पेप्सी शुगर इंडस्ट्री में बैलों पर होने वाली क्रूरता को दे रहा है- PETA इंडिया के नए बिलबोर्ड संदेश में कार्रवाई की मांग
“चीनी के लिए पशुओं पर क्रूरता बंद करो” यही नया संदेश PETA इंडिया ने पेप्सिको इंडिया मुख्यालय के बाहर लगाए गए एक बड़े होर्डिंग के जरिए दिया है। सॉफ्ट ड्रिंक कंपनी पेप्सिको अपनी ही पशु-कल्याण नीति का उल्लंघन कर रही है, क्योंकि उसके साझेदार और आपूर्तिकर्ता उन खेतों से चीनी प्राप्त करते हैं जहां बैलों को मारा पीटा जाता है, कोड़े मारे जाते हैं और भारी गन्ने से लदी गाड़ियां खींचने के लिए मजबूर किया जाता है।
कंपनी का भारतीय बॉटलिंग पार्टनर जहां से चीनी लाते हैं वहाँ बैलों का इस्तेमाल होता है और उस काम के लिए बैलों को डंडों और कोड़ों से पीटा जाता है, जबकि वे अवैध रूप से चार टन तक गन्ने से लदी गाड़ियों को खींचने के लिए संघर्ष करते हैं। इतना कठिन श्रम न केवल दर्दनाक फोड़े और मांसपेशियों में गंभीर चोटें पैदा करता है, बल्कि कई पशु कांटेदार तार जैसे नुकीले उपकरणों से भी घायल हो जाते हैं, जो बैलगाड़ी खींचने के दौरान उनके सिर के दोनों ओर लगे ताकि वो अपना सिर नया घुमाया पाए और “अवज्ञा” करने पर उनके चेहरे पर जख्म हो जाते हैं।
संयुक्त राज्य अमेरिका में भी PETA ने इसी मुद्दे को लेकर पेप्सिको के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई की है। फरवरी 2026 में, PETA फाउंडेशन के वकीलों द्वारा मुकदमा दायर किए जाने के बाद, पेप्सिको को अपने सप्लाई चेन में पशुओं पर होने वाली क्रूरता से संबंधित प्रस्ताव पर शेयरधारकों को मतदान की अनुमति देनी पड़ी। मई में, बैलों की वेशभूषा में पांच प्रदर्शनकारियों ने कंपनी की वार्षिक शेयरधारक बैठक के दौरान न्यूयॉर्क स्थित पेप्सिको मुख्यालय में अपने पैरों को सीमेंट में जाम कर करके प्रदर्शन किया जिस दौरान उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। PETA ने पर्याप्त शेयरधारको का समर्थन हासिल कर लिया है, जिससे यह प्रस्ताव अगले वर्ष फिर से पेश किया जाएगा।

यह होर्डिंग सदर्न पेरिफेरल रोड (SPR रोड), वटिका चौक के पास, टाटा प्रिमांटी के सामने, सेक्टर 69, गुरुग्राम, 122004 में स्थित है।
PETA समर्थित पशु कल्याण संस्था एनिमल राहत वर्ष 2011 से अपने “शुगरकेन इंडस्ट्री मेकनाइजेशन प्रोजेक्ट” के तहत बैलगाड़ियों की जगह अधिक प्रभावी और किफायती मशीनी विकल्प उपलब्ध कराने पर काम कर रहा है। इस परियोजना के प्रभाव से महाराष्ट्र के एक-तिहाई चीनी उत्पादन में मशीनीकरण किया जा चुका है जिसके तहत बैलगाड़ी की जगह मोटर चालित वाहन को बढ़ावा दिया गया है। एक ट्रैक्टर एक बार में 18 टन तक गन्ना ढो सकता है, जिससे मालिकों को बेहतर आय के अवसर मिलते हैं।
बैल बेहद सामाजिक पशु होते हैं, जो अवसर मिलने पर अपने झुंड के अन्य सदस्यों के साथ लंबे समय तक सहयोगपूर्ण संबंध बनाते हैं। PETA इंडिया सभी से आग्रह करता है कि वे पेप्सिको से मांग करें कि उसके साझेदार और आपूर्तिकर्ता मानवीय और आधुनिक इको-ट्रैक्टर अपनाएं, ताकि बैलों को गन्ने के खेतों में आजीवन पीड़ा और शोषण से बचाया जा सके।
पेप्सी की चीनी के लिए अत्याचार झेल रहे बैलों की आवाज़ उठाइए!
