शरद पूर्णिमा पर विशाखापत्तनम के इस्कॉन मंदिर को मिला आंध्र प्रदेश का पहला मैकेनिकल हाथी, अभिनेता अदिवि शेष और PETA इंडिया ने दिया उपहार
अभिनेता अदिवि शेष और PETA इंडिया ने आंध्र प्रदेश का पहला असली हाथी के आकार का मैकेनिकल हाथी रंगा, इस्कॉन विशाखापत्तनम के श्री श्री राधा दामोदर मंदिर को दान किया है। रविवार को इस्कॉन के गवर्निंग बॉडी कमीशन के अध्यक्ष, श्री एच. जी. मधुसेविता प्रभु ने रंगा का अनावरण किया। इस अवसर पर इस्कॉन विशाखापत्तनम मंदिर के अध्यक्ष, श्री एच. जी. सांबा दास; आध्यात्मिक मार्गदर्शक डॉ. निताइसेविनी माताजी; मंदिर के अधिकारी और श्रद्धालु उपस्थित थे।
PETA इंडिया ने मंदिर के इस करुणामय निर्णय को सम्मान देने के लिए इस पहल में सहयोग किया है कि मंदिर कभी भी जीवित हाथियों को न तो अपने पास रखेगा और न ही किराए पर लेगा। रंगा, भारत के सात राज्यों में PETA इंडिया के सहयोग से भेंट किए गए मैकेनिकल हाथियों में 33वाँ है। मैकेनिकल हाथी का स्वागत उद्घाटन समारोह के साथ किया गया। इसके बाद पारंपरिक शोभायात्रा निकाली गई और भावपूर्ण भजन गाए गए।
“इस्कॉन विशाखापत्तनम को मैकेनिकल हाथी रंगा भेंट करने के लिए PETA इंडिया के साथ जुड़ना मेरे लिए वास्तव में बेहद खास है। मैं परंपराओं को करुणा के साथ निभाने का रास्ता अपनाने के लिए मंदिर प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सराहना करता हूँ। करुणा को व्यवहार में लाने वाला यह सराहनीय कदम देशभर के कई अन्य मंदिरों को भी इस तरह के मानवीय विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित करेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए हाथियों की रक्षा करने में मदद करेगा।” – अभिनेता अदिवि शेष
“सच्ची आध्यात्मिकता करुणा पर आधारित होती है। अपने धार्मिक उत्सवों में मैकेनिकल हाथी को अपनाकर हम अपनी पवित्र परंपराओं का सम्मान कर सकते हैं और यह भी सुनिश्चित कर सकते हैं कि इस प्रक्रिया में किसी भी जीव को कष्ट न हो। हमें उम्मीद है कि यह पहल श्रद्धालुओं को दयालुता, ज़िम्मेदारी और कृष्ण की समस्त सृष्टि के प्रति सम्मान के भाव के साथ अपनी भक्ति को और गहरा करने के लिए प्रेरित करेगी।”
– इस्कॉन के गवर्निंग बॉडी कमीशन के अध्यक्ष, श्री एच. जी. मधुसेविता प्रभु
“इस मैकेनिकल हाथी को मंदिर में शामिल करना इस्कॉन विशाखापत्तनम के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। हमारी परंपराएँ भक्ति में गहराई से निहित हैं और हमारा मानना है कि करुणामय विकल्प अपनाकर भी इन्हें आगे बढ़ाया जा सकता है। इस पहल से श्रद्धालु धार्मिक आयोजनों की माँगों के अधीन जीवित हाथियों को रखे बिना हमारे उत्सवों की भव्यता का अनुभव कर सकेंगे। हमें आशा है कि इससे अन्य मंदिर भी इसी तरह के विकल्प अपनाने पर विचार करने के लिए प्रेरित होंगे।”
– इस्कॉन विशाखापत्तनम मंदिर के अध्यक्ष, श्री एच. जी. संबा दास
