चेन्नई में जल संकट, PETA इंडिया का विज्ञापन अभियान वीगन बनने की सलाह देता है

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“मांस, अंडे व दूध के लिए पाले जाने वाले पशुओं पर दुनिया का एक तिहाई पानी खर्च होता है। कृपया वीगन बने” चेन्नई में बढ़ते जल संकट को देखते हुए PETA इंडिया ने चेन्नई में अपने नए विज्ञापन अभियान के माध्यम से यह संदेश दिया है जो कि अमेरिका के नेशनल एकेडमी ऑफ साईन्स की प्रतिष्ठित पत्रिका में प्रकाशित आंकड़ों पर आधारित है।

 

PETA India Chennai Hoarding Water Crisis

अंडा, मांस व डेयरी उत्पादों के लिए पाले जाने वाले पशुओं के चारे हेतु फसलों की पैदावार, जानवरों हेतु पेयजल, फार्म की साफ सफाई, ट्रांसपोर्ट तथा कत्लखानों की साफ सफाई पर प्रति वर्ष दुनिया के कुल पानी का बड़ा हिस्सा खर्च होता है। ‘वॉटर फुटप्रिंट’ नेटवर्क के अनुसार 1 किलोग्राम सब्जी के उत्पादन पर औसतन 322 लीटर पानी खर्च होता है लेकिन 1 लीटर गाय के दूध के लिए 1020 लीटर पानी खर्च करना पड़ता है जबकि एक किलोग्राम अंडों के उत्पादन हेतु 3265 लीटर पानी तथा 1 किलोग्राम मांस के लिए 15415 लीटर पानी खर्च होता है।

अंडा, मांस एवं डेयरी उद्योग संसार की कुल भूमि का एक तिहाई हिस्सा पशुओं को पालने एवं उनके लिए फसलें उगाने के लिए इस्तेमाल करता है व बाद में इन पशुओं को उनके मांस के लिए मार दिया जाता है। जबकि इस जगह का इस्तेमाल इन्सानों के लिए अनाज की पैदावार कर संसार से भुखमरी समाप्त की जा सकती है। मांस उद्योग हेतु विश्वभर में भारी मात्रा में परिवहन इस्तेमाल होने के कारण यह ग्रीनहाउस गैसे सर्जित करने के लिए भी जिम्मेदार है।

इसलिए पर्यावरण एवं पशु अनुकूल जीवनशैली अपनाने का सबसे बेहतरीन उपाय है कि आप वीगन बने।

 

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