तेलंगाना स्थित बीगल प्रजनन केंद्र और पशु-प्रयोगशाला पालामूर बायोसाइंसेज़ को अमेरिकी FDA की चेतावनी; PETA इंडिया ने PMO से तत्काल कार्रवाई की मांग की

Posted on by Surjeet Singh

PETA इंडिया यह खुलासा कर सकता है कि अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने हाल ही में तेलंगाना स्थित पशु-प्रयोग अनुबंध प्रयोगशाला और बीगल प्रजनन केंद्र पालामूर बायोसाइंसेज़ प्राइवेट लिमिटेड को एक सार्वजनिक चेतावनी पत्र (Warning Letter) जारी किया है। FDA ने संस्थान में गुड लेबोरेटरी प्रैक्टिस (GLP) नियमों के “गंभीर उल्लंघन” और निगरानी व्यवस्था में “व्यवस्थित विफलताओं” की ओर संकेत किया है, जिससे वहाँ तैयार किए गए सुरक्षा संबंधी आंकड़ों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। FDA ने पशु कल्याण से जुड़ी गंभीर चिंताओं का भी उल्लेख किया है, जो सात महीने पहले PETA इंडिया द्वारा व्हिसलब्लोअर्स से प्राप्त शिकायतों और साक्ष्यों के आधार पर उठाए गए मुद्दों तथा 17 जून 2025 को पशुओं पर प्रयोगों के नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण समिति (CCSEA) को सौंपी गई सरकारी जांच समिति की विस्तृत रिपोर्ट के निष्कर्षों की पुष्टि करते हैं। पालामूर बायोसाइंसेज़ में 1,200 से अधिक पशु जिनमें बीगल कुत्ते, बंदर, गाय, सूअर और अन्य प्रजातियाँ शामिल हैं, प्रयोगों के लिए रखे जाते हैं, जबकि कुत्तों का प्रजनन कर उन्हें अन्य प्रयोगशालाओं को भी बेचा जाता है।

इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय नियामकीय कार्रवाई के मद्देनज़र, PETA इंडिया ने इस सप्ताह प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। PETA ने न केवल पालामूर बायोसाइंसेज़ में लंबे समय से जारी नियम उल्लंघनों पर कार्रवाई की मांग की है, बल्कि भारत की वैधानिक पशु-प्रयोग नियामक संस्था CCSEA के कामकाज पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। CCSEA की कोर समिति में अधिकांश सदस्य स्वयं पशु-प्रयोग करने वाले या ऐसे संस्थानों से जुड़े हैं, जबकि उसका दायित्व यह सुनिश्चित करना है कि “पशुओं को उन पर किए जाने वाले प्रयोगों से पहले, उनके दौरान या उनके बाद अनावश्यक दर्द या पीड़ा का सामना न करना पड़े।”

11 दिसंबर 2025 को जारी यह चेतावनी पत्र उस एजेंसी के जैव-अनुसंधान निगरानी कार्यालय के विदेशी निरीक्षण दल द्वारा जनवरी 2025 में किए गए निरीक्षण तथा उसके बाद पालामूर बायोसाइंसेज़ द्वारा प्रस्तुत लिखित जवाबों के मूल्यांकन पर आधारित है। अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने इन जवाबों को “अपर्याप्त” पाया और कहा कि वे “यह आश्वासन देने में विफल रहे कि भविष्य में इसी प्रकार के उल्लंघन दोबारा नहीं होंगे”।अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने निष्कर्ष निकाला कि पालामूर बायोसाइंसेज़ ने “संघीय विनियम संहिता के शीर्षक 21 के भाग 58 का गंभीर उल्लंघन” किया है। एजेंसी ने कहा कि ये कमियाँ “अध्ययन निदेशक की निगरानी में प्रणालीगत विफलताओं को दर्शाती हैं … और परीक्षण सुविधा में एकत्र किए गए सुरक्षा संबंधी आँकड़ों की गुणवत्ता और अखंडता पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं।”

महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने कई गंभीर कमियों की पहचान की, जिनका पशुओं के कल्याण और जनस्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ सकता है। इनमें पशु-चिकित्सा रिकॉर्ड का अधूरा या उपलब्ध न होना, प्रक्रियाओं से पहले स्वास्थ्य जांच का रिकॉर्ड न रखना, इच्छामृत्यु देने के अनुचित और अमानवीय तरीके, पशुओं की बीट और कीटों की मौजूदगी जैसी अस्वच्छ परिस्थितियाँ, स्वीकृत प्रक्रियाओं का पालन न करना, तथा गुणवत्ता जांच इकाई द्वारा उल्लंघनों का पता लगाने या उनका रिकॉर्ड रखने में विफलता शामिल हैं। अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने चेतावनी दी कि पालामूर द्वारा प्रस्तुत अविश्वसनीय आँकड़े “जनस्वास्थ्य और सुरक्षा को जोखिम में डाल सकते हैं।”

