कपड़ों, फर्नीचर और सजावटी सामानों को दिया जाता है, जो पशु उत्पादों जैसे चमड़ा, रेशम, ऊन, फर या पंख के बिना बनाए जाते हैं। दुनिया भर में 1000 से भी अधिक कंपनियां अब “PETA-Approved Vegan” लोगो का इस्तेमाल करती हैं ताकि भारत और दुनिया भर के उपभोक्ता खरीदारी करते समय आसानी से पशु-मुक्त उत्पादों की पहचान कर सकें।
चमड़ा और अन्य पशु-उत्पादों से दूर रहना ही दयालु, सुरक्षित और टिकाऊ भविष्य की ओर सबसे अच्छा कदम है।
