बाराबंकी: सोते हुए कुत्ते के सिर पर सीमेंट का भारी ब्लॉक मारकर किया हमला; दूसरे कुत्ते और गायें मदद के लिए आगे आईं- PETA इंडिया की शिकायत के बाद FIR दर्ज
एक चिंतित नागरिक द्वारा PETA इंडिया के साथ साझा किए गए CCTV फुटेज में एक व्यक्ति द्वारा सो रहे एक सामुदायिक कुत्ते के सिर पर सीमेंट का भारी ब्लॉक मारते हुए देखा गया। आरोपी की पहचान मनोज सोनी के रूप में हुई है। हमले में कुत्ते का सिर बुरी तरह कुचल गया। वह बेहोश होकर सड़क पर गिर पड़ा और उसे कई गंभीर चोटें आईं। स्थानीय सामुदायिक पशु देखभालकर्ताओं ने कुत्ते के इलाज की व्यवस्था की। उसका उपचार अभी जारी है और वह धीरे-धीरे स्वस्थ हो रहा है। बाराबंकी के पुलिस अधीक्षक के सहयोग से इस मामले में प्राथमिकी सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की गई। CCTV फुटेज में अन्य कुत्तों और गायों को घायल कुत्ते की मदद करने की कोशिश करते हुए भी देखा जा सकता है।
यह घटना 6 अक्टूबर को बाराबंकी स्थित सिंचाई विभाग कॉलोनी में हुई। घटना के CCTV फुटेज के आधार पर कोतवाली पुलिस थाने में आरोपी मनोज सोनी के खिलाफ FIR दर्ज की गई। यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 325 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (PCA Act), 1960 की धारा 11(1)(a) के तहत दर्ज की गई है। BNS, 2023 की धारा 325 के तहत किसी भी जानवर को अपंग बनाना या उसकी हत्या करना संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। इस अपराध के लिए अधिकतम पांच वर्ष तक की कैद, जुर्माना या दोनों की सज़ा का प्रावधान है।
PETA इंडिया की सिफ़ारिश है कि पशुओं के साथ क्रूरता करने वाले लोगों की मनोचिकित्सकीय जाँच कराई जाए और उन्हें परामर्श (काउंसलिंग) दिया जाए, क्योंकि पशुओं के साथ दुर्व्यवहार करना गहरे मनोवैज्ञानिक विकार का संकेत हो सकता है। शोध बताते हैं कि पशुओं के साथ क्रूरता करने वाले लोग अक्सर बार-बार ऐसे अपराध करते हैं और आगे चलकर अन्य पशुओं, यहाँ तक कि इंसानों को भी नुकसान पहुँचा सकते हैं। Forensic Research & Criminology International Journal में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, “पशुओं के साथ क्रूरता करने वाले लोगों द्वारा हत्या, बलात्कार, लूटपाट, मारपीट, उत्पीड़न, धमकी देने और नशीले पदार्थों के सेवन सहित अन्य अपराध किए जाने की संभावना तीन गुना अधिक थी।”
PETA इंडिया इस सिद्धांत के तहत काम करता है कि “पशु किसी भी तरह से हमारा दुर्व्यवहार सहने के लिए नहीं हैं, प्रजातिवाद (Speciesism) यानी मनुष्यों को अन्य प्रजातियों से श्रेष्ठ मानने वाली सोच का विरोध करता है। PETA लंबे समय से पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 को और सशक्त बनाने के लिए अभियान चला रहा है। इस अधिनियम में अब भी पुराने और अपर्याप्त दंड का प्रावधान है। उदाहरण के लिए, पहली बार दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति पर अधिकतम केवल 50 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है (हालाँकि BNS, 2023 के तहत अधिक कठोर सज़ा का प्रावधान है)। PCA Act में संशोधन को लेकर केंद्र सरकार को भेजे गए अपने प्रस्ताव में PETA इंडिया ने पशुओं के साथ क्रूरता करने वालों के लिए दंड में उल्लेखनीय वृद्धि करने की सिफ़ारिश की है।
