कोलकाता में घोड़ा गाड़ियों के लिए इस्तेमाल किए गए घायल और शोषित घोड़े को PETA इंडिया द्वारा बचाया गया

Posted on by Erika Goyal

CAPE फाउंडेशन द्वारा दायर की गई एक FIR के बाद, जिसमें विक्टोरियन शैली की गाड़ियों को खींचने और कोलकाता में शादियों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले घोड़े के प्रति गंभीर क्रूरता और शोषण को उजागर किया गया था, PETA इंडिया ने इस जानवर को बचाने के लिए तात्कालिक कार्यवाही करी जिससे मैदान से बहुत ही गंभीर हालत में रेस्क्यू किया गया। इस घोड़े के साथ हुए गहन शोषण के कई लक्षण प्रदर्शित हो रहे थे, जिसमें अनुपचारित घाव, सूजे हुए अंग और गंभीर कमजोरी शामिल हैं। अश्व विशेषज्ञों की राय के अनुसार, इस घोड़े के शरीर पर यह सड़ने वाले घाव संभवतः गलत फिटिंग वाली काठी के कारण हुए थे और सूजन और गंभीर चोटें कुपोषण एवं पानी की कमी के कारण बढ़ गई थीं। इनके अनुसार, इस घोड़े को तत्कालिक रूप से पशुचिकित्सकीय जांच की आवश्यकता है।

 

PETA इंडिया की मदद से घोड़े को भारतीय जीव-जन्तु कल्याण बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त संगठन ‘एनिमल राहत’ द्वारा प्रबंधित अभयारण्य में ले जाया गया है। यहाँ इस घोड़े को उसके दर्दनाक अनुभव से उबरने के लिए आवश्यक उपचार और देखभाल मिल सकेगी। इस पूरी प्रक्रिया में मैदान पुलिस का भारी सहयोग रहा, जिनकी मदद से इस घोड़े को तात्कालिक पशु चिकित्सकीय मदद मिल सकी।

PETA इंडिया ने कोलकाता में इन घोड़ों से जुड़ी कई सड़क दुर्घटनाओं की एक फैक्टशीट तैयार की है, जिसमें पर्यटकों को खींचने के लिए इनका इस्तेमाल करने के खतरों को दर्शाया गया है। इस तरह की दुर्घटनाओं से जानवरों को दर्द और पीड़ा होती है और यात्रियों के लिए सुरक्षा जोखिम पैदा होता है। इसके अलावा, गाड़ी की सवारी के लिए घायल और कुपोषित घोड़ों का उपयोग करना भारतीय दंड संहिता, 1860 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 का उल्लंघन करता है।

कोलकाता में पर्यटकों की गाड़ियों को खींचने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले घोड़ों की दुर्दशा देखने या उनकी स्थिति के बारे में सामग्री की समीक्षा करने के बाद, 150 से अधिक पशु चिकित्सकों ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक अपील भेजी, जिसमें अनुरोध किया गया कि उनकी सरकार जानवरों की खराब सेहत और बिगड़ती स्थिति को ध्यान में रखकर घोड़ागाड़ियों के इस्तेमाल पर रोक लगा दे।

PETA इंडिया द्वारा लंबे समय से इन गाड़ियों को मोटर चालित ई-गाड़ियों से बदलने की अपील की जा रही है और हमारे द्वारा घोड़ों के पुनर्वास में सहायता करने का प्रस्ताव भी दिया गया है। मुंबई में, इस प्रकार की घोड़ागाड़ियों को विंटेज शैली के गैर-पशु वाहनों से बदला गया है।

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