करीमनगर: PETA इंडिया, श्रीमती मेनका गांधी और SAFI हैदराबाद के हस्तक्षेप के बाद बकरी की बलि के खिलाफ़ FIR दर्ज हुई

Posted on by Shreya Manocha

करीमनगर के रेकुर्थी गांव स्थित पोचम्मा मंदिर में 29 जून को बकरियों की क्रूर हत्या के वीडियो सामने आने के बाद, PETA इंडिया ने श्रीमती मेनका गांधी के हस्तक्षेप और हैदराबाद स्थित स्ट्रे एनिमल फाउंडेशन ऑफ इंडिया (SAFI) के सहयोग से कोथापल्ली पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज करवाने में सफलता पाई है।

इस क्रूर वीडियो में देखा जा सकता है कि कई बकरियों को चाकू से बेरहमी से गला रेतकर मारा गया—जिससे उन्हें भय, दर्द और पीड़ा का सामना करना पड़ा। यह कृत्य दिनदहाड़े और सार्वजनिक रूप से लोगों के सामने अंजाम दिया गया, जो न केवल अमानवीय है बल्कि कानून का सीधा उल्लंघन भी है।

PETA इंडिया ने SAFI हैदराबाद के क्रूरता निवारण प्रबंधक श्री अदुलापुरम गौतम द्वारा दायर औपचारिक शिकायत के आधार पर कोथापल्ली पुलिस के साथ समन्वय करते हुए FIR की शीघ्र पंजीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। वीडियो में दिखाई देने वाले आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 325; तेलंगाना पशु और पक्षी बलि निषेध अधिनियम (TABSPA), 1950 की धारा 6; और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (PCA), 1960 की धारा 11(1)(a) व 11(1)(i) के तहत FIR दर्ज की गई है।

BNS की धारा 325 के अंतर्गत किसी भी पशु को अपंग करने या मारने को संज्ञेय अपराध माना गया है, जिसकी सजा पांच वर्ष तक की कैद, जुर्माना या दोनों हो सकती है। TABSPA की धारा 6 के अंतर्गत किसी व्यक्ति द्वारा अपने नियंत्रण या स्वामित्व वाले स्थान पर बलि की अनुमति देना, बलि करना या उसमें भाग लेना दंडनीय अपराध है। PCA अधिनियम की धारा 11 में “क्रूरता” को परिभाषित करते हुए, किसी भी पशु को अनावश्यक पीड़ा पहुँचाना दंडनीय अपराध घोषित किया गया है।

PETA इंडिया, श्री वेंकटारमन (अपर पुलिस उपायुक्त, करीमनगर) की सराहना करता है, जिन्होंने FIR के शीघ्र पंजीकरण का निर्देश देकर यह स्पष्ट संदेश दिया कि पशुओं पर की गई क्रूरता अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पशु बलि न केवल पशुओं के लिए क्रूर है, बल्कि समाज के लिए भी खतरनाक है—यह हमें हिंसा के प्रति असंवेदनशील बनाती है और प्रगति में बाधक पुरानी मान्यताओं को मजबूती देती है। जिस प्रकार आज मानव बलि को हत्या माना जाता है, उसी तरह जब भारत अंतरिक्ष अभियानों की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तो पशु बलि जैसी प्राचीन प्रथा का अंत किया जाना अत्यंत आवश्यक है।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट आदेश दिया है कि पशुओं का वध केवल लाइसेंस प्राप्त वधशालाओं में ही किया जा सकता है, और नगर निकायों को इस नियम का पालन सुनिश्चित करना अनिवार्य है। पशु क्रूरता निवारण (वधशाला) नियम, 2001 और खाद्य सुरक्षा एवं मानक (खाद्य व्यवसायों के लाइसेंस और पंजीकरण) विनियम, 2011, केवल उन्हीं लाइसेंसशुदा वधशालाओं में खाद्य हेतु पशु वध की अनुमति देते हैं, जो प्रजाति-विशिष्ट बेहोशी उपकरणों से सुसज्जित हों।

गुजरात, केरल, पुदुचेरी और राजस्थान में मंदिरों या उनके परिसर में किसी भी प्रकार की धार्मिक पशु बलि पर पहले से ही विशेष रूप से प्रतिबंध है। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में सार्वजनिक धार्मिक स्थलों या जुलूसों में पशु बलि पर रोक लगाई गई है।

पशु बलि पर पूर्ण प्रतिबंध की माँग उठाइए