पेप्सी की चीनी के लिए बैलों पर अत्याचार: पीटकर और नुकीली कीलों से घायल कर गन्ने से लदी भारी गाड़ियां खिंचवाई जा रहीं, PETA इंडिया ने नई पीढ़ी से आवाज़ उठाने की अपील की

Posted on by Surjeet Singh

भारत में पेप्सी द्वारा नई पीढ़ी (Gen Z) के लोगों पर बड़े पैमाने पर ध्यान केंद्रित करते हुए विज्ञापन किए जा रहे हैं। इसी के बीच, PETA इंडिया मुंबई, दिल्ली, चेन्नई और कोलकाता के कॉलेजों और संस्थानों के बाहर ये संदेश प्रदर्शित कर रहा है: “पेप्सी: बैलों पर क्रूरता बंद करो! कोई भी क्रूरताभरा पेय नहीं चाहता। गन्ना ढोने के लिए बैलों को मजबूर करने के लिए नुकीले, काँटेदार व अन्य यातना देने वाले उपकरणों का इस्तेमाल बंद करो।” PETA इंडिया का उद्देश्य नई पीढ़ी के लोगों को आवाज़ उठाने के लिए प्रेरित करना है। यह पीढ़ी पशुओं से प्रेम करने वाले युवाओं की पीढ़ी है। PETA चाहता है कि शीतल पेय बनाने वाली इस बड़ी कंपनी से अपनी ही पशु कल्याण नीति का उल्लंघन बंद करने की मांग की जाए। कंपनी ऐसे भागीदारों और आपूर्तिकर्ताओं के माध्यम से चीनी प्राप्त करती है, जिनके लिए बैलों को पीटा जाता है, कोड़े मारे जाते हैं और गन्ने का भारी बोझ ढोने के लिए मजबूर किया जाता है।

ऊपर चित्र में छोटी तस्वीर में दिखाई दे रहे बैल को भारी बोझ खींचने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उसके दोनों ओर नुकीली कीलों वाला जुआ लगाया गया है, जो बैल को अपना सिर दायें या बाएं घुमाने से रोकता है और उसकी गर्दन पर दर्दनाक घाव और खून बहने का कारण बनता है।

कंपनी का भारतीय बोटलिंग पार्टनर (पेय पदार्थ तैयार करने वाला भागीदार) उन क्षेत्रों से चीनी प्राप्त करता है, जहां बैलों को डंडों और कोड़ों से पीटा जाता है। इन बैलों को चार टन तक गन्ने से अवैध रूप से जरूरत से ज्यादा लदी गाड़ियां खींचने के लिए मजबूर किया जाता है। इस तरह का बेहद कठिन और थका देने वाला काम न केवल दर्दनाक फोड़े और मांसपेशियों में फटाव पैदा करता है, बल्कि कई पशुओं के चेहरे पर कांटेदार तार की नुकीली कीलों से खून से भरे घाव भी हो जाते हैं। गन्ने से लड़ी गाड़ी खींचने के लिए उन्हें अपना सिर एकदम स्थिर रखना होता है और यदि वे इस काम से विरोध करने की अवस्था में अपना सिर जरा भी दायें या बाएं घुमाते हैं तो गर्दन के दोनों ओर लगे नुकीले उपकरण उनके चेहरे में चुभ जाते हैं।

भारत में काम करने वाले पशु संरक्षण संगठन एनिमल राहत ने 2011 से अपने गन्ना उद्योग मशीनीकरण परियोजना के माध्यम से बैलगाड़ियों की जगह अधिक कुशल और कम खर्चीले मशीनों से चलने वाले विकल्प अपनाने के लिए काम किया है। इस परियोजना के प्रयासों के परिणामस्वरूप महाराष्ट्र के गन्ना उत्पादन का एक-तिहाई हिस्सा मशीनीकृत हो चुका है। एक ट्रैक्टर एक बार में 18 टन तक चीनी ले जाने में सक्षम है, जिससे पशु मालिकों को बेहतर आय के अवसर मिलते हैं।

बैल अत्यंत सामाजिक पशु हैं और यदि उन्हें अवसर मिले, तो वे अपने झुंड के दूसरे सदस्यों के साथ लंबे समय तक सहयोगपूर्ण संबंध बनाते हैं। PETA इंडिया सभी लोगों से अपील करता है कि वे पेप्सीको से अपने भागीदारों और आपूर्तिकर्ताओं को मानवीय और आधुनिक पर्यावरण-अनुकूल ट्रैक्टरों का इस्तेमाल करने के लिए कहकर बैलों को पूरी ज़िंदगी की पीड़ा से बचाने में मदद करें।

इस वर्ष की शुरुआत में पेप्सीको के गुरुग्राम स्थित मुख्यालय और हैदराबाद स्थित पेप्सीको के वैश्विक व्यावसायिक सेवाओं (जीबीएस) कार्यालय के बाहर “पेप्सी: सिर्फ बुलबुले, दिल नहीं। चीनी के लिए पशुओं पर क्रूरता बंद करो” संदेश वाले बड़े विज्ञापन बोर्ड भी लगाए गए थे।

पेप्सी की चीनी के लिए बैलों पर होने वाली क्रूरता को खत्म करने में मदद करें!