PETA India के वैज्ञानिक भविष्य में कीटनाशक विषाक्तता (pesticide toxicity) परीक्षण के लिए एक नई रूपरेखा तैयार करने में सहयोग कर रहे हैं।
ये मार्ग आगे बढ़ने के लिए कुछ प्रमुख कदम बताते हैं, जिनमें भारत के नियमों को अपडेट करना, वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त गैर-पशु (non-animal) परीक्षण विधियों को अपनाना, और वैज्ञानिक समुदाय को पशु-रहित तरीकों का प्रशिक्षण देना शामिल है। इसके साथ ही यह पेपर यह भी समझाता है कि नियामकों, उद्योग और व्यापक समुदाय के बीच बेहतर संवाद से गैर-पशु तरीकों के उपयोग में भरोसा और भी बढ़ेगा।
PETA इंडिया निर्णय लेने वालों से लगातार आग्रह करता रहेगा कि वे इन कदमों को अपनाएँ और नियामकों, उद्योग तथा अन्य वैज्ञानिकों के साथ मिलकर गैर-पशु तरीकों को पूरी तरह से स्वीकार करें। ऐसा करने से भारत मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा में वैश्विक नेतृत्व की स्थिति में आ सकता है, और कीटनाशक परीक्षण में पशुओं के उपयोग को समाप्त किया जा सकता है।
पुराने तरीकों को छोड़ें, नए को अपनाएँ!
भारत विज्ञान के एक नए युग में प्रवेश कर रहा है, जहाँ अत्याधुनिक तकनीक, मानव-प्रासंगिक गैर-पशु परीक्षण विधियाँ और करुणा मिलकर कीटनाशक विषाक्तता आकलन के भविष्य को आकार दे सकते हैं। लेकिन इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए वैज्ञानिकों को आपकी मदद की ज़रूरत है।
कदम उठाएँ और :
अधिकारियों से आग्रह करें कि वे कीटनाशक विषाक्तता परीक्षण में गैर-पशु विधियों को प्राथमिकता दें
