पशु क्रूरता रोकने के लिए PETA इंडिया की कार्यशाला में मुंबई GRP के करीब 100 पुलिसकर्मियों ने लिया हिस्सा

Posted on by Surjeet Singh

मुंबई राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) के लगभग 100 कर्मियों ने हाल ही में PETA इंडिया द्वारा आयोजित एक जागरूकता कार्यशाला में हिस्सा लिया। इसमें वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक, पुलिस निरीक्षक (PI), सहायक पुलिस निरीक्षक (API), उप-निरीक्षक (PSI), सहायक उप-निरीक्षक (ASI), हेड कांस्टेबल (HC) और कांस्टेबल शामिल थे। कार्यशाला का उद्देश्य रेलवे व्यवस्था में पशुओं के प्रति क्रूरता रोकने और पशु संरक्षण कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने के प्रयासों को मजबूत करना था। यह कार्यशाला 23 अक्टूबर को मुंबई के घाटकोपर स्थित राजकीय रेलवे पुलिस मुख्यालय के नवरंग ऑडिटोरियम में आयोजित की गई। इस अवसर पर मध्य क्षेत्र की पुलिस उपायुक्त श्रीमती प्रज्ञा जेडगे भी उपस्थित रहीं।

यह कार्यशाला मुंबई रेलवे पुलिस के आयुक्त श्री एम. राकेश कलासागर, IPS के नेतृत्व में शुरू की गई पहल के तहत और मध्य क्षेत्र की पुलिस उपायुक्त श्रीमती प्रज्ञा जेडगे के सहयोग से आयोजित की गई। इसका उद्देश्य GRP कर्मियों को पशु संरक्षण कानूनों की जानकारी देना और पशुओं के खिलाफ अपराधों को रोकने तथा उनसे निपटने में उनकी भूमिका को मजबूत करना था। खास तौर पर उन पशुओं के मामलों में, जिनकी तस्करी की जाती है या जिन्हें रेलवे के ज़रिए अवैध रूप से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जाता है।

यह कार्यशाला सितंबर में हुई उस बचाव कार्रवाई के बाद आयोजित की गई, जिसमें हावड़ा से मुंबई ले जाए जा रहे सैकड़ों बजीरिगर, फिंच और कॉकटेल पक्षियों को गीतांजलि एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 12860) में बेहद भीड़भरे पिंजरों में ठूंसकर ले जाया जा रहा था। पक्षियों के कल्याण की दिशा में एक बड़ी सफलता के तहत, PETA इंडिया की शिकायत के आधार पर छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) रेलवे पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज होने के बाद, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC), 35वीं अदालत, CSMT ने 282 पक्षियों की अंतरिम देखरेख का जिम्मा कलोटे एनिमल ट्रस्ट को सौंप दिया है।

कार्यशाला में पशुओं के प्रति क्रूरता रोकने और ऐसी घटनाओं पर कार्रवाई करने के व्यावहारिक पहलुओं पर ध्यान दिया गया। इसमें पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम, 1960 और इसके तहत बनाए गए नियमों, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972, भारतीय न्याय संहिता, 2023 और अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों की प्रमुख धाराओं की जानकारी दी गई। सत्र में विशेष रूप से रेलवे नेटवर्क के ज़रिए पशुओं को अवैध और क्रूर तरीके से ले जाने के मामलों का पता लगाने, संकट में फंसे पशुओं को बचाने और जब्त करने, सबूत सुरक्षित रखने, FIR दर्ज करने, जांच करने, पशु चिकित्सकों और अन्य सरकारी अधिकारियों के साथ समन्वय बनाने तथा पशुओं के प्रति क्रूरता और वन्यजीवों से जुड़े अपराधों में उचित कानूनी कार्रवाई करने में पुलिस की अहम भूमिका पर चर्चा की गई।

हाल ही में, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने पहली बार देश में पशुओं के प्रति क्रूरता के मामलों का रिकॉर्ड तैयार किया। इसके आंकड़ों के अनुसार, 2024 में ऐसे 9,039 मामले दर्ज किए गए और 10,312 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

2021 में, फेडरेशन ऑफ इंडियन एनिमल प्रोटेक्शन ऑर्गनाइजेशन्स ने एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें बताया गया था कि उससे पहले के दशक में करीब 500,000 पशु अपराधों के शिकार हुए थे।

PETA इंडिया का कहना है कि कई हिंसक अपराधियों का पशुओं के प्रति क्रूरता का पुराना रिकॉर्ड रहा है। Forensic Research and Criminology International Journal में प्रकाशित एक अध्ययन में चेतावनी दी गई है, “पशुओं के प्रति क्रूरता करने वाले लोगों के अन्य अपराधों में शामिल होने की आशंका तीन गुना अधिक होती है। इनमें हत्या, बलात्कार, लूटपाट, मारपीट, उत्पीड़न, धमकियां देना और नशीले पदार्थों का सेवन या उनसे जुड़े अपराध शामिल हैं।”

यह पहल पूरे भारत में कानून लागू करने वाले अधिकारियों को पशुओं के प्रति क्रूरता के मामलों के प्रति संवेदनशील बनाने और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं को सशक्त करने के PETA इंडिया के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है, ताकि पशुओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को उतनी ही गंभीरता से लिया जाए, जितनी वे मांग करते हैं। इससे पहले भी सीमा सुरक्षा बल (ग्वालियर), छत्तीसगढ़ पुलिस, गोवा पुलिस और गोवा पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग के अधिकारियों, सिक्किम पुलिस, पुणे पुलिस, नागपुर पुलिस, मीरा-भायंदर और वसई-विरार पुलिस, बेलगावी जिला पुलिस, हुबली-धारवाड़ जिला पुलिस, बेंगलुरु पुलिस, जम्मू, कठुआ और सांबा जिला पुलिस, बेंगलुरु और चिक्कमगलुरु पुलिस प्रशिक्षण स्कूलों, दिल्ली पुलिस के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट, केरल पुलिस अकादमी (KEPA), त्रिशूर, बेंगलुरु ग्रामीण पुलिस, तुमकुरु पुलिस और आंध्र प्रदेश राज्य वन अकादमी, राजमहेंद्रवरम के साथ ऐसी जागरूकता कार्यशालाएँ आयोजित की जा चुकी हैं।

PETA इंडिया लंबे समय से पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम, 1960 को मजबूत बनाने के लिए अभियान चला रहा है। इस कानून में सज़ा के प्रावधान पुराने और अपर्याप्त हैं। उदाहरण के लिए, पहली बार दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति पर अधिकतम केवल 50 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है (हालाँकि भारतीय न्याय संहिता, 2023 और वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 में अधिक कड़ी सज़ा का प्रावधान है)। इस अधिनियम में संशोधन के संबंध में केंद्र सरकार को भेजे गए प्रस्ताव में PETA इंडिया ने पशुओं के प्रति क्रूरता के लिए सज़ा को काफी बढ़ाने की सिफारिश की है।

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