PETA इंडिया को मुंबई पुलिस द्वारा जब्त किए गए 11 पीड़ित घोड़ों का अस्थायी संरक्षण मिला

Posted on by Shreya Manocha

PETA इंडिया को हाल ही में भोईवाड़ा स्थित पांचवें अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) न्यायालय, गिरगांव स्थित 40वें प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) न्यायालय और मझगांव स्थित 69वें JMFC न्यायालय द्वारा 11 घोड़ों का अस्थायी संरक्षण प्रदान किया गया। ये घोड़े मुंबई पुलिस द्वारा अलग-अलग मामलों में जब्त किए गए थे, जिनमें अवैध घोड़ागाड़ी सवारी और गंभीर उपेक्षा जैसे पशु क्रूरता के मामले शामिल थे।

 

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PETA इंडिया ने गामदेवी, शिवाजी पार्क और सेवरी पुलिस थानों द्वारा ‘पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960’ की धारा 3 और 11 तथा अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत दर्ज FIR के बाद, इन पशुओं के अस्थायी संरक्षण के लिए आवेदन दायर किए थे।

 

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तीनों न्यायालयों ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत अधिसूचित पशु क्रूरता निवारण (केस संपत्ति पशुओं की देखभाल और रखरखाव) नियम, 2017 के अनुसार कार्य करते हुए, PETA इंडिया को घोड़ों का अस्थायी संरक्षण प्रदान किया। दो मामलों में, न्यायालयों ने आरोपी मालिकों द्वारा दायर संरक्षण आवेदन भी खारिज कर दिए।

PETA इंडिया की लीड क्रूअल्टी रिस्पॉन्स कॉर्डिनेटर, सलोनी सकारिया कहती हैं,
“PETA इंडिया उन सम्मानित न्यायाधीशों का दिल से धन्यवाद करता है, जिन्होंने इन घोड़ों की तकलीफ़ को समझा और यह आदेश दिया कि उन्हें दो अच्छी सैंक्चुरी सैंक्चुरी सैंक्चुरी सैंक्चुरी में भेजा जाए, जहाँ उनकी देखभाल और इलाज किया जाएगा। अब इन घोड़ों को घोड़ागाड़ी खींचने या क्रूरता झेलने की मजबूरी नहीं होगी। यह पीड़ित घोड़े अब ठीक होने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।”

मुंबई पुलिस को संदेह है कि बेहद खराब हालत में पाए गए इन घोड़ों का इस्तेमाल तथाकथित “मनोरंजन की सवारी” के लिए विक्टोरिया घोड़ागाड़ियों में किया जा रहा था। बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने 8 जून 2015 के ऐतिहासिक फैसले में न केवल मुंबई में घोड़ों से खिंचने वाली विक्टोरिया गाड़ियों को पूरी तरह अवैध घोषित किया था, बल्कि यह भी साफ कहा था कि मुंबई नगर निगम अधिनियम, 1888 के तहत शहर में किसी भी अधिकृत अस्तबल की अनुपस्थिति को देखते हुए, मुंबई की सीमा में घोड़े रखना भी कानून का उल्लंघन है। अदालत ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (MCGM) को ऐसे सभी अवैध ढाँचों को बंद करने और मुंबई पुलिस को इस प्रतिबंध को सख्ती से लागू करते हुए उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।

जुलाई 2017 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा घोड़ागाड़ी मालिकों और चालकों के लिए तैयार की गई पुनर्वास योजना को मंज़ूरी दी थी। इसके बाद, मई 2018 में PETA इंडिया ने महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्य सचिव को पत्र लिखकर अपील की थी कि यह योजना तुरंत लागू की जाए और राज्य सरकार की ओर से बृहन्मुंबई महानगरपालिका (MCGM) को इसके लिए जरूरी फंड उपलब्ध कराए जाएं। इस दौरान कई घोड़ागाड़ी चालकों ने धीरे-धीरे विरासत शैली की इलेक्ट्रिक गाड़ियों (ई-कारेज) का इस्तेमाल शुरू कर दिया था।

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