उनके हाथ खून से सने हैं: PETA इंडिया के बीगल्स ने पालामूर बायोसायंसेस में बंद 1,200 से ज़्यादा कुत्तों और अन्य पशुओं को तुरंत बचाने के लिए पुकार लगाई
व्हिसलब्लोअर (अंदरूनी सूचना देने वाले व्यक्ति) से मिली जानकारी की मदद से PETA इंडिया द्वारा किए गए एक बड़े खुलासे में यह सामने आया कि तेलंगाना स्थित पालामूर बायोसायंसेस में कुत्तों, बंदरों और अन्य पशुओं के साथ बेहद क्रूर व्यवहार किया जा रहा है। इसके बाद 28 नवंबर 2025 को PETA इंडिया के समर्थक जिनमें Glendale International School, Vegans of Telangana और Deven’s Hope Society के सदस्य शामिल थे, बीगल कुत्तों के मास्क पहनकर और खून से सने’हाथ दिखाते हुए “CCSEA” (Committee for the Control and Supervision of Experiments on Animals) से अपील करी कि वे पालामूर बायोसायंसेस में बंद 1200+ बीगल्स, बंदरों, गायों, सूअरों और अन्य पशुओं को तुरंत बचाने की प्रक्रिया शुरू करें। 17 जून को CCSEA द्वारा नियुक्त निरीक्षकों की विस्तृत रिपोर्ट में भी इन 1200+ पशुओं को बचाने की सिफारिश स्पष्ट रूप से की गई है।
पालामूर बायोसायंसेस में बंद पशुओं में 73 बीगल भी हैं, जिन्हें इस केंद्र ने खुद “पुनर्वास” (rehabilitation) के लिए चिन्हित किया है, यानी अब उन्हें प्रजनन या प्रयोगों में नहीं इस्तेमाल किया जाना चाहिए। फिर भी CCSEA ने अब तक इनके बचाव का आदेश नहीं दिया है, और पालामूर बायोसायंसेस इन्हें छोड़ने से मना कर रहा है, जबकि कई NGO इन कुत्तों को सुरक्षित रखने, देखभाल करने और गोद दिलाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
पालामूर बायोसायंसेस में इलाज योग्य बीमारियों वाले कुत्तों को मार दिया जाता है, जंगल से पकड़कर लाए गए जंगली बंदरों पर प्रयोग किए जाते हैं, और सूअरों को ज़हर दिया जाता है। PETA इंडिया CCSEA से इस भयावह जगह को बंद करने और यहां बचे हुए पशुओं को तुरंत बचाने की मांग कर रहा है।
17 जून को एजेंसी को सौंपी गई CCSEA नियुक्त निरीक्षकों की रिपोर्ट में बताया गया कि इस सुविधा (फैसिलिटी) में CCSEA द्वारा अनुमोदित संख्या से कहीं अधिक कुत्तों को बंद करके रखा गया था और उनके पास किसी भी पशु की सही सूची (इन्वेंट्री) भी नहीं थी। रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि पशुओं को बार-बार दर्दनाक प्रयोगों में इस्तेमाल किया जा रहा था, जो CCSEA के नियमों का साफ उल्लंघन है। कुत्ते, मिनीपिग और गायें बहुत खराब अवस्था में मिलीं, फिर भी पालमूर उपयुक्त मेडिकल रिकॉर्ड दिखाने में असमर्थ था। पशुओं पर पर्याप्त दर्द-नियंत्रण के बिना प्रयोग किए जा रहे थे और उन्हें बिना बेहोश किए मार दिया जाता था। रिपोर्ट में कई अन्य प्रकार की क्रूरता और कुप्रबंधन भी दर्ज किया गया। अंत में रिपोर्ट कहती है कि “PBPL (पालामूर बायोसाइंसेज़) में देखी गई कमियाँ अलग-थलग घटनाएँ नहीं हैं बल्कि यह गहरी संरचनात्मक, प्रक्रियात्मक और नैतिक असफलताओं का संकेत देती हैं। निरीक्षण के दौरान दर्ज की गई नियम-उल्लंघन की गंभीरता और व्यापकता से यह स्पष्ट होता है कि यह सुविधा पशु कल्याण और नियामक मानकों का पालन सही तरीके से नहीं कर रही है।
पालामूर में बंद एवं शोषण का शिकार पशुओं को आपकी मदद की जरूरत है


