PETA इंडिया चिकित्सा उत्पादों के परीक्षण के लिए गैर-पशु आधारित परीक्षण विधियों को आगे बढ़ा रहा है।

Posted on by Surjeet Singh

मर्क (Merck) द्वारा आयोजित लाइफ साइंस रेगुलेटरी समिट 2026 में, PETA इंडिया के एक वैज्ञानिक ने बताया कि बिना किसी पशु को नुकसान पहुंचाए या मारे, चिकित्सा उत्पादों में पाइरोजेन (Pyrogens) की जांच के लिए इंसानों पर आधारित आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है। इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य और विज्ञान क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने अपने अनुभव और महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। इसमें अमेरिका, यूरोप और एशिया के नियामक विशेषज्ञों और उद्योग जगत के कई पेशेवरों ने भाग लिया।

पाइरोजेन टेस्टिंग (Pyrogen Testing) क्या है?

कई चिकित्सा उत्पादों, जैसे दवाइयों, बायोलॉजिक्स (जैविक दवाओं), वैक्सीन और मेडिकल डिवाइसेज़ को बाजार में लाने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी होता है कि उनमें पाइरोजेन (Pyrogens) नामक बुखार पैदा करने वाले हानिकारक पदार्थ मौजूद न हों। हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) इन पदार्थों के प्रति बहुत संवेदनशील होती है, इसलिए अगर पाइरोजेन से दूषित कोई चिकित्सा उत्पाद शरीर में इंजेक्ट किया जाए या लगाया जाए, तो यह गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है।

पाइरोजेन की जांच के लिए किए जाने वाले कुछ पारंपरिक परीक्षणों में खरगोशों का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें खरगोशों को दवाएं या अन्य पदार्थ इंजेक्ट किए जाते हैं और उन्हें रोककर रखा जाता है, जबकि उनके शरीर के तापमान में होने वाले बदलावों की निगरानी की जाती है। एक अन्य परीक्षण में हॉर्सशू क्रैब (एक प्रकार का समुद्री जीव) को पकड़ा जाता है और उसके कुल रक्त का लगभग 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा निकाला जाता है। यदि वे इस प्रक्रिया के बाद जीवित बचते हैं, तो उन्हें वापस समुद्र में छोड़ दिया जाता है।

इन दोनों तरीकों में कई गंभीर चुनौतियां हैं। इनमें पशुओं के इस्तेमाल से जुड़ी नैतिक चिंताएं, बार-बार एक जैसे परिणाम न मिलना, सभी प्रकार के पाइरोजेन की पहचान करने में सीमाएं और हॉर्सशू क्रैब (एक प्रकार के समुद्री जीव) की आबादी पर पड़ने वाला सीधा खतरा शामिल हैं। इनकी सबसे बड़ी कमियों में से एक यह है कि खरगोश, हॉर्सशू क्रैब और इंसान सभी प्रकार के पाइरोजेन के प्रति अलग-अलग प्रतिक्रिया देते हैं। पशु-आधारित परीक्षणों की इसी अनिश्चितता के कारण वैज्ञानिक अब ऐसे पाइरोजेन परीक्षण तरीकों को अपना रहे हैं जिनमें पशुओं का इस्तेमाल नहीं होता। ये नए तरीके अधिक व्यापक जांच और ज्यादा भरोसेमंद परिणाम देने में सक्षम हैं।

खतरनाक दूषित पदार्थों की पहचान का बेहतर तरीका

इंसानों में पाइरोजेन (Pyrogens) के प्रभाव को सबसे सटीक तरीके से समझने के लिए ऐसे परीक्षणों का उपयोग करना बेहतर होता है, जो इंसानी शरीर की प्रतिक्रिया की नकल कर सकें। बिना पशुओं के किए जाने वाले पाइरोजेन टेस्ट अधिक भरोसेमंद होते हैं और कम समय में कई तरह के पाइरोजेन की पहचान कर सकते हैं।

समिट में, PETA इंडिया ने मोनोसाइट एक्टिवेशन टेस्ट (Monocyte Activation Test – MAT) के बारे में जानकारी साझा की। इस परीक्षण में दान किए गए मानव रक्त से प्राप्त कोशिकाओं का उपयोग किया जाता है। जब इन कोशिकाओं को किसी जांच किए जा रहे पदार्थ के संपर्क में लाया जाता है, तो यह देखा जाता है कि मानव प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) किस तरह प्रतिक्रिया करती है। इससे पाइरोजेन की मौजूदगी का पता लगाया जा सकता है।

भारत में पाइरोजेन टेस्टिंग में पशुओं के इस्तेमाल को कम करने की दिशा में कदम

दुनिया भर की नियामक संस्थाएं, जैसे यूरोपियन फार्माकोपिया कमीशन (European Pharmacopoeia Commission) और अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (U.S. Food and Drug Administration – FDA), अपने दिशानिर्देशों में पाइरोजेन की जांच के लिए मोनोसाइट एक्टिवेशन टेस्ट (MAT) को एक प्रभावी विकल्प के रूप में मान्यता दे चुकी हैं।

पिछले कई वर्षों से, PETA इंडिया भारत में पाइरोजेन टेस्टिंग के लिए पशुओं के बजाय आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने की दिशा में काम कर रहा है। समिट में PETA इंडिया ने अपने प्रयासों के बारे में बताया, जिनका उद्देश्य राष्ट्रीय परीक्षण दिशानिर्देशों में पशु-मुक्त (animal-free) तरीकों को शामिल करने में मदद करना है। संगठन ने इस बात पर भी जोर दिया कि वास्तविक बदलाव के लिए नियामकों, वैज्ञानिकों और उद्योग जगत के विशेषज्ञों के बीच वैज्ञानिक चर्चा और सहयोग जरूरी है।

हाल ही में, PETA इंडिया ने एक बैठक का नेतृत्व किया, जिसमें वैज्ञानिकों, नियामकों और उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने मिलकर इस बात पर चर्चा की कि भारत में पशु-मुक्त पाइरोजेन टेस्टिंग को कैसे आगे बढ़ाया जा सकता है। यह इस दिशा में सिर्फ शुरुआत है। सहयोग के माध्यम से PETA इंडिया ऐसे भविष्य के लिए प्रयास जारी रखेगा, जहां पशु-मुक्त पाइरोजेन टेस्टिंग सबसे भरोसेमंद और मानक तरीका बन सके।

विज्ञान के लिए पशु-मुक्त भविष्य बनाने में सहयोग करें

विज्ञान के लिए बेहतर यही है कि पशुओं के इस्तेमाल को पीछे छोड़कर ऐसे भरोसेमंद और इंसानों से जुड़े आधुनिक तरीकों को अपनाया जाए, जो अधिक प्रभावी और प्रासंगिक हों। आइए, इस संदेश को आगे बढ़ाने में सहयोग करें!

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