हेन-डिपेंडेंस डे मनाएँ: PETA इंडिया के नए होर्डिंग ने नागरिकों से मुर्गियों को भी आज़ादी देने की अपील की
भारतवर्ष की स्वतंत्रता के 79 वर्ष पूरे होने के अवसर पर, पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया (PETA इंडिया) ने नई दिल्ली, कोलकाता, बेंगलुरु, चेन्नई और मुंबई में आकर्षक होर्डिंग लगाए हैं, जिन पर लिखा है, “मुर्गियों का स्वतंत्रता दिवस मनाएँ, इस बदलाव का समर्थन करें! कृपया, वीगन बनें।” इन होर्डिंग्स का उद्देश्य लोगों को यह याद दिलाना है कि पशु भी आज़ादी के हकदार हैं, पीड़ा से मुक्त जीवन की आज़ादी। यह होर्डिंग भारत में अरबों मुर्गियों की दयनीय स्थिति की ओर ध्यान आकर्षित करते हैं, जिन्हें अंडों और मांस के लिए पूरी ज़िंदगी गंदी, तंग पिंजरों और शेडों में कैद रखा जाता है, और लोगों से अपील करता है कि वे स्वतंत्रता दिवस पर और हर दिन वीगन जीवनशैली अपनाएँ। अपने किचन को “हेन-हैप्पी” बनाने के लिए PETA इंडिया का निःशुल्क Vegan Starter Kit प्रदान कर रहा है।
The billboard in Bengaluru is located at Inder Nagar, Byappanahalli, Towards Silk Board, Sadanandanagar, Bennigana Halli, Bengaluru, Karnataka, 560038
The billboard in Delhi is located at Palam Marg, Sonia Gandhi Camp, Sector 6, Rama Krishna Puram, Vasant Vihar, Outer Ring Road, New Delhi, 110022
The billboard in Chennai is located at Women’s Christian College, College Road, Subba Road Avenue, Nungambakkam, Chennai, Tamil Nadu – 600006
The billboard in Mumbai is located at Swami Vivekananda Road, Santosh Nagar, towards Bandra Linking Road, Bandra West, Mumbai, Maharashtra 400050.
The billboard in Kolkata is located near the Kolkata Co-operative Housing Society, 36/C, Ballygunge Circular Road, Ballygunge Phari Junction, Facing Park Circus, Kolkata, West Bengal 700019.
भारत अपनी आहार संबंधी नैतिक परंपरा के लिए विश्वभर में सराहा जाता है। Statista Consumer Insights के एक सर्वेक्षण के अनुसार, मांस-मुक्त आहार अपनाने के मामले में भारत दुनिया में अग्रणी है। साथ ही, अब 9% भारतीय स्वयं को वीगन (पूर्णतः पौध-आधारित आहार अपनाने वाले) के रूप में पहचानते हैं।
मुर्गियाँ बुद्धिमान जीव हैं, जिनकी सोचने-समझने की क्षमता बिल्लियों, कुत्तों और यहाँ तक कि कुछ प्राइमेट्स के समान होती है। फिर भी, अंडा उद्योग में हजारों मुर्गियों को गंदे तार वाले पिंजरों में ठूँसकर रखा जाता है, जहाँ उनके पास अपने एक पंख तक फैलाने की जगह नहीं होती। उन्हें अधिक जगह देने के बजाय, मुर्गीपालन केंद्रों में उनकी संवेदनशील चोंच के सिरे काट दिए जाते हैं ताकि तंग कैद से होने वाली निराशा में वे एक-दूसरे को चोंच न मारें। लगभग दो साल की उम्र के बाद, जब उनका अंडा उत्पादन कम हो जाता है, तो उन्हें “अनुपयोगी” मान लिया जाता है, भीड़भाड़ वाले शेडों में मांस के लिए पाली गई मुर्गियों की तरह ट्रकों में भरकर उनकी हत्या के लिए भेज दिया जाता है, जहाँ कई मुर्गियों का तो उनके होश में होने के दौरान ही गला काट दिया जाता है। क्यूंकि नर चूजे आगे चलकर अंडे नहीं दे पाएंगे इसलिए अंडा उद्योग में उन्हें “बेकार” समझा जाता है और लाखों की संख्या में उन चूज़ों को ज़िंदा पीसकर, कुचलकर, डुबोकर, जलाकर या अन्य बेहद क्रूर तरीकों से मार दिया जाता है।
जो भी व्यक्ति वीगन बनता है, वह हर वर्ष लगभग 200 पशुओं की जान बचाता है, अपने कार्बन उत्सर्जन को काफी कम करता है और हृदय रोग, मधुमेह तथा कुछ प्रकार के कैंसर का जोखिम भी घटाता है। वीगन भोजन प्रोटीन का भी बेहतरीन स्रोत है। एक बड़े अंडे में लगभग 6 ग्राम प्रोटीन होता है, जबकि एक कप पके हुए चनों में लगभग 14.5 ग्राम, एक कप उबली हुई मसूर दाल में 17.9 ग्राम और आधे कप सख्त टोफू में लगभग 20 ग्राम प्रोटीन होता है।
सुझावों और स्वादिष्ट व्यंजनों के लिए PETA इंडिया की वीगन गाइड देखें।
