PETA इंडिया के हस्तक्षेप के बाद छत्रपति संभाजीनगर में अवैध बुलफाइटिंग कार्यक्रम के लिए एफआईआर दर्ज की गई

Posted on by Surjeet Singh

एक अवैध बुलफाइटिंग कार्यक्रम के बारे में सोशल मीडिया पर प्रसारित एक पोस्टर पर कार्रवाई करते हुए, पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) इंडिया ने तुरंत हर्सुल पुलिस को सतर्क किया, जिसने कार्यक्रम को बीच में ही रुकवा दिया। PETA इंडिया के प्रयासों से इस गैरकानूनी आयोजन के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) भी दर्ज हुई।

01 जनवरी को, PETA इंडिया को “भव्य पशु प्रदर्शन” नामक एक अवैध बुलफाइटिंग कार्यक्रम के बारे में जानकारी मिली, जिसे उसी दिन अंबर हिल, जटवाड़ा रोड, छत्रपति संभाजीनगर – 431 101 में आयोजित किया जाना था। PETA इंडिया ने इस मामले को पुलिस आयुक्त, छत्रपति संभाजीनगर, के संज्ञान में लाते हुए, उनसे तत्काल कार्यवाही का अनुरोध किया। परिणामस्वरूप, स्थानीय पुलिस को कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया, और अवैध आयोजन को बीच में ही रुकवा दिया गया।

इस गैरकानूनी कार्यक्रम को आयोजित करवाने के लिए, PETA इंडिया ने आयोजकों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई का अनुरोध करते हुए पुलिस में एक विस्तृत शिकायत दी और पुलिस की मदद से स्वत: संज्ञान एफआईआर पंजीकृत करवाई। नतीजतन, श्री जयहिंद चव्हाण एवं अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 3(5), 125, और 291 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11(1)(एम) के तहत एफआईआर दर्ज की गई।

‘पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960’ पशुओं को आपस में लड़ने के लिए उकसाने पर रोक लगाता है। 2014 में एक ऐतिहासिक फैसले में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं, PETA इंडिया और सरकारी सलाहकार निकाय, भारतीय जीव जन्तु कल्याण बोर्ड के पक्ष में फैसला सुनाते हुआ कहा गया था कि मनोरंजन के लिए बुलफाइटिंग, डॉगफाइटिंग और पशुओं के बीच आयोजित की जाने वाली अन्य तरह की लड़ाईयां क्रूर हैं और यह समाप्त होनी चाहिए।

बुलफाइटिंग में दो बैलों को एक दूसरे से लड़वाया जाता है जो पूरी तरह से हिंसक और खूनी टकराव होता है। इस खेल में लड़ने वाले पशुओं को मारा-पीटा जाता है और तब तक लड़ने के लिए उकसाया जाता है जब तक कि किसी एक को विजेता नहीं मान लिया जाता। इसका लक्ष्य इंसानों का मनोरंजन या फिर जुआ लगाने का एक खेल है। इस तरह के आयोजनों में भाग लेने वाले पशुओं को अत्यधिक शारीरिक और मनोवैज्ञानिक आघात होता है जिसमें फ्रैक्चर, हड्डियों का टूटना , घाव और गंभीर तनाव शामिल हैं।

पशुओं पर क्रूरता होते देखें तो यह कदम उठाएं