23 जुलाई 2025 तक का अपडेट
PETA इंडिया ने दिल्ली उच्च न्यायालय में पशुओं पर प्रयोगों के नियंत्रण और पर्यवेक्षण हेतु समिति (CCSEA) द्वारा एक वैज्ञानिक की अनुशंसा पर कड़ी आपत्ति दर्ज करवाई है। समिति द्वारा पलामुर बायोसाइंसेज में क्रूरता की जांच के लिए जिन वैज्ञानिक की अनुशंसा की गई है, वे स्वयं उस प्रयोगशाला से संबंधित हैं जिस पर पहले ही पशुओं के साथ क्रूरता करने के आरोप लग चुके हैं।

इसके अतिरिक्त, PETA इंडिया ने अदालत से कम से कम यह आदेश देने का अनुरोध किया है कि पलामुर बायोसाइंसेज द्वारा पुनर्वास के लिए चिन्हित किए गए 73 बीगल कुत्तों को—जो अब भी उस संस्थान में पिंजरों में बंद हैं—प्रसिद्ध और भरोसेमंद एनजीओ को सौंपा जाए, जो उनकी देखभाल करने और उन्हें गोद देने के लिए तैयार हैं।

10 जुलाई 2025 तक का अपडेट
PETA इंडिया द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की पीठ ने सरकार की संस्था CCSEA को पलामुर बायोसाइंसेज प्रा. लि. के विरुद्ध अंतरिम राहत उपाय अपनाने का निर्देश दिया है। यह आदेश 17 जून 2025 को CCSEA को सौंपी गई निरीक्षण रिपोर्ट में सामने आए आपत्तिजनक निष्कर्षों और सिफारिशों के आधार पर दिया गया है — विशेष रूप से पशुओं के रखरखाव, आवास, मृत्यु-दया (euthanasia) के तौर-तरीकों और पशु चिकित्सा देखभाल से संबंधित पहलुओं पर।

CCSEA द्वारा नियुक्त समिति द्वारा तैयार की गई इस निरीक्षण रिपोर्ट में संस्थान को पशुओं की प्रजनन और उन पर प्रयोग करने की अनुमति की तत्काल समीक्षा करने और वहाँ रखे गए सभी 1200+ पशुओं के पुनर्वास की सिफारिश की गई है।

अदालत ने पलामुर बायोसाइंसेज को किसी भी नए पशु की खरीद या आवास देने से भी रोक दिया है। इसके अलावा, अदालत ने अगले एक सप्ताह के भीतर इस संस्थान का नया निरीक्षण कराए जाने का निर्देश दिया है और CCSEA को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि रिपोर्ट में पहचाने गए सभी चिंताजनक पहलुओं का समाधान किया जाए। CCSEA को दो सप्ताह के भीतर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया गया है।

17 जून 2025 तक का अपडेट

पहली ऐतिहासिक घटना: PETA इंडिया की शिकायत के बाद, तेलंगाना स्थित पशु प्रयोग प्रयोगशाला – पलामुर बायोसाइंसेज के खिलाफ पशु दुर्व्यवहार के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है – जिसमें कुत्तों को गंभीर चोटें पहुँचाना और सूअर के बच्चों को ज़हर देना शामिल है। यह पहली बार है जब भारत में किसी पशु प्रयोग प्रयोगशाला के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

तेलंगाना की Palamur Biosciences Pvt. Ltd.—जो दवाओं, कीटनाशकों और मेडिकल डिवाइसेज़ की टेस्टिंग के लिए जानवरों का इस्तेमाल करती है—उसकी चारदीवारी के पीछे हैरान कर देने वाली क्रूरता छुपी हुई है। यह लैब खुद को भारत की सबसे बड़ी प्रीक्लीनिकल सर्विस देने वाली कंपनी बताती है, लेकिन PETA India के खुलासे ने इसके असली चेहरे को सामने ला दिया है। व्हिसलब्लोअर्स की मदद से PETA India ने इस गुप्त और छुपी हुई दुनिया के अंदर झांकने का मौका दिया है—जहां खून से लथपथ बीगल ज़मीन पर पड़े हैं, मिनीपिग्स को ज़हर दिया जा रहा है, और रीसस बंदरों को मारा जा रहा है।

अक्टूबर 2024 में, PETA India ने Palamur Biosciences के खिलाफ भारतीय प्रजाति के बंदर रीसस मकाक पर संभवतः अवैध परीक्षण को लेकर शिकायत दर्ज करवाई थी। लेकिन उसके बाद जो सामने आया, वह और भी डरावना था—सूत्रों ने जो अंदरूनी जानकारी दी, फोटो और वीडियो शेयर किए। जो पशुओं पर हो रही पीड़ा सामने आई, वो न सिर्फ़ अमानवीय थी बल्कि कानूनी अपराध जैसी लगती है।

