वीडियो: डरी-सहमी हालत में हथिनी माधुरी को जंजीरों में बांधकर कोल्हापुर के उसी शेड और परिस्थिति में वापस घसीट लाया गया है जहां उसकी आत्मा टूट गई थी और उसे असहनीय तकलीफ मिली थी
PETA इंडिया के नए वीडियो में माधुरी को एक साल से अधिक समय तक रिलायंस के वनतारा में रहने के बाद कोल्हापुर वापस लाए जाने की दिल दहला देने वाली तस्वीर सामने आई है। माधुरी के दो पैरों में बेड़ियाँ बंधी थीं। चारों ओर पटाखों की तेज़ आवाज़, चिल्लाती भीड़ और गाड़ियों के हॉर्न की तेज आवाज़े थी। उसे देखने के लिए जमा भीड़ के बीच ले जाने के लिए उसे पूंछ से खींचकर वाहन से उतारा गया। इसके बाद उसे उसी सुनसान और उदास कोल्हापुर मठ के शेड में अकेले रहने के लिए वापस भेज दिया गया, जहाँ अपने जीवन के 33 वर्ष गुजारने के दौरान वह इतनी मानसिक पीड़ा में आ गई थी कि वर्ष 2017 में उसने मठ के मुख्य पुजारी की ही जान ले ली थी और वर्ष 2022 में एक धार्मिक जलूस के दौरान उसने एक व्यक्ति पर हमला किया था।
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माधुरी, जिसे महादेवी के नाम से भी जाना जाता है, जुलाई 2025 से वनतारा के राधे कृष्णा टेंपल एलिफेंट वेलफेयर ट्रस्ट में रह रही थीं। उसके बिगड़ते शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को देखते हुए PETA इंडिया के हस्तक्षेप के बाद सुप्रीम कोर्ट की उच्चाधिकार प्राप्त समिति (HPC), बॉम्बे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत उन्हें वनतारा भेजने के आदेश दिए थे। दशकों बाद पहली बार माधुरी को उस तरह रहने का मौका मिला, जैसे एक हाथी को रहना चाहिए। वनतारा की पशु चिकित्सा टीम ने उनकी 33 साल की जंजीरों वाली ज़िंदगी का उनके स्वास्थ्य पर पड़े गहरे असर को देखा था। उनके नाखून बहुत बढ़े हुए थे, पैरों में लैमिनाइटिस (पैरों में दर्दनाक सूजन) था, लंबे समय से पैर के नाखून में फोड़ा था, दोनों घुटनों में दर्दनाक सूजन थी और एक्स-रे में आगे के पैरों की हड्डियों में फ्रैक्चर और गठिया की पुष्टि हुई थी।
यह पुनर्वास एक लंबे राजनीतिक अभियान के बाद दुखद तरीके से खत्म हो गया। इस अभियान में रिलायंस के उत्पादों के बहिष्कार की अपील भी शामिल थी, जिसके बाद वनतारा ने माधुरी के प्रति अपना रुख बदल लिया और माधुरी को कोल्हापुर के मठ वापस भेजे जाने का समर्थन किया। सुप्रीम कोर्ट की उच्चाधिकार प्राप्त समिति के निरीक्षकों ने भी चेतावनी दी थी कि मठ माधुरी को लंबे समय तक रखने के लिए उपयुक्त नहीं है। इसके बावजूद, गठिया से पीड़ित पैरों के साथ माधुरी को 30 घंटे से अधिक लंबी यात्रा कराई गई, अस्पताल जैसी चिकित्सा सुविधाओं से दूर ले जाया गया और उसी शेड में वापस भेज दिया गया, जहाँ से उसे उसकी बिगड़ती हालत और हिंसक व्यवहार के बाद उसे वहाँ से बचाया गया था।
मठ में, PETA इंडिया के वीडियो में दिखाया गया है कि अब माधुरी के लिए असली पेड़ों की जगह दीवारों पर पेड़ों की पेंटिंग हैं, प्राकृतिक ज़मीन की जगह एक पतली रबर का मैट है और वह वनतारा में मिले अन्य हाथी दोस्तों से अलग ,अकेलेपन में रहने के लिए मजबूर है।
PETA इंडिया, जनता से अपील करता है कि petaindia.com/madhuri पर जाए और माधुरी के बेहतर कल्याण के लिए कार्रवाई करें।
माधुरी की मदद करें!