PETA इंडिया की शिकायत और दुकानदार पर किए जानलेवा हमले के बाद, आमेर के किले में गौरी नामक हथिनी की सवारी पर रोक लगाई गयी

Posted on by Shreya Manocha

PETA इंडिया और आमेर निवासी एवं हाथी-हमले के शिकार रूपनारायण कूलवाल द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय में दायर की गई शिकायत और हाल ही में PETA इंडिया एवं हमला पीड़ित की राजस्थान के मुख्य सचिव के साथ एक हुई बैठक के परिणामस्वरूप पुरातत्व और संग्रहालय विभाग के निदेशक द्वारा पर्यटक सुरक्षा ख़तरों का हवाला देते हुए गौरी की सवारी पर 45 दिनों की अस्थायी रूप से रोक लगा दी गयी है। PETA इंडिया और रूपनारायण कूलवाल द्वारा मुख्य सचिव के साथ अपनी बैठक में गौरी और मालती नामक हथिनियों के पुनर्वास पर विचार करने का अनुरोध किया गया था। पहले भी, गौरी और मालती द्वारा जबरन सवारी कराने की झुंझलाहट के कारण इंसानों और जानवरों पर हमला किया गया है। गौरी द्वारा अक्टूबर 2022 में रूपनारायण कूलवाल पर जानलेवा हमला किया गया था जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मेडिकल रिपोर्ट जमा होने के बाद गौरी की सवारी फिर से शुरू की जा सकती है। पिछले साल के अंत में, गौरी ने बिना किसी उकसावे के रूपनारायण कूलवाल नामक दुकानदार पर हमला किया था जिसमें उन्हें गंभीर चोटें आयीं और उनकी पसलियां भी टूट गईं।

मालती और गौरी दोनों अपने मालिकों की अवैध हिरासत में हैं। इस साल की शुरुआत में सामने आयी वीडियो फुटेज के द्वारा, मालती के व्यवहार में बंदी हाथियों के गंभीर मनोवैज्ञानिक लक्षण पायें गए जिसमें लगातार हिलते रहने और बार-बार अपना सिर हिलाना शामिल है। इस संदर्भ में, 120 पशु चिकित्सकों ने अपने हस्ताक्षर करके यह पुष्टि करी कि गौरी मनोवैज्ञानिक रूप से पीड़ित है। वर्तमान में, मालती का उपयोग आमेर किले में पर्यटकों की सवारी के लिए किया जाता है, बावजूद इसके कि उसका अनियंत्रित होकर दूसरे हाथियों लड़ने का इतिहास रहा है, जिसके बाद उसे सार्वजनिक रूप से बुरी तरह पीटा भी गया था।

जब हाथी इंसानों पर हमला करते हैं, तो उन्हें आम तौर पर मारा-पीटा जाता है और अन्य सज़ाएं दी जाती हैं, जिससे इनके मानसिक आघात में और अधिक बढ़ोतरी होती है। इसके अलावा, हाथियों में टीबी की बीमारी पायी जाती हैं, जो हाथियों से मनुष्यों में संक्रमित हो सकती है। PETA इंडिया ने पहले भी उल्लेखित किया है कि आज भी आमेर के किले में टीबी से पीड़ित हाथियों का उपयोग सवारी कराने के लिए किया जा रहा है।

PETA इंडिया के अनुसार, राजस्थान में सवारी के लिए हाथियों का उपयोग वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972; पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960; प्रदर्शनकारी पशु (पंजीकरण) नियम, 2001; और राजस्थान सरकार के वर्ष 2010 के परिपत्र का स्पष्ट उल्लंघन है जिसमें हाथियों के पंजीकरण को अनिवार्य घोषित किया गया था।

 

हाथियों को सवारी कराने के शोषण से बचाएँ