ज्यादा कुत्ते, कम जगह—कोई राहत नहीं

Palamur बीगल कुत्तों को भी ब्रीड करता है। सूत्रों का कहना है कि वहां लगभग 1500 कुत्तों को बेहद तंग पिंजरों में ठूंसा गया है, जहां कई कुत्ते ऐसे छोटे पिंजरे में रहते हैं जो सिर्फ़ दो के लिए बने हैं। उन्हें न खेलने का मौका मिलता है, न एक-दूसरे से घुलने-मिलने का। इस तनाव में वे आक्रामक हो जाते हैं और खाने के लिए लड़ते हैं—जिसके चलते कई बार वे एक-दूसरे को काटते हैं। परिणाम? फटे हुए कान, खून से लथपथ शरीर—और किसी भी तरह की दर्द से राहत नहीं।

"काम के नहीं" तो मार दो

एक सूत्र ने बताया कि अगर किसी बीगल को “चेरी आई” या “फंगल इन्फेक्शन ” जैसी इलाज योग्य बीमारी हो, तो भी उसे मरीज नहीं बल्कि बोझ समझा जाता है और उसका इलाज करने की बजाय उसे मार दिया जाता है। एक घटना में 100 से ज्यादा कुत्तों को सिर्फ इसलिए मार दिया गया क्योंकि वे अब “काम के नहीं” थे।

जंगल से उठाए गए बंदर—और मौत

Palamur पर राजस्थान से अवैध रूप से भारतीय प्रजाति के बंदर (रीसस मकाक) को लाने का भी आरोप है—वो भी एक संदिग्ध डीलर के ज़रिए। कुछ बंदरों में मंकीपॉक्स जैसे वायरस की आशंका थी। लेकिन अधिकारियों को सूचित करने के बजाय, उन्हें चुपचाप मार दिया गया ताकि बात बाहर न जाए। जिन बंदरों को वायरस नहीं था, उन्हें भी जल्दबाज़ी में फिर से टेस्ट करके प्रयोगों में झोंक दिया गया। अगर उनमें छिपा हुआ वायरस था, तो नतीजे पूरी तरह गलत हो सकते थे।

सुअर के नवजात बच्चों को भी नहीं बक्शा गया और मार दिया

एक जानकार ने बताया कि Palamur को सुअर का प्रजनन करने का लाइसेंस ही नहीं है। लेकिन जब एक मादा सुअर ने बच्चों को जन्म दिया, तो सभी बच्चों को मार दिया गया। ये बेहद समझदार पशु बिना किसी मानसिक या शारीरिक राहत के पिंजरों में बंद रहते हैं। कागज़ों पर नियम लिखे हुए हैं कि इन्हें खेलने और सामाजिक गतिविधियों के लिए समय और साधन दिए जाएंगे, लेकिन असलियत में उन्हें सिर्फ टेस्टिंग या विज़िटर्स को दिखाने के लिए पिंजरे से बाहर निकाला जाता है—बाकी समय उन्हें पिंजरों में ही रखा जाता है।

पशुओं पर टेस्टिंग कैसी दिखती है Palamur में:

  • कुत्तों की स्किन के नीचे कैमिकल इंजेक्ट किया जाता है, जिससे बड़े फोड़े और इंफेक्शन होते हैं—इतने गंभीर कि कई बार कुत्ते हिल भी नहीं पाते।
  • ज़बरदस्ती दवाएं खिलाई जाती हैं—जिससे उनके मुँह में ज़ख्म, वजन कम होना और दर्दनाक मौत होती है।
  • फटे ज़ख्म, बिना इलाज के दर्द, और ज़रा भी दया नहीं।
    एक सूत्र ने साफ कहा: “ये जगह नरक जैसी है।”

यह लापरवाही नहीं एक आदत है

कर्मचारी कुत्तों को लात मारते हैं, पिंजरे बंद करते वक्त उनके पैर या पूंछ कुचल देते हैं, और इतना बुरा बर्ताव करते हैं कि कभी-कभी उनकी हड्डियाँ तक टूट जाती हैं। कैमरे में बीगल दर्द में रोते दिखे, जैसे रहम की भीख मांग रहे हों। एक कर्मचारी ने कबूल किया:

“अगर कस्टमर या सीनियर न हों, तो हम नियम नहीं मानते।”
एक और ने कहा: “यहां सब कुछ करप्ट है।”

