तमिलनाडु के Evolute Bioscience ने PETA इंडिया के साथ साझेदारी कर फार्माकोलॉजी की कक्षाओं में पशुओं पर होने वाले प्रयोग समाप्त करने का निर्णय लिया, जिससे हर वर्ष दर्जनों पशुओं की जान बचेगी
एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, Evolute Bioscience ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत वह अपनी फार्माकोलॉजी शिक्षा की कक्षाओं में पहले अनिवार्य रूप से कराए जाने वाले सभी पशु प्रयोगों को समाप्त करेगा और उनकी जगह वर्चुअल सिमुलेशन सॉफ्टवेयर का उपयोग करेगा। यह सॉफ्टवेयर PETA इंडिया द्वारा हिमाचल प्रदेश स्थित सिमुलेशन डेवलपर Simcology India के साथ साझेदारी में निःशुल्क उपलब्ध कराया गया है। यह निर्णय PETA इंडिया के साथ गैर-पशु अनुसंधान और शिक्षा पद्धतियों की विशेषताओं पर हुई चर्चाओं के बाद लिया गया है और इससे हर वर्ष अनुमानित तौर पर दर्जनों चूहों की जान बचने की उम्मीद है।
PETA इंडिया के साथ हुए समझौते के अनुसार, Evolute Bioscience ने स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर की फार्माकोलॉजी शिक्षा, शिक्षण, प्रशिक्षण और प्रदर्शन के साथ-साथ स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में अनुसंधान और थीसिस कार्य के लिए जीवित या मृत पशुओं तथा पशुओं के अंगों के उपयोग पर स्थायी रूप से प्रतिबंध लगा दिया है। इसके अलावा, Evolute Bioscience ने रोग मॉडल से जुड़े पशु परीक्षण पर आधारित एक नई शैक्षणिक धारा के लिए हर वर्ष कम से कम 50 चूहों की खरीद की अपनी योजना भी स्थायी रूप से रद्द कर दी है। Evolute Bioscience प्रयोगों के लिए 60 ज़ेब्राफ़िश का उपयोग भी बंद करेगा। एक सीमित अपवाद प्रावधान के तहत, यह बदलाव तब पूरा किया जाएगा जब Simcology के माध्यम से गैर-पशु सिमुलेशन मॉड्यूल अंतिम रूप से तैयार हो जाएगा। इस वैकल्पिक व्यवस्था के उपलब्ध होते ही Evolute Bioscience ज़ेब्राफ़िश पर होने वाले सभी प्रयोग रोक देगा।
PETA इंडिया द्वारा दान किया गया Simcology का इंटरैक्टिव सॉफ्टवेयर फार्माकोलॉजी के छात्रों को कंप्यूटर-सहायता प्राप्त शिक्षण पद्धति के माध्यम से प्रयोग करने की अनुमति देता है, जिससे उन पशुओं की जान बचती है जिन्हें अन्यथा रसायनों को सूंघने या निगलने के लिए मजबूर किया जा सकता है, बीमारियों से संक्रमित किया जा सकता है, उनका अंगभंग किया जा सकता है और अंत में दम घुटने या गर्दन मोड़कर मार दिया जाता है।
फार्माकोलॉजी के छात्रों को सर्वोत्तम प्रशिक्षण मिलना चाहिए, और इसका मतलब है कि क्रूर और पुराने प्रयोगों में पशुओं का अंगभंग करने और उन्हें मारने के बजाय आधुनिक सिमुलेशन उपकरणों का उपयोग किया जाए। चूहे और अन्य पशु मानव फार्माकोलॉजी शिक्षा के लिए प्रासंगिक नहीं हैं, और PETA इंडिया सभी फार्माकोलॉजी कार्यक्रमों से आग्रह करता है कि वे Evolute Bioscience के इस प्रगतिशील निर्णय का अनुसरण करें, ताकि छात्रों की शिक्षा को आगे बढ़ाया जा सके और पशुओं की जान बचाई जा सके।
PETA इंडिया की सिफारिशों के बाद, वर्ष 2022 में नेशनल मेडिकल कमीशन ने स्नातकोत्तर फार्माकोलॉजी पाठ्यक्रमों के लिए अपने दिशानिर्देशों में संशोधन किया। इसमें कई गैर-पशु शिक्षण और प्रशिक्षण पद्धतियों के उपयोग की सिफारिश की गई और पशुओं पर किए जाने वाले कुछ नियमित प्रयोगों को अब अनिवार्य नहीं रखा गया।
अनुसंधान से पता चलता है कि हर शैक्षणिक स्तर पर बड़ी संख्या में छात्र विच्छेदन और प्रयोगों में पशुओं के उपयोग से असहज महसूस करते हैं, और कुछ तो अपने सिद्धांतों के विरुद्ध जाने के बजाय वैज्ञानिक करियर से ही दूर हो जाते हैं। इसके अलावा, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर कार्यक्रमों का बार-बार उपयोग किया जा सकता है, जिससे समय और धन की बचत होती है और पशुओं की जान बचाकर पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी मदद मिलती है।
पशुओं पर प्रयोगों के इस्तेमाल को समाप्त करने में हमारी मदद करें।
