फैशन डे के मौके पर स्टेला मैककार्टनी और PETA इंडिया की संयुक्त अपील पर 50 से अधिक टॉप भारतीय फैशन डिज़ाइनरों ने पंख-मुक्त (feather-free) बनने की शपथ ली
फैशन डे (9 जुलाई) से ठीक पहले, जब प्रसिद्ध ब्रिटिश डिज़ाइनर स्टेला मैककार्टनी और PETA इंडिया ने पक्षियों के पंखों के लिए उन्हें किस तरह से क्रूरता से पाला और मारा जाता है, यह जानकारी साझा की, तब 50 से ज़्यादा प्रमुख भारतीय फैशन डिज़ाइनरों ने संकल्प लिया कि वे अब से अपने डिज़ाइनों में कभी भी पंखों का इस्तेमाल नहीं करेंगे। यह शपथ PETAIndia.com पर ‘फेदर-फ्री प्लेज’ के रूप में उपलब्ध है। इस पहल में शामिल डिज़ाइनरों में शामिल हैं: अनीता डोंगरे, अबू जानी और संदीप खोसला, गौरव गुप्ता, श्यामल और भूमिका, रीना ढाका, जेड बाय मोनिका एंड करिश्मा, राजदीप रानावत, बैगिट की संस्थापक नीना लेखी, विर्जियो के संस्थापक अमर नागरम, शुभिका शर्मा (पापा डोंट प्रीच की क्रिएटिव डायरेक्टर), क्रेशा बजाज, पूर्वी दोषी, ध्रुव कपूर, आशीष एन सोनी, ज़ूक के प्रदीप कृष्णकुमार और पिया टत्रिवेदी (Pia’s Faux)।
अबू जानी और संदीप खोसला ने कहा- “क्रूरता कोई फैशन नहीं है, दोस्तों! हम यह शपथ लेते हैं कि हम ऐसा फैशन बनाएंगे जो पक्षियों के अधिकारों और आज़ादी का शोषण न करे। आइए हम पक्षियों की रक्षा का संकल्प लें और पंख-मुक्त बनने की दिशा में आगे बढ़ें। असली स्टाइल वही है जिसमें करुणा हो।”
हर पंखदार पोशाक या एक्सेसरी के पीछे ऐसे पक्षी होते हैं जिन्हें ज़िंदा नोचा गया या मार दिया गया, जबकि वे मरना नहीं चाहते थे। हम उन सभी दूरदर्शी डिज़ाइनरों की सराहना करते हैं जिन्होंने यह संकल्प लिया है कि पंख उन्हीं पक्षियों के पास रहेंगे, जिनके साथ वे पैदा हुए हैं। हम दूसरों से भी अपील करते हैं कि वे इस पहल का अनुसरण करें।
पंख-मुक्त बनने की शपथ लेने वाले डिज़ाइनर्स और ब्रांड्स:
- अनीता डोंगरे
- अबू जानी और संदीप खोसला
- श्यामल शोधान और भूमिका शोधान (श्यामल एंड भूमिका)
- गौरव गुप्ता
- मोनिका शाह (जेड बाय मोनिका एंड करिश्मा)
- अर्शिया सिंह
- आरती विजय गुप्ता
- शुभिका शर्मा (पापा डोंट प्रीच की डिज़ाइनर और क्रिएटिव डायरेक्टर)
- क्रेशा बजाज
- राजदीप रानावत
- नीना लेखी (बैगिट की संस्थापक)
- रीना ढाका
- दिव्या शेट
- लीना सिंह (अशीमा-लीना)
- अमर नागरम (विर्जियो के संस्थापक)
- अभिषेक रॉय (रॉय कोलकाता)
- आशीष एन सोनी
- निखी महाजन
- अंजना भार्गव
- पूर्वी दोषी
- प्रीति वर्मा (रनअवे बाइसिकल)
- प्रदीप कृष्णकुमार और दिशा सिंह (ज़ूक)
- पिया ट्रिवेदी (पिया’ज़ फॉक्स)
- श्रेया मूणा (द फ्रू फ्रू स्टूडियो)
- स्नेहा अरोड़ा
- रिचर्ड पंडव और अमित विजय (एमरिच डिज़ाइंस)
- अनीथ अरोड़ा (पेरो)
- रीना सिंह (ईका डिज़ाइन स्टूडियो)
- श्रद्धा कोचर (स्टूडियो लोटा)