आखिरी पल: डरे हुए, जागते हुए, और अकेले

जब कुत्तों को मारा जाता है, तो thiopentone नाम की दवा दी जाती है—लेकिन बिना उन्हें बेहोश किए। सुअर के बच्चों के दिल में सीधी सुई मारकर उन्हें मार दिया गया।

अपने अंतिम व्यक्त में उन्होंने सिर्फ दर्द और डर महसूस किया, आराम नहीं।

जो कभी नहीं दिखाना चाहते थे—उसी का पर्दा फ़ाश हो गया

PETA India ने Palamur के अंदर से आई फोटो और वीडियो फाइल्स की समीक्षा की, जिसमें दिखा:

एक कुत्ता जिसकी गर्दन पर फोड़ा है—बिलकुल इलाज नहीं

 

पिंजरों के अंदर आपसी लड़ाई में ज़ख्मी बीगल्स, जिन पर अधूरा टांका लगा है
मुंह खोलने वाले रॉड से घायल सूअर

खून से सना कुत्ता

 

सुअर के वह छोटे बच्चे जिन्हें पैदा होने कुछ समय बाद ही मार दिया गया।

अब इन्हें और नजरंदाज करने का वक्त नहीं है

ये सिर्फ Palamur की कहानी नहीं है, ये उस पूरी सिस्टम की झलक है जहां पशुओं को प्रयोग के नाम पर दर्द दिया जाता है, और फिर फेंक दिया जाता है। Palamur Biosciences को जवाबदेह ठहराया जाना ज़रूरी है।

PETA India की मांग: PETA ने सा अधिकारियों को एक शिकायत दर्ज कर मांग की है-

Palamur में सभी पशुओं पर हो रहे परीक्षणों को हमेशा के लिए बंद किया जाए

उनके पास मौजूद सभी जानवरों को तुरंत छुड़ाया और रिहैबिलिटेट किया जाए

जिम्मेदार लोगों पर कानूनी कार्यवाही हो

पशु अधिकार कानूनों का सख्ती से पालन करवाया जाए

विज्ञान में पशु-मुक्त विकल्पों को अपनाया जाए

आप इस क्रूरता को रोकने में मदद कर सकते हैं

अपनी आवाज़ उठाएं। इन पशुओं के लिए न्याय की मांग करें। हमारी याचिका पर हस्ताक्षर करें और पलामूर बायोसाइंसेज में हो रही क्रूरता को रोकने में मदद करें।

अपील

माननीय अध्यक्ष, सीसीएसईए,
पलामूर बायोसाइंसेज में पशुओं के प्रति घोर क्रूरता और नियमों के उल्लंघन की खबरें बेहद विचलित करने वाली हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि यह एक ऐसी जगह है जहाँ खून से लथपथ बीगल ज़मीन पर पड़े होते हैं, मिनीपिग्स को ज़हर दिया जाता है, और रीसस बंदरों को मार दिया जाता है — जहाँ बेरुख़ी और लापरवाही का माहौल बना हुआ है।

मैं आपसे आग्रह करता/करती हूँ कि केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त निरीक्षण समिति की विस्फोटक रिपोर्ट पर तुरंत और सख्त कार्रवाई की जाए। इस रिपोर्ट में ‘तत्काल नियामक कार्रवाई… जिसमें पशुओं को हटाना और पुनर्वास करना शामिल है, ताकि उन्हें और कष्ट से बचाया जा सके’ की सिफारिश की गई है, साथ ही पलामुर बायोसाइंसेज की रजिस्ट्रेशन और ब्रीडिंग लाइसेंस की स्थिति की समीक्षा की मांग की गई है।

कृपया पलामूर बायोसाइंसेज में सभी पशु परीक्षण परियोजनाओं को स्थायी रूप से बंद करवाएं और वहाँ मौजूद पशुओं को बचाकर प्यार भरे घरों और भरोसेमंद सैंक्चुरी में भेजने की अनुमति दें। कृपया इस प्रयोगशाला की पशु प्रजनन और उपयोग की अनुमति को रद्द करें।

इस बेहद गंभीर विषय पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद।

सादर,


तत्काल कार्रवाई की जरूरत है : पालामूर बायोसाइंसेज में कुत्तों, बंदरों और अन्य पशुओं पर परीक्षणों के नाम पर भयंकर अत्याचार हो रहा है, उन्हें आपकी मदद की ज़रूरत है

लक्ष्य +
  • Dr. Abhijit Mitra
बोल्ड लैटर में लिखे स्थानों को भरना अनिवार्य है।
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