शर्मनाक: हथिनी माधुरी के साथ फिर धोखा- वनतारा के प्रभाव में हाई-पावर्ड कमेटी ने उसे उसी जगह वापस भेजने का आदेश दिया, जहां जंजीरों में रहने के दौरान वह मानसिक और शारीरिक रूप से टूट गई थी

Posted on by Surjeet Singh

जियो और रिलायंस के उत्पादों के बहिष्कार और हथिनी माधुरी को वापस लाने के लिए लगातार चलाए गए राजनीतिक अभियान के बाद, 9 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट की हाई-पावर्ड कमेटी (HPC) ने हथिनी माधुरी को कोल्हापुर के एक मठ में उसी सुनसान और बदहाल शेड में वापस भेजने का आदेश जारी किया, जहां रहने के कारण वह इतनी मानसिक परेशानी में आ गई थी कि उसने वर्ष 2017 में मठ के पुजारी को मार दिया था और 2022 में धार्मिक जलूस के दौरान एक व्यक्ति पर  हमला किया था। करीब एक साल पहले HPC और बॉम्बे हाई कोर्ट ने हथिनी माधुरी को जामनगर स्थित वनतारा में पुनर्वास के लिए भेजने का आदेश दिया था (वनतारा रिलायंस के स्वामित्व में है) PETA इंडिया के प्रयासों के बाद, उसकी हिंसक प्रवृत्ति और बिगड़ी हुई शारीरिक और मानसिक स्थिति को देखते हुए इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था।

यह नया आदेश उसी दिन हुई HPC की बैठक में वनतारा द्वारा माधुरी की जिम्मेदारी से पीछे हटने के बाद आया है। यह फैसला माधुरी के लिए खतरनाक है, क्योंकि उसे लंबी दूरी तक वापस मठ ले जाना होगा, वह विशेष पशु चिकित्सा देखभाल से वंचित होगी (यह तथ्य HPC की अपनी ही एक हालिया रिपोर्ट में सामने आया है) इसके अलावा, वनतारा में पुनर्वास के दौरान माधुरी ने जो गहरे सामाजिक संबंध बनाए हैं, वे भी टूट जाएंगे। वह मठ में 33 वर्षों तक अकेली और जंजीरों में रही थी। सुप्रीम कोर्ट की अपनी हाई-पावर्ड कमेटी (HPC) ने कुछ ही सप्ताह पहले उस शेड का निरीक्षण किया था, जहां मठ माधुरी को रखना चाहता है, और पाया था कि वह माधुरी की लंबे समय तक देखभाल और प्रबंधन के लिए अपर्याप्त और अनुपयुक्त है। तो अचानक फिर ऐसा क्या हुआ?

इस आदेश से सिर्फ तीन महीने पहले, वनतारा  की अपनी पशु चिकित्सा टीम ने रिपोर्ट किया था कि जब माधुरी को वनतारा लाया गया था तब वह “गंभीर और लंबे समय से चली आ रही पैरों और हड्डियों से जुड़ी समस्याओं” से पीड़ित थी। टीम ने बताया था कि ‘लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के कारण उसकी चोटें अब भी बनी हुई हैं” और उसे “लंबे समय तक बेहतर स्वास्थ्य लाभ के लिए लगातार विशेष उपचार, सहायक देखभाल और समय-समय पर निगरानी की जरूरत होगी।” वनतारा  की अपनी एक्स-रे रिपोर्ट में माधुरी कि हड्डियों में फ्रैक्चर की रेखाएं  दिखाई गई थीं, जो “अब भी बनी हुई हैं और इनके लिए लगातार निगरानी और लंबे समय तक उपचार एवं देखभाल की जरूरत होगी।” फिर भी 9 सितंबर की सुनवाई में वनतारा  ने अचानक अपना रुख बदल लिया। उसने माधुरी की गंभीर शारीरिक और मानसिक जरूरतों को नजरअंदाज करते हुए दावा किया कि “माधुरी को [वनतारा] परिसर में रखना अब माधुरी या मठ के हित में नहीं है।” हो सकता है कि माधुरी को वनतारा में रखना और उसका पुनर्वास करना रिलायंस के व्यावसायिक हित में न हो, लेकिन यह निश्चित रूप से इस बीमार हाथी के हित में है। अब जो बात महत्वपूर्ण लगती है, वह यह है कि HPC की सुनवाई से कुछ ही दिन पहले, वनतारा के एक वरिष्ठ प्रतिनिधि ने PETA इंडिया से संपर्क कर उसकी फंडिंग जरूरतों की एक सूची मांगी थी जो अब PETA इंडिया को इस मामले पर चुप कराने के लिए दिया गया प्रलोभन जैसा प्रतीत होता है।

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Vantara (@vantara)

जुलाई 2025 में माधुरी को वनतारा के राधे कृष्णा टेंपल एलीफेंट वेलफेयर ट्रस्ट (RKTEWT) में स्थानांतरित किए जाने के कुछ ही दिनों के भीतर, PETA इंडिया की शिकायत के बाद HPC के आदेश और बॉम्बे हाई कोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी से किए गए इस स्थानांतरण के बाद पूर्व सांसद राजू शेट्टी के नेतृत्व में #BoycottJio विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। पिछले साल महाराष्ट्र सरकार और वनतारा ने मीडिया में आश्वासन दिया था कि राज्य में अत्याधुनिक वनतारा सुविधा स्थापित की जाएगी, लेकिन अब ऐसी किसी सुविधा की योजना नहीं बनाई जा रही है।

जब इस वर्ष जून माह में मठ ने माधुरी को उसी बदहाल शेड में वापस ले जाने के लिए आवेदन किया, जहां उसे वर्षों तक जंजीरों में रखा गया था, तो HPC ने 9 अगस्त 2026 को सुविधा का निरीक्षण करने के लिए एक उप-समिति भेजी। निरीक्षकों ने सुरक्षित पानी, विशेष पशु चिकित्सा देखभाल की व्यवस्था की कमी, उसके चलने के लिए उचित रास्ता न होने और सामाजिक संपर्क के लिए पर्याप्त व्यवस्था न होने सहित कई अन्य समस्याओं पर चिंता जताई। मठ ने उप-समिति के सामने स्वीकार किया कि यह सुविधा “पूरी तरह धार्मिक उद्देश्य” के लिए है और माधुरी के पुनर्वास के लिए नहीं है। उप-समिति ने निष्कर्ष निकाला कि यह शेड माधुरी के “लंबे समय तक प्रबंधन” के लिए अनुपयुक्त है। इसके बावजूद, वनतारा  के सक्रिय दबाव के बाद अब माधुरी को वापस भेजने का आदेश दिया गया है, जहां उसे उन्हीं पुरानी परिस्थितियों में रहना होगा, जिनके कारण वह हिंसक हो गई थी और उसके पैरों और टांगों में लंबे समय से चली आ रही और दर्दनाक समस्याएं पैदा हुई थीं। यह कमेटी की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर शर्मनाक सवाल है, जिसने हाथियों का सम्मान करने की भारत की प्रतिष्ठा को ताक पर रख दिया है।

PETA इंडिया माधुरी के स्थायी पुनर्वास के लिए वनतारा में उसे रखने संबंधी बॉम्बे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को लागू करवाने के लिए अपना प्रयास जारी रखने का संकल्प लेता है।

माधुरी की सहायता करें!