- ऋषि चौधरी (रितंभ कुट्योर)
- राकेश अग्रवाल
- आशीष पांडे
- पल्लवी सिंह (आर्कवेश)
- नूपुर बत्रा (अनन्या बाय नूपुर)
- ध्रुव कपूर
- अबीर और नांकी (लाइमरिक डिज़ाइंस)
- सिद्धार्थ सिन्हा (एन एंड एस गाया)
- जतिन कोचर
- राहुल सिंह
- राहुल लूथरा (राबता बाय राहुल)
- शंतनु गोयनका
- रितेश कुमार
- निदा महमूद
- परेश लांबा
- सुषमा मेहता शाह (रिजुवेनेट ज्वेल्स)
- उमा प्रजापति (उपासना डिज़ाइन स्टूडियो)
- पल्लवी ध्यानी (थ्री)
- चारु पराशर
- पंकजा सेठी
- नंदिनी बरुआ (किरेमेकी)
- सिद्धांत महापात्र
- सार्थक खंडेलवाल (वायकती इंडिया)
- किरण उत्तम घोष
- तेजस गांधी
- अमन टक्यार
- अर्चना जैन (फ्लोरियन फाउंडेशन)
डिज़ाइनर गौरव गुप्ता कहते हैं, “हम अपने ब्रांड में यह मानते हैं कि फैशन सिर्फ दिखावा नहीं होता, बल्कि वह संवेदनशीलता और समझदारी का एक ज़रिया भी हो सकता है। जब हम कोई परिधान बनाते हैं, तो उसमें भावना, कल्पना और कहानी होती है – लेकिन यह सब बिना किसी भी जीव को तकलीफ़ पहुँचाए। यही वजह है कि मैंने PETA की ‘पंख-मुक्त फैशन’ शपथ ली है। मेरे लिए यह बहुत स्वाभाविक था, क्योंकि मैं मानता हूँ कि सच्ची सुंदरता कभी किसी की जान की क़ीमत पर नहीं होनी चाहिए।”
डिज़ाइनर आशीष एन. सोनी ने साझा किया, “मैंने यह शपथ इसलिए नहीं ली कि ऐसा करना आजकल ठीक माना जाता है, बल्कि इसलिए क्योंकि मैं इस बात को दिल से मानता हूँ। पंख-मुक्त रहना मेरे लिए एक व्यक्तिगत और ज़िम्मेदार फ़ैसला है। मैं खुद इसका पालन करूँगा और कोशिश करूँगा कि मेरे साथी डिज़ाइनर भी इस दिशा में सोचें।”
प्रकृति में शुतुरमुर्ग अपने बच्चों की देखभाल मिलकर करते हैं, हंस जीवनभर एक साथी के साथ रहते हैं, और बतखें आपस में आवाज़ और शरीर की भाषा से संवाद करती हैं। लेकिन फैशन के लिए, इन पक्षियों को पूरी तरह होश में रहते हुए जबरन नोच लिया जाता है, या उन्हें मारकर उनके पंख निकाले जाते हैं। पंखों का व्यापार मांस उद्योग को भी बढ़ावा देता है, क्योंकि पंखों की कीमत प्रति किलो मांस से कहीं अधिक होती है। PETA US की एक जांच में सामने आया कि दुनिया की सबसे बड़ी शुतुरमुर्ग वध कंपनियों में डरे हुए पक्षियों (जिनकी उम्र केवल 1 साल तक की होती है) को जबरन एक छोटी-सी जगह में धकेल दिया जाता है, उन्हें बिजली के झटके दिए जाते हैं, और फिर उनके साथियों के सामने ही उनका गला काट दिया जाता है।
दुनियाभर में PETA की शाखाएं स्टेला मैककार्टनी के साथ मिलकर फैशन डिज़ाइनरों से यह अपील कर रही हैं कि वे अपने डिज़ाइनों में कभी भी पंखों का इस्तेमाल न करें। पहले ही कई अंतरराष्ट्रीय फैशन ब्रांड पंख-मुक्त बनने की शपथ ले चुके हैं। साथ ही, कुछ इनोवेटिव डिज़ाइनर अब बांस, धातु और रिसाइक्ल की गई सामग्री से वीगन पंख भी बना रहे हैं।

