AI तकनीक से संचालित रोबोट बछड़े ‘जीव’ और वीगन फैशन में नए प्रयोगों के माध्यम से PETA इंडिया ने ET Retail Shop FWD Summit 2026 में पशु-अनुकूल फैशन अपनाने की अपील की

Posted on by Surjeet Singh

ET Retail Shop FWD Summit 2026 के सहयोगी भागीदार के रूप में, PETA इंडिया ने फैशन उद्योग के प्रमुख लोगों को ऐसे नए और आधुनिक वीगन पदार्थों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया, जिनके इस्तेमाल से फैशन के लिए पशुओं को नुकसान पहुँचाने की जरूरत नहीं पड़ती। ये विकल्प पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने में मदद करते हैं और उन संवेदनशील उपभोक्ताओं की बढ़ती मांग को पूरा करते हैं, जो पशुओं के प्रति दयालु विकल्प चाहते हैं। इस दौरान PETA इंडिया ने क्रूरता-मुक्त ब्रांडों, पौधों से बने पदार्थों और AI से संचालित रोबोट बछड़े ‘जीव’ को प्रदर्शित किया।

PETA इंडिया के AI से संचालित रोबोट बछड़े ‘जीव’ ने  वहाँ आए मेहमानों को चमड़ा उद्योग से जुड़े मुद्दों पर जानकारी दी। इसके माध्यम से लोगों को बताया गया कि चमड़ा बनाने के लिए पशुओं को किस तरह भारी पीड़ा सहनी पड़ती है। ‘जीव’ ने लोगों को यह भी याद दिलाया कि पशु बैग, बेल्ट, जूते या अन्य फैशन वस्तुएँ नहीं, बल्कि जीवित और संवेदनशील प्राणी हैं, जो इंसानों की तरह ही जीना चाहते हैं।

 

PETA इंडिया के स्टॉल पर Anita Dongre, Raabta by Rahul, Joon Blu, Jiwya, Vyakti India, Faborg, Roar for Good, Greensole, La Baggio, Sol’eart Fashion, Weaving Vibes, Eori x Pytan, Recore, Kavak Bio, Terratan Bio, Faborange, Ahim, Hand an Yarns, Banhide, Malai और कई अन्य आधुनिक वीगन फैशन ब्रांडों और पौधों से बने नए पदार्थों को प्रदर्शित किया गया। ये सभी उदाहरण बताते हैं कि फैशन शानदार, टिकाऊ और सभी जीवित प्राणियों के प्रति दयालु हो सकता है।

PETA इंडिया की कॉर्पोरेट अफेयर्स निदेशक आशिमा कुकरेजा ने “From Storytelling to Storyliving: Designing Brand Experiences That Convert” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में हिस्सा लिया। चर्चा के दौरान उन्होंने बताया कि Gen Z और आने वाले समय के उपभोक्ता अब केवल विज्ञापनों और मार्केटिंग के दावों पर भरोसा नहीं करते, बल्कि ब्रांडों से वास्तविक नैतिकता और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की उम्मीद करते हैं। इसके लिए जिम्मेदारी से की गई खरीद, पारदर्शी कारोबारी प्रक्रियाएँ और इस्तेमाल किए जाने वाले पदार्थों तथा उत्पादन के तरीकों में भी इन मूल्यों का दिखना जरूरी है। उन्होंने भारत में नए और टिकाऊ विकल्प विकसित करने की बड़ी संभावनाओं पर भी बात की। आज मशरूम, अनानास के पत्तों, नारियल के कचरे, आम के कचरे, चावल, केले के रेशों, कैक्टस और गन्ने के अवशेष जैसी चीजों से पौधों पर आधारित नए पदार्थ बनाए जा रहे हैं। भारत में ऐसे विकल्पों को विकसित करने के लिए शोध संस्थान भी महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं। उन्होंने फैशन उद्योग के प्रमुख लोगों से ऐसे शानदार और आधुनिक वीगन पदार्थों को अपनाने का आग्रह किया, जिनकी आज के संवेदनशील उपभोक्ता मांग कर रहे हैं। भारत का मजबूत कृषि क्षेत्र चमड़े के टिकाऊ और पशु-अनुकूल विकल्प विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

 

स्टॉल पर दुनिया भर में पहचाने जाने वाले “PETA-Approved Vegan” प्रमाणन के बारे में भी जानकारी दी गई। इससे व्यवसायों को यह समझने में मदद मिली कि वे पशु-अनुकूल फैशन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को कैसे प्रदर्शित कर सकते हैं। आगंतुकों ने अभिनेत्री करिश्मा तन्ना का एक प्रभावशाली वीडियो भी देखा, जिसमें चमड़ा उद्योग के लिए पशुओं को सहनी पड़ने वाली क्रूरता दिखाई गई और उपभोक्ताओं को दयालु विकल्प चुनने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

गायों की दोस्ती होती है, वे उन्हें चोट पहुँचाने वालों को याद रखती हैं और एक-दूसरे से अलग होने पर शोक भी मनाती हैं। फिर भी, चमड़े के लिए इस्तेमाल की जाने वाली गायों और भैंसों को अक्सर इतनी बड़ी संख्या में वाहनों में ठूँसकर ले जाया जाता है कि उनकी हड्डियाँ तक टूट जाती हैं। जो पशु बूचड़खाने तक की इस कठिन यात्रा में जीवित बच जाते हैं, उन्हें भी बेहद पीड़ादायक मौत का सामना करना पड़ता है: अन्य पशुओं के सामने उनका गला काट दिया जाता है और कई पशुओं के शरीर के अंग तब अलग किए जाते हैं, जब वे अभी भी होश में होते हैं।

चमड़ा बनाने की प्रक्रिया पर्यावरण को भी नुकसान पहुँचाती है। पशुओं की खाल को चमड़े में बदलने के लिए क्रोमियम जैसे कठोर रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है, जो जल स्रोतों को प्रदूषित करते हैं और चमड़ा कारखानों में काम करने वाले लोगों के लिए भी जहरीले होते हैं। वीगन चमड़ा और पशु-अनुकूल अन्य विकल्प अब देशभर में लगभग सभी प्रमुख कपड़ों और जूतों की दुकानों पर उपलब्ध हैं। दुनिया भर में मान्यता प्राप्त “PETA-Approved Vegan” प्रमाणन उन कपड़ों, हैंडबैग, जूतों, एक्सेसरीज़, फर्नीचर और घर की सजावट की वस्तुओं को प्रमाणित करता है, जो वीगन पदार्थों से बनाए गए हैं। दुनिया भर की 1,000 से अधिक कंपनियाँ “PETA-Approved Vegan” लोगो का इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे भारत और अन्य देशों के जागरूक उपभोक्ता खरीदारी के दौरान एक नज़र में वीगन उत्पादों की पहचान कर सकते हैं।

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