ये निष्कर्ष CCSEA को 17 जून 2025 को सरकार द्वारा स्वयं नियुक्त एक बहु-विषयक समिति द्वारा प्रस्तुत विस्तृत निरीक्षण रिपोर्ट के निष्कर्षों की महत्वपूर्ण रूप से पुष्टि करते हैं, जिसमें “आगे की पीड़ा और कष्ट को रोकने के लिए तत्काल नियामक कार्रवाई… जिसमें पशुओं को हटाकर उनका पुनर्वास शामिल है” तथा पालामूर के पंजीकरण और प्रजनन लाइसेंस की समीक्षा की सिफारिश की गई थी। यह निरीक्षण PETA इंडिया  द्वारा 10 जून 2025 को CCSEA के समक्ष दायर एक शिकायत के बाद किया गया था, जिसमें व्हिसलब्लोअर्स द्वारा उपलब्ध कराए गए फोटो और वीडियो साक्ष्य शामिल थे, जो इस सुविधा में गंभीर क्रूरता को दर्शाते हैं। इन साक्ष्यों में खून के तालाबों में पड़े बीगल, घायल और मरते हुए बीगल, ऐसे सूअर जिन्हें इतना तीव्र जहर दिया गया कि उनका खून बहा रहा था, डरे सहमे जंगलों से पकड़े गए बंदर तथा अन्य प्रकार के दुर्व्यवहार शामिल थे। इसके बावजूद, अब तक कोई भी प्रभावी प्रवर्तन कार्रवाई नहीं की गई है, जबकि CCSEA द्वारा बाद में किए गए निरीक्षण सक्रिय पशु-प्रयोगकर्ताओं द्वारा किए गए, जिससे पक्षपात और नियामक कब्जे (regulatory capture) को लेकर गंभीर चिंताएँ उत्पन्न होती हैं। वास्तव में, पालामूर बायोसाइंसेज़ ने अब तक उन 73 बीगल्स को भी, जिन्हें वह प्रजनन या प्रयोगों में अब उपयोग नहीं कर रहा है, संस्था को सौंपने या उन्हें प्रेमपूर्ण घरों में गोद लेने की प्रक्रिया में मदद करने के लिए जारी करने से इनकार किया है। इसके बजाय, उन्हें जीवनभर पिंजरों में रखने को प्राथमिकता दी जा रही है, संभवतः इसलिए ताकि उनके मनोवैज्ञानिक और/या शारीरिक घाव छिपे रहें।

PETA इंडिया ने अपने पत्रों में कहा है कि FDA का हस्तक्षेप यह दिखाता है कि घरेलू निगरानी प्रणाली में हितों के टकराव के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इसके कारण पशुओं को लंबे समय तक दर्द और तनाव सहना पड़ा, जो डेटा तैयार हुआ वह विश्व स्तर की नियामक प्रक्रियाओं के लिए भरोसेमंद नहीं माना जा सकता, और भारत की अनुसंधान व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ा है। 17 जून 2025 की रिपोर्ट में जो स्पष्ट निष्कर्ष दिए गए थे, उन पर सख्त और समय पर कार्रवाई करने के बजाय CCSEA ने देरी की, कमजोर कार्रवाई की अनुमति दी और केवल औपचारिक अनुपालन पर ध्यान दिया। इसी वजह से कई अंतरराष्ट्रीय नियामकों को खुद कमियाँ उजागर करनी पड़ीं और वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य के हित में सार्वजनिक चेतावनियाँ जारी करनी पड़ीं।

चिंताजनक रूप से, FDA की चेतावनी केवल एक अकेला अंतरराष्ट्रीय संकेत नहीं है। मई 2024 में, अमेरिकी Environmental Protection Agency (EPA) ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि उसने डेटा में हेरफेर (falsification) के कारण पालामूर बायोसाइंसेज़ से आने वाले अध्ययनों को अस्थायी रूप से स्वीकार करना बंद कर दिया है। इसके बाद जून 2024 में Canadian Pest Management Regulatory Agency ने भी इसी मुद्दे पर नियामक कार्रवाई की। अब FDA की रिपोर्ट यह भी पुष्टि करती है कि एक लगातार पैटर्न देखा गया है: पालामूर बायोसाइंसेज़ अनुपालन (compliance) को केवल औपचारिकता मानकर न्यूनतम आवश्यक कदम उठाता है, ताकि उसका सामान्य व्यावसायिक संचालन चलता रहे, बजाय इसके कि वह पशुओं की सुरक्षा और वैज्ञानिक निष्पक्षता (scientific integrity) सुनिश्चित करने की अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाए।

PETA India ने अपने पत्रों में CCSEA Core Committee की संरचना पर सवाल उठाए हैं, यह बताते हुए कि इसमें मुख्य रूप से ऐसे प्रतिनिधि शामिल हैं जो पशु-प्रयोग (animal experimentation) से जुड़े संस्थानों से आते हैं। हाल ही में मंत्रालय द्वारा किए गए बदलावों में भी एक वरिष्ठ पशु-प्रयोगकर्ता को उसी क्षेत्र के दूसरे व्यक्ति से बदल दिया गया है, जिससे वही मूल हितों का टकराव (conflict of interest) बना रहता है। यह स्थिति पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 15 के उस प्रावधान से मेल नहीं खाती, जिसमें समिति का मुख्य ध्यान पशु कल्याण पर होना चाहिए।

हमने सरकार से आग्रह किया है कि CCSEA Core Committee की संरचना की तुरंत समीक्षा की जाए, पशु-कल्याण पर केंद्रित और निष्पक्ष निरीक्षण सुनिश्चित किए जाएँ, तथा 17 जून 2025 को CCSEA को प्रस्तुत निरीक्षण रिपोर्ट पर तत्काल कार्रवाई की जाए, जिसे अब FDA द्वारा भी स्वतंत्र रूप से समर्थन मिला है। यदि समय पर और निर्णायक सुधार नहीं किए गए, तो PETA इंडिया का कहना है कि इससे भारत में पशुओं को लगातार पीड़ा, वैज्ञानिक डेटा की विश्वसनीयता पर सवाल, और वैश्विक रेग्युलेटरी प्रणाली में देश की प्रतिष्ठा को नुकसान हो सकता है।

अभी कार्यवाई करें