अभिनेत्री प्रियामणि और PETA इंडिया ने चेन्नई में सिवानंद गुरुकुलम के बच्चों को पशु-मुक्त सर्कस का शानदार अनुभव कराया
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16 June 2025
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चेन्नई — सिवानंद सरस्वती सेवाश्रम के 100 से अधिक बच्चों ने गुडुवांचेरी स्थित जेमिनी सर्कस के एक शानदार पशु-मुक्त शो का आनंद लिया, जो अभिनेत्री प्रियामणि और PETA इंडिया की संयुक्त पहल से संभव हो पाया। यह विशेष आयोजन PETA इंडिया द्वारा आयोजित किया गया था और इसका प्रायोजन प्रियामणि ने किया। पिछले वर्ष, PETA इंडिया ने जेमिनी सर्कस को इस बात के लिए सम्मानित किया था कि उसने जीवित पशुओं के प्रदर्शनों को पूरी तरह समाप्त कर दिया है और उनके स्थान पर रचनात्मक तरीके से रोबोटिक पशुओं को शामिल किया है।
प्रियामणि कहती हैं, “मनोरंजन के ऐसे कार्यक्रमों जिनमे पशु शामिल न हो, का समर्थन करना सभी प्राणियों के लिए एक अधिक करुणामय दुनिया की ओर बढ़ने का एक सार्थक कदम है। PETA इंडिया और मैं सभी से आग्रह करती हूं कि इस दयालु बदलाव का जश्न मनाएं और ऐसी पहलों का समर्थन करें जो पशुओं की भलाई को प्राथमिकता देती हैं।”
सिवानंद सरस्वती सेवाश्रम के एक प्रतिनिधि ने कहा, “हमारे बच्चे इस अद्भुत और पशु-मुक्त प्रदर्शन से बेहद खुश और मंत्रमुग्ध थे। हम प्रियामणि और PETA इंडिया के आभारी हैं कि उन्होंने उन्हें ऐसा अनोखा अनुभव दिया, जिसने न केवल उनका मनोरंजन किया, बल्कि उन्हें पशुओं के प्रति दया और करुणा का मूल्य भी सिखाया। यह अनुभव उनके लिए हमेशा यादगार रहेगा।”
PETA इंडिया के सीनियर पॉलिसी एडवाइज़र उज्ज्वल अग्रैन कहते हैं, “प्रियामणि के सहयोग ने न केवल इस कार्यक्रम में शामिल बच्चों के चेहरों पर खुशी लाई, बल्कि यह भी दिखाया कि आधुनिक और पशु-मुक्त मनोरंजन कितनी रोमांचक संभावनाओं से भरा हुआ है। PETA इंडिया प्रियामणिको इस अनूठे अनुभव को संभव बनाने के लिए धन्यवाद देता है और सभी से अपील करता है कि वे केवल उन्हीं सर्कस का समर्थन करें जो पीड़ित पशुओं से अपमानजनक करतब करवाने से इनकार करते हैं।”
भारत सरकार के जीव-जन्तु कल्याण बोर्ड (AWBI) द्वारा की गई निरीक्षणों और PETA इंडिया की जांच में यह सामने आया है कि सर्कसों में इस्तेमाल किए जाने वाले पशुओं को लंबे समय तक बंदी बनाकर रखा जाता है, उनके साथ शारीरिक दुर्व्यवहार किया जाता है और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। उन्हें डरा-धमकाकर आज्ञाकारी बनाने के लिए चाबुक और अन्य हथियारों से पीटा जाता है, जिससे वे भय और दर्द के कारण डरावने और अस्वाभाविक करतब करने को मजबूर होते हैं। जब ये पशु ज़ोर-शोर से भरी भीड़ के सामने प्रदर्शन नहीं कर रहे होते, तब भी उनका जीवन दुख और उपेक्षा से भरा होता है। अक्सर उन्हें पीने के पानी, पर्याप्त भोजन और पशु-चिकित्सकीय देखभाल जैसी बुनियादी ज़रूरतों से भी वंचित रखा जाता है।
भारत सरकार के दो प्रमुख नियामक निकाय — जीव-जन्तु कल्याण बोर्ड (AWBI) और केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) — यह मान चुके हैं कि सर्कसों में पशुओं का इस्तेमाल स्वभाविक रूप से क्रूरता से भरा होता है और भारत में सर्कसों में पशुओं के उपयोग पर रोक लगाई जानी चाहिए। PETA इंडिया ने इस मुद्दे पर कार्रवाई करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की है, जिसमें “प्रदर्शनकारी पशु (पंजीकरण) (संशोधन) नियम, 2018” को केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित कर सर्कसों में पशुओं के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है।
प्रियमणि इससे पहले भी PETA इंडिया के साथ जुड़ चुकी हैं। उन्होंने लोगों से अपने पालतू कुत्तों की नसबंदी करवाने की अपील की थी और कोच्चि के त्रिक्कयिल महादेव मंदिर द्वारा कभी भी जीवित हाथी को न रखने या किराये पर न लेने के फैसले को सम्मानित करते हुए एक जीवन-आकार का मकैनिकल हाथी दान किया था।
PETA इंडिया जो इस सिद्धांत में विश्वास रखता है कि “पशु हमारे मनोरंजन के लिए इस्तेमाल होने और हमारा दुर्व्यवहार सहने के लिए नहीं हैं” प्रजातिवाद का विरोध करता है। प्रजातिवाद एक ऐसी धारणा है जिसके तहत इंसान स्वयं को इस संसार में सर्वोपरि मानकर, अपनी जरूरतों के अनुसार अन्य प्रजातियों का इस्तेमाल एवं शोषण करता है। अधिक जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट PETAIndia.com पर जाएँ और हमें X, Facebook, Facebook हिन्दी, तथा Instagram पर फॉलो करें।
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