तकनीक, जागरूकता और पशु मुक्ति: वीगन इंडिया कॉन्फ्रेंस 2026 में PETA इंडिया
करुणा, नवाचार और पशुओं के अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देने वाला वीगन इंडिया कॉन्फ्रेंस 2026 विचारों और प्रेरणा का एक जीवंत मंच था। देश के इस प्रमुख वीगन कार्यक्रम में PETA इंडिया ने तकनीक और पशु मुक्ति के मेल को प्रस्तुत किया। एआई-संचालित रोबोट, वर्चुअल रियलिटी अनुभव, अंडा और डेयरी उद्योग से जुड़ी जाँचों तथा विभिन्न अभियानों के माध्यम से PETA इंडिया ने दिखाया कि करुणा और प्रगति साथ-साथ चल सकती हैं।
कार्यक्रम में PETA इंडिया का एआई-संचालित रोबोट बछड़ा ‘जीव’ लोगों का खास आकर्षण रहा। जीव ने पशुओं के अनुकूल विकल्प अपनाने के महत्व पर जागरूकता बढ़ाई और चमड़ा उद्योग में होने वाली क्रूरता पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। लोगों के बीच घूमते हुए और उनसे बातचीत करते हुए वह एक सरल लेकिन सोचने पर मजबूर कर देने वाला सवाल पूछता था—“क्या आप मेरी माँ को पहन रहे हैं?”
इन संवादों ने लोगों को यह समझने के लिए प्रेरित किया कि चमड़े के उत्पादों के पीछे कैसी पीड़ा छिपी होती है। चमड़े के लिए गायों को उनके बच्चों से अलग किया जाता है, उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है और अंततः उनकी हत्या कर दी जाती है।
PETA इंडिया की वाइस प्रेसिडेंट (पॉलिसी) खुशबू गुप्ता ने अपने सत्र में बताया कि किस प्रकार तकनीकी प्रगति पशुओं के लिए सकारात्मक बदलाव ला रही है। उन्होंने समझाया कि PETA इंडिया का एआई-संचालित रोबोट बछड़ा ‘जीव’ और रोबोट बकरी ‘आवाज़’ चमड़ा और मांस उद्योग की सच्चाई लोगों तक पहुँचा रहे हैं तथा उन्हें करुणामय विकल्प चुनने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
खुशबू ने PETA इंडिया की अन्य तकनीक-आधारित पहलों के बारे में भी जानकारी दी। इनमें जीवित पशुओं के स्थान पर रोबोटिक पशुओं का उपयोग, मंदिरों में जीवित हाथियों की जगह मशीनी हाथियों का इस्तेमाल, पशु-परीक्षण के विकल्प के रूप में सिमुलेशन सॉफ्टवेयर, मुंबई की घोड़ा-गाड़ियों की जगह विरासत शैली की ई-गाड़ियाँ, तथा दिल्ली मशीनीकरण परियोजना के तहत घोड़ा या बैलगाड़ियों की जगह ई-रिक्शा शामिल हैं। उन्होंने PETA यूथ के वर्चुअल रियलिटी कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया, जिनका अनुभव छात्र कॉलेज उत्सवों और कार्यक्रमों में करते हैं। ये कार्यक्रम भूमिका परिवर्तन और एआई आधारित संवादों के माध्यम से पशुओं पर होने वाली क्रूरता को उजागर करते हैं। इसके अलावा, एशिया की पहली एनिमेट्रॉनिक हाथी ‘एली’, जिसे अभिनेत्री दिया मिर्जा ने अपनी आवाज़ दी है, स्कूलों में जाकर बच्चों को मनोरंजन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पशुओं के प्रति दया और संवेदनशीलता का संदेश देती है।
कार्यक्रम में PETA इंडिया के स्टॉल पर ‘सेव द बॉय चाइल्ड’ अभियान भी प्रदर्शित किया गया, जिसने आगंतुकों को वीगन बनने की प्रतिज्ञा लेने के लिए प्रेरित किया। वीडियो, बातचीत और जानकारीपूर्ण सामग्री के माध्यम से लोगों को अंडा और डेयरी उद्योग की उन सच्चाइयों से अवगत कराया गया, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। इसमें नर चूजों और नर बछड़ों की पीड़ा को उजागर किया गया, जिन्हें अक्सर केवल इसलिए मार दिया जाता है या त्याग दिया जाता है क्योंकि वे अंडे या दूध उत्पादन में उपयोगी नहीं माने जाते।
वीगन इंडिया कॉन्फ्रेंस 2026 में PETA यूथ का स्टॉल
वीगन इंडिया कॉन्फ्रेंस 2026 में PETA यूथ के ‘सेव द बॉय चाइल्ड’ स्टॉल पर PETA इंडिया की सीनियर मैनेजर (वीगन और कॉर्पोरेट प्रोजेक्ट्स) डॉ. किरण आहूजा, वीगन इंडिया कॉन्फ्रेंस की संस्थापक पलक मेहता, कर्नाटक की पूर्व विधायक एवं प्रतिष्ठित जनसेवा नेता सौम्या रेड्डी तथा PETA इंडिया की यूथ आउटरीच लीड नाज़िफ़ा अनवर।
आगंतुकों ने पशुओं के प्रति क्रूरता के लिए कड़ी सजा की मांग करने वाली PETA इंडिया की याचिका पर हस्ताक्षर किए और स्टिकर, बैज तथा रिस्टबैंड जैसे निःशुल्क प्रचार सामग्री भी प्राप्त की। इस तरह जागरूकता को पशुओं के समर्थन में वास्तविक कार्रवाई में बदला गया।
कार्यक्रम में PETA इंडिया की निदेशक पूर्वा जोशीपुरा की पुस्तक Survival at Stake: How Our Treatment of Animals Is Key to Human Existence भी उपलब्ध थी। यह पुस्तक बताती है कि पशुओं के प्रति दयालु व्यवहार किस प्रकार मनुष्यों, अन्य जीवों और पूरे ग्रह की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
भारत में वीगन आंदोलन लगातार बढ़ रहा है। अधिक लोग अपने रोज़मर्रा के विकल्पों पर सवाल उठा रहे हैं और करुणामय विकल्प चुनने के लिए आगे आ रहे हैं। जैसे-जैसे जागरूकता बढ़ रही है और यह समुदाय मजबूत हो रहा है, यह स्पष्ट हो रहा है कि जब लोग जानकारी प्राप्त करते हैं और सक्रिय रूप से जुड़ते हैं, तो पशुओं के लिए सार्थक बदलाव संभव हो जाता है।
प्रेरित महसूस कर रहे हैं ?
हमेशा क्रूरता-मुक्त उत्पाद चुनें!



