PETA इंडिया और CUPA ने रायचूर के श्री 108 साविरा देवर संस्थान किले बृहन्मठ की 20वीं वार्षिक सद्भावना पदयात्रा में शामिल होने के लिए असली हाथी के आकार का मशीनी हाथी भेंट किया

Posted on by Shreya Manocha

PETA इंडिया और कम्पैशन अनलिमिटेड प्लस एक्शन (CUPA) ने रायचूर स्थित श्री 108 साविरा देवर संस्थान किले बृहन्मठ को असली हाथी के आकार का मशीनी हाथी ‘अभिनव गुरुपाद’ भेंट किया है। यह पहल 20वीं वार्षिक सद्भावना पदयात्रा के अवसर पर की गई, जो एक प्रतिष्ठित वार्षिक परंपरा है और शहर स्थित श्री मठ से कुचांकेरी तक श्रद्धालुओं को ले जाती है। आज कर्नाटक के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा लघु सिंचाई विभाग के पूर्व कैबिनेट मंत्री माननीय श्री एन. एस. बोसराजू ने ‘अभिनव गुरुपाद’ का अनावरण किया। इस अवसर पर रायचूर सिटी के विधायक श्री डॉ. एस. शिवराज पाटिल, रायचूर के विधान परिषद सदस्य श्री ए. वसंतकुमार, रायचूर ग्रामीण के विधायक श्री दद्दल बसवनगौड़ा, देवदुर्ग के पूर्व विधायक श्री के. शिवनगौड़ा नायक, मंदिर अध्यक्ष श्री शांतामल्ला शिवाचार्य महास्वामीजी, मंदिर के अन्य पदाधिकारी और श्रद्धालु उपस्थित थे।

PETA इंडिया और CUPA ने मंदिर के इस करुणामय निर्णय के सम्मान में इस पहल को संभव बनाया है कि वह कभी भी जीवित हाथी को न तो अपने पास रखेगा और न ही किराए पर लेगा। ‘अभिनव गुरुपाद’ देशभर में PETA इंडिया द्वारा संभव बनाया गया 31वाँ रोबोटिक हाथी और कर्नाटक में PETA इंडिया और CUPA द्वारा भेंट किया गया 10वाँ व रायचूर में दिया गया पहला मशीनी हाथी है। ‘अभिनव गुरुपाद’ का स्वागत एक उद्घाटन समारोह के साथ किया गया, जिसके बाद शोभायात्रा निकाली गई। यह सद्भावना पदयात्रा की एक सार्थक और शुभ शुरुआत का प्रतीक बना। आने वाले दिनों में अभिनव गुरुपाद 9 दिवसीय दशहरा समारोह में शामिल होगा और स्थानीय दशहरा जुलूस में भी शामिल किया जाएगा।

“कर्नाटक में आस्था और नवाचार, दोनों को अपनाने की एक लंबी परंपरा रही है। इस मंदिर में मशीनी हाथी की शुरुआत यह दर्शाती है कि आधुनिक तकनीक हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने के साथ-साथ अधिक करुणामय तरीकों को भी प्रोत्साहित कर सकती है। ऐसी पहल दिखाती हैं कि प्रगति और परंपरा साथ-साथ आगे बढ़ सकती हैं।”- श्री एन. एस. बोसराजू, पूर्व कैबिनेट मंत्री, कर्नाटक सरकार    

“यह पहल रायचूर के लिए गर्व की बात है और मंदिर की परंपराओं को जिम्मेदारी के साथ बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मशीनी हाथी श्रद्धालुओं को समारोहों के दौरान हाथी की मौजूदगी के सांस्कृतिक महत्व का अनुभव जारी रखने में मदद करेगा और साथ ही मंदिर के उत्सवों के लिए अधिक सुरक्षित और टिकाऊ तरीका अपनाने को बढ़ावा देगा।” -डॉ. एस. शिवराज पाटिल, रायचूर सिटी के विधायक 

“हमारे लिए ‘अभिनव गुरुपाद’ को यहाँ लाना सिर्फ किसी नई चीज़ को लाने से बहुत अधिक महत्व रखता है। यह बदलते समय के अनुरूप करुणा के साथ अपनी परंपराओं को मनाने की दिशा में एक कदम है। मशीनी हाथी श्रद्धालुओं को हमारे धार्मिक समारोहों से जुड़े सौंदर्य और गरिमा का अनुभव करने का अवसर देता है और साथ ही हमें यह भरोसा भी देता है कि मंदिर के उत्सवों की आवश्यकताओं के लिए किसी जीवित हाथी को इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।”-  – श्री 108 साविरा देवारू शांतामल्ला शिवाचार्य महास्वामीजी , अध्यक्ष मंदिर समिति 

हाथी बुद्धिमान, सक्रिय और सामाजिक वन्यजीव हैं। कैद में रखे गए हाथियों को जुलूसों में इस्तेमाल करने के लिए अक्सर मारपीट, हथियारों और बल प्रयोग के जरिए प्रशिक्षित किया जाता है। मंदिरों और अन्य स्थानों पर कैद रखे गए अधिकांश हाथियों को घंटों तक कंक्रीट पर जंजीरों से बांधकर रखा जाता है, जिसके कारण उन्हें पैरों की गंभीर समस्याओं और पैरों में घावों का सामना करना पड़ता है। अधिकांश हाथियों को पर्याप्त भोजन, पानी, पशुचिकित्सकीय देखभाल और प्राकृतिक जीवन जीने का अवसर तक नहीं मिलता। इन बेहद खराब परिस्थितियों में कई हाथी अत्यधिक तनाव और हताशा का शिकार हो जाते हैं और आक्रामक व्यवहार कर सकते हैं, जिसके चलते कभी-कभी महावतों या अन्य इंसानों अथवा पशुओं की मौत तक हो जाती है।

मशीनी हाथी 3 मीटर ऊँचे और 500 किलोग्राम वज़नी होते हैं। इन्हें रबर, फाइबर, धातु, जाली, फोम और स्टील से बनाया जाता है और ये पाँच मोटरों से चलते हैं। मशीनी हाथी दिखने और महसूस होने में वास्तविक हाथी जैसे होते हैं और उनका इस्तेमाल भी वास्तविक हाथी की तरह किया जा सकता है। वे अपना सिर हिला सकते हैं, कान और आँखें हिला सकते हैं, पूँछ घुमा सकते हैं, सूंड उठा सकते हैं और यहाँ तक कि पानी भी छिड़क सकते हैं। उन पर चढ़ा जा सकता है और उनकी पीठ पर आसन भी लगाया जा सकता है। इन्हें बिजली से जोड़कर आसानी से संचालित किया जा सकता है। इन्हें सड़कों पर ले जाया जा सकता है और ये पहियों वाले आधार पर लगे होते हैं, जिससे इन्हें धार्मिक अनुष्ठानों और जुलूसों के लिए आसानी से ले जाया या धकेला जा सकता है।

कर्नाटक इतिहास अकादमी के अनुसार, किले बृहन्मठ कर्नाटक के सबसे पुराने मठों में से एक है और रंभापुरी पीठ की एक शाखा है। इसे रायचूर के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों में से एक के रूप में भी मान्यता प्राप्त है।

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