PETA इंडिया की डायरेक्टर पर प्रयोग : 1200+ बीगल और अन्य पशुओं को पालमुर बायोसाइंसेज से बचाने की मांग

Posted on by Surjeet Singh

PETA इंडिया द्वारा पालामूर बायोसाइंसेज में कुत्तों, बंदरों और अन्य पशुओं पर अत्याचार के सनसनीखेज खुलासे के बाद, आज कुछ ‘वैज्ञानिकों’ के एक समूह ने PETA इंडिया की डायरेक्टर, पूर्वा जोशीपुरा को एक रेस्ट्रेंट चेयर पर बांधकर उन पर वही क्रूर प्रयोग करे जो प्रयोगशालाओं में असली पशुओं पर किए जाते हैं। PETA इंडिया का उद्देश्य है कि पशुओं पर किए जाने वाले प्रयोगों की निगरानी और नियंत्रण के लिए गठित समिति (CCSEA) पालामूर बायोसाइंसेज में बंद 1200+ बीगल, बंदरों, गायों, सूअरों और अन्य पशुओं के बचाव को सुनिश्चित करे जो कि CCSEA द्वारा नियुक्त निरीक्षकों की एक विस्तृत रिपोर्ट में 17 जून को एजेंसी को दी गई सिफारिशों में शामिल है।

पालमुर बायोसाइंसेज में बंद पशुओं में 73 बीगल शामिल हैं, जिन्हें अब न तो प्रजनन और न ही प्रयोग के लिए उपयोग किया जा रहा है, और जिन्हें खुद उस संस्था ने ‘पुनर्वास’ हेतु चिह्नित किया है, लेकिन अब तक CCSEA ने उनके बचाव का आदेश नहीं दिया है और पालामूर बायोसाइंसेज ने उन्हें छोड़ने से इनकार कर दिया है, जबकि कई NGO इन कुत्तों की देखभाल, पुनर्वास और गोद लिए जाने में मदद की पेशकश कर चुके हैं।

17 जून को एजेंसी को सौंपी गई CCSEA-नियुक्त निरीक्षकों की रिपोर्ट में दस्तावेज किया गया कि यह संस्था CCSEA द्वारा अनुमोदित संख्या से कहीं अधिक कुत्तों को बंद करके रख रही थी और किसी भी पशु की सूची प्रदान नहीं कर सकी; पशुओं का दर्दनाक प्रयोगों में बार-बार उपयोग किया गया, जो CCSEA के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है; कुत्ते, मिनीपिग और गायें खराब हालत में थे, फिर भी पालामूर कोई उपयुक्त चिकित्सा रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं कर सका; पशुओं पर बिना पर्याप्त दर्द नियंत्रण उपायों के प्रयोग किए गए; और पशुओं को बिना बेहोश किए मार दिया गया; और अन्य कई क्रूरता और कुप्रबंधन के उदाहरण पाए गए। रिपोर्ट निष्कर्ष निकालती है, ‘PBPL [पालामूर बायोसाइंसेज] में देखी गई संचालन संबंधी कमियाँ अलग-अलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि यह संरचनात्मक, प्रक्रियात्मक और नैतिक विफलताओं की गहरी जड़ें दर्शाती हैं। निरीक्षण के दौरान दर्ज की गई अनुपालनों की मात्रा और गंभीरता पशु कल्याण और नियामक जवाबदेही के स्थापित मानकों के पालन को लेकर गंभीर चिंताएं उत्पन्न करती हैं।’

पालामूर बायोसाइंसेज में यातना सह रहे पशुओं की मदद करें