33 साल तक जंजीरों में और अकेले रहने के बाद, जैन मठ से छुड़ाई गई पीड़ित हथिनी महादेवी PETA इंडिया की कार्यवाही के बाद अपने नए सुरक्षित घर पहुँची
स्वस्तिश्री जिंसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी संस्थान मठ (करवीर), नंदनी गांव में 33 वर्षों तक ज़ंजीरों में अकेली रहने को मजबूर की गई 36 वर्षीय हथिनी महादेवी (जिसे माधुरी भी कहा जाता है) अब अंततः वंतारा के राधे कृष्ण टेम्पल एलिफ़ेंट वेलफेयर ट्रस्ट (जामनगर) के पुनर्वास केंद्र में अपने नए जीवन की शुरुआत कर चुकी है। यह राहतपूर्ण स्थानांतरण माननीय बॉम्बे हाईकोर्ट और फिर माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों के पालन में हुआ, जो महादेवी की गंभीर शारीरिक और मानसिक पीड़ा को देखते हुए किया गया था। 2017 में महादेवी ने पीड़ा और तनाव के चलते मंदिर के मुख्य पुजारी को कई बार दीवार पर पटककर मार डाला था। हालांकि अदालत का आदेश स्पष्ट था, लेकिन जैन मठ द्वारा हथिनी को शांतिपूर्वक सौंपने से इनकार करने के कारण, कुछ स्थानीय लोगों को उकसाया गया और उन्होंने पुलिस, PETA इंडिया और RKTEWT के कर्मचारियों पर सैकड़ों पत्थर फेंके। इस हमले में गाड़ियों की खिड़कियाँ टूट गईं, कई लोग घायल हुए और PETA इंडिया के एक स्टाफ सदस्य की पसली टूट गई।
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16 जुलाई 2025 को माननीय बॉम्बे हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि महादेवी को जामनगर स्थित वंतारा के राधे कृष्ण टेम्पल एलिफ़ेंट वेलफेयर ट्रस्ट में पुनर्वासित किया जाए। यह आदेश PETA इंडिया द्वारा महाराष्ट्र वन विभाग और सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई पावर्ड कमेटी (HPC) के सामने महादेवी की बिगड़ती शारीरिक और मानसिक हालत को लेकर उठाए गए मुद्दों के बाद दिया गया था। इस आदेश को 28 जुलाई 2025 को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी पूरी तरह से सही ठहराया।
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश उस अपील पर आया था, जो जैन मठ ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए दायर की थी। मठ यह चाहता था कि वह हथिनी को अपने पास ही रखे, जबकि महादेवी गठिया और अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रही है, जो ज़्यादातर समय कंक्रीट फर्श पर बंधे रहने के कारण हुई थीं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने महादेवी के कल्याण को प्राथमिकता देते हुए मठ की अपील को खारिज कर दिया और निर्देश दिया कि हथिनी को उसकी सुविधा और आराम का ध्यान रखते हुए पुनर्वास केंद्र पहुँचाया जाए।
हाथी बेहद बुद्धिमान और भावनात्मक प्राणी होते हैं जिन्हें मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए ज़ंजीरों से मुक्त जीवन और दूसरे हाथियों का साथ चाहिए। PETA इंडिया सुप्रीम कोर्ट का आभार व्यक्त करता है कि उसने महादेवी के इस अधिकार को मान्यता दी कि वह अपने बचे हुए जीवन के वर्षों को दर्द, हथियारों, डर और अकेलेपन से मुक्त रहकर जी सके। हम वनतारा के राधे कृष्ण टेम्पल एलिफ़ेंट वेलफेयर ट्रस्ट के अत्यंत आभारी हैं कि उन्होंने महादेवी को पहली बार एक हथिनी की तरह जीवन जीने का अवसर दिया।
महादेवी मात्र तीन वर्ष की उम्र से जैन भट्टारक मठ की एक शेड के ठोस फर्श पर रह रही है। स्वतंत्र पशु चिकित्सकों ने उसकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति का दस्तावेजीकरण किया है, जिसमें पैर की दर्दनाक सड़न (फुट रॉट), अत्यधिक बढ़े हुए नाखून और गठिया शामिल हैं। इन हालातों में उसकी मानसिक पीड़ा को समझते हुए भट्टारक मठ ने शुरुआत में उसका पुनर्वास कराने का इरादा जताया था, लेकिन बाद में उनका रुख बदल गया और उन्होंने महादेवी को मोहर्रम व अन्य आयोजनों के लिए किराए पर देना शुरू कर दिया।
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वनतारा के राधे कृष्ण टेम्पल एलिफेंट वेलफेयर ट्रस्ट में महादेवी को ज़ंजीरों और हथियारों से मुक्त जीवन मिलेगा, साथ ही अन्य हाथियों की संगति में रहने का अवसर भी मिलेगा। उसे गठिया जैसी बीमारियों के इलाज के लिए विश्व स्तरीय पशु चिकित्सकों द्वारा विशेष देखभाल दी जाएगी, जिसमें हाइड्रोथेरेपी (जल चिकित्सा) भी शामिल है।
PETA इंडिया और फेडरेशन ऑफ इंडियन एनिमल प्रोटेक्शन ऑर्गनाइजेशंस (FIAPO) ने जैन मठ को मंदिर के अनुष्ठानों में उपयोग के लिए एक मैकेनिकल हाथी देने का प्रस्ताव दिया है और सभी मंदिरों से अपील की है कि वे जीवित हाथियों के स्थान पर पशुओं के कल्याण और मानव भलाई के लिए मानवीय मैकेनिकल हाथियों का उपयोग करें।