हाथी बुद्धिमान, सक्रिय और समूह में रहने वाले वन्य पशु हैं। उन्हें कैद में रखकर जुलूसों में इस्तेमाल करने के लिए मारपीट, हथियारों और बल प्रयोग के जरिए प्रशिक्षित किया जाता है। मंदिरों और अन्य स्थानों पर कैद करके रखे गए अधिकांश हाथियों को घंटों तक कंक्रीट के फर्श से जंजीरों में बाँधकर रखा जाता है, जिससे उन्हें पैरों में असहनीय दर्द और घावों जैसी समस्याएँ होती हैं। इनमें से अधिकांश को पर्याप्त भोजन, पानी और पशु चिकित्सकीय देखभाल नहीं मिलती। उन्हें प्राकृतिक जीवन जीने का अवसर भी नहीं दिया जाता। ऐसी अमानवीय परिस्थितियों में कई हाथी अत्यधिक तनाव और हताशा का शिकार होकर आक्रामक हो जाते हैं। कभी-कभी उनके हमलों में महावतों, अन्य लोगों या पशुओं की जान भी चली जाती है। इसी महीने की शुरुआत में, तिरुपति के तिरुचानूर स्थित श्री पद्मावती अम्मावरी मंदिर में एक हाथी ने कथित तौर पर अपने महावत पर हमला किया और श्रद्धालुओं की ओर दौड़ पड़ा। यह घटना धार्मिक आयोजनों, मंदिरों और अन्य सार्वजनिक कार्यक्रमों में जीवित हाथियों के इस्तेमाल से लोगों की सुरक्षा को होने वाले खतरों को उजागर करती है।
विशाखापत्तनम के इस्कॉन मंदिर में असली हाथी के आकार का मैकेनिकल हाथी स्थापित करना पशु कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे श्रद्धालु हाथियों या लोगों की सुरक्षा को खतरे में डाले बिना अपनी प्रिय परंपराओं और जुलूसों का आनंद ले सकेंगे।
मैकेनिकल हाथी लगभग 3 मीटर ऊँचे होते हैं और इनका वजन 500 किलोग्राम होता है। इन्हें रबर, फाइबर, धातु, जाली, फोम और स्टील से बनाया जाता है तथा ये पाँच मोटरों की मदद से चलते हैं। मैकेनिकल हाथी दिखने और छूने में असली हाथी जैसे लगते हैं और इनका इस्तेमाल भी असली हाथियों की तरह किया जा सकता है। ये अपना सिर हिला सकते हैं, कान और आँखें हिला सकते हैं, पूँछ घुमा सकते हैं, सूँड़ उठा सकते हैं और पानी भी छिड़क सकते हैं। इन पर चढ़ा जा सकता है और इनकी पीठ पर बैठने के लिए आसन भी लगाया जा सकता है। इन्हें बिजली से जोड़कर आसानी से चलाया जा सकता है। इन्हें सड़कों पर ले जाया जा सकता है। पहियों वाले आधार पर लगाए जाने के कारण धार्मिक अनुष्ठानों और जुलूसों के दौरान इन्हें आसानी से खींचकर या धकेलकर ले जाया जा सकता है।
श्री श्री राधा दामोदर मंदिर वाला इस्कॉन विशाखापत्तनम शहर का एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र और आंध्र प्रदेश में कृष्ण चेतना के प्रचार-प्रसार का महत्वपूर्ण स्थान है। बंगाल की खाड़ी के तट पर स्थित यह मंदिर दशकों से श्रद्धालुओं और आगंतुकों को अपनी सेवाएँ प्रदान कर रहा है। यहाँ पूजा-अर्चना, कीर्तन, आध्यात्मिक शिक्षा, प्रसाद वितरण और सामुदायिक सेवा जैसी गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं। यह मंदिर प्रमुख वैष्णव त्योहारों को उत्साहपूर्वक मनाने और भगवान कृष्ण तथा श्रील प्रभुपाद की शिक्षाओं को क्षेत्र के लोगों तक पहुँचाने के प्रयासों के लिए जाना जाता